भारत के सागर की रक्षक अरिदमन

आज जब दुनिया भर में ईरान- अमेरिका-इजरायल युद्ध पर चर्चा हो रही है, तब यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर ईरान परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र होता तो क्या अमेरिका इस तरह का दुस्साहस करता? जवाब संभवतः नहीं में होगा। इसलिए सुरक्षा को अधिक से अधिक मजबूत करने को सभी देश प्राथमिकता देने लगे हैं। जापान जैसे देश भी उन्नत श्रेणी की मिसाइलें सीमा पर तैनात कर रहे हैं। भारत परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र है लेकिन पड़ोसी देश जब-तब दुस्साहस दिखाने का प्रयास करते हैं। इसका उन्हें करारा जवाब भी मिला है। इसके साथ ही देश की थल सेना ही नहीं वायु और समुद्री सेना को भी आधुनिकतम तकनीक से लैस किया जा रहा है। अब 3 अप्रैल 2026 को भारत के सागर की रक्षा में अरिदमन पनडुब्बी को लांच कर दिया गया है। अरिदमन का तात्पर्य ही है दुश्मन का दमन करने वाला। अरिदमन सबसे एडवांस तकनीकी वाली पनडुब्बी है जिसको देखकर ही दुश्मन थर्रा उठेगा। यह 8 लांच ट्यूब और के-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है। सबसे खास बात यह कि यह 90 फीसद स्वदेशी तकनीक से बनी है। इसका तात्पर्य यह कि कोई खराबी आने पर विदेशी तकनीशियनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
भारत से जुड़े समंदर के अंदर देश की अदृश्य ताकत बढ़ गई है। तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी 3 अप्रैल 2026 से देश की नौसेना में शामिल हो गयी है। ये अरहिंत क्लास की तीसरी पनडुब्बी है और नाम है अरिदमन यानी जो दुश्मन का नाश करे। इसके सामने दुश्मन का टिकना मुश्किल है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है शब्द नही शक्ति है अरिदमन। जाहिर सी बात है कि राजनाथ सिंह के इस पोस्ट से भारत के प्रतिद्वंद्वी चीन और पाकिस्तान की नींद उड़नी तय है। चार महीने से ये पनडुब्बी विशाखापट्टनम यार्ड में नौसेना में शामिल होने को तैयार है।
यह पनडुब्बी भारत की सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी वेसल प्रोगाम का हिस्सा है। यह परमाणु पनडुब्बी किसी भी देश के लिए बड़ी सैन्य और तकनीकी उपलब्धि मानी जाती है क्योंकि इसको बनाना बहुत मुश्किल होता है। अरिदमन पनडुब्बी परमाणु हमला करने में सक्षम है। हालांकि भारत की नीति साफ है कि वो कभी पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। ये पनडुब्बी 90 फीसदी स्वदेशी तकनीक से बनी है। इसमें परमाणु रिएक्टर भी लगा है जो इसे लगातार ऊर्जा सप्लाई करता है। यही वजह है कि इसे फ्यूल लेने के लिए सतह पर नहीं आना पड़ता। ये पनडुब्बी चुपचाप समंदर के अंदर घात लगाए बैठी रहती है और किसी को कानों कान खबर तक नहीं होती। पानी के अंदर इसे ढूंढ पाना भी बहुत मुश्किल है। यह पनडुब्बी न्यूक्लियर वॉरहेड लगी मिसाइलों को भी लॉन्च कर सकती है, जो समंदर से निकलकर आसमान या फिर जमीन पर अपने लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है।
इस पनडुब्बी का निर्माण सेना के गोपनीय कार्यक्रम का हिस्सा है, लिहाजा इसके बारे में बहुत कम जानकारी होती है। इस परमाणु पनडुब्बी का वजन करीब 7000 टन है, जो दिल्ली क्लास के डिस्ट्रॉयर से थोड़ा ज्यादा है। इसका डिजाइन ज्यादा आधुनिक है। पानी के अंदर इसकी रफ्तार 45 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है। अरिहंत और अरिघात पनडुब्बी से 1000 टन भारी अरिदमन ज्यादा घातक भी है। इसकी मिसाइल आक्रमण क्षमता दोगुनी है और रेंज भी ज्यादा है, जहां अरिहंत और अरिघात में 4 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब है वहीं अरिदमन में 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं। यह 750 से डेढ़ हजार किलोमीटर तक मार करने वाली 24 सागरिका के 5 बैलिस्टिक मिसाइल से लैस है तो लंबी दूरी तक मार करने वाली 8 बैलिस्टिक के-4 मिसाइलें भी इसमें लगी हैं। के-4 मिसाइल की रेंज है 3500 किलोमीटर है। भविष्य में इसे के 5 मिसाइलों से भी लैस किया जाएगा, जिसकी रेंज करीब 6000 किलोमीटर तक होगी।
इससे पहले, आईएनएस अरिहंत 2016 में तो आईएनएस अरिघात 2024 में कमीशन हुई थी। यह दोनों परमाणु पनडुब्बियां स्ट्रैटिजिक फोर्सेज कमांड के तहत काम करती हैं। साफ है कि अरिदमन के आने से नौसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा और समंदर के अंदर से हमला करने की क्षमता बढ़ जाएगी। दुनिया में गिनती के ही देश है जिनके पास अपने ही देश में बनी परमाणु पनडुब्बियां हैं और भारत उनमें से एक है।
भारत अपनी समुद्री ताकत में लगातार इजाफा करने की कोशिश में जुटा है। इसी कड़ी में स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन भारतीय नौसेना में शामिल की गयी है। आईएस अरिदमन को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना में शामिल किया है। समुद्री ताकत के लिहाज से इसे भारत के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। यह भारत की तीसरी स्वदेश में निर्मित परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बी है। साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वदेश में निर्मित युद्धपोत तारागिरी को भी विशाखापत्तनम में नौसेना के बेड़े में शामिल किया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईएनएस अरिदमन को नौसेना में शामिल करने से पहले इस पनडुब्बी की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा की। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलएंडटी द्वारा निर्मित और विशाखापत्तनम में गुप्त जहाज निर्माण केंद्र (एसबीसी) में निर्मित पनडुब्बी का महीनों से समुद्री परीक्षण चल रहा था। नौसेना में शामिल होने के बाद यह भारत की त्रि-सेवा परमाणु निवारक कमान, रणनीतिक बल कमान (एसएफसी) के तहत अपनी दो सहयोगी पनडुब्बियों में शामिल हो जाएगी। आईएनएस अरिदमन ने अंतिम चरण के ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद नौसेना में शामिल किया गया। इससे पहले, इसी क्लास की आईएनएस अरिहंत को 2016 में और आईएनएस अरिघात को 2024 में नौसेना में शामिल किया गया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेश निर्मित उन्नत युद्धपोत तारागिरी को विशाखापत्तनम में नौसेना के बेड़े में शामिल किया है। पूर्वी नौसेना कमान के एक आधिकारिक सूत्र के अनुसार, यह समारोह यहां नौसैनिक डॉकयार्ड में वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मैं विशाखापत्तनम में उन्नत युद्धपोत तारागिरी का जलावतरण करने जाऊंगा। इसे बेड़े में शामिल करना भारत के पूर्वी समुद्री तट के सामरिक और समुद्री महत्व को दर्शाता है। साथ ही कहा कि इसे बेड़े में शामिल करना भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और संचालन शक्ति को मजबूत करने पर लगातार ध्यान देने को दर्शाती है।
‘प्रोजेक्ट 17 ए के तहत चैथे प्लेटफॉर्म के रूप में तारागिरी 6,670 टन का युद्धपोत है, जिसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा बनाया गया है। इस युद्धपोत की बनावट कुछ ऐसी है कि इसका रडार पर दिखाई देने वाला आकार बहुत कम हो जाता है और यह जटिल समुद्री परिस्थितियों में अधिक सुरक्षित रहने में सक्षम है। यह पोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है।
यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल हैं। इन सभी को आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे उभरते खतरों का तेजी और सटीकता से सामना किया जा सकता है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



