बिहार में अब भाजपा का ‘सम्राट’

भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित बिहार राज्य में पहली बार भाजपा के सम्राट चैधरी ने मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला है। बिहार इतिहास और आध्यात्मिक महत्व से भरा हुआ है। भारत के दो सबसे शानदार राजवंश मौर्य (321 से 185 ईसा पूर्व) और गुप्त वंश (320 से 550 विक्रम संवत) प्राचीन बिहार मंे ही पनपे। बिहार को पहले मगध नाम से जाना जाता था। ब्रिटिश शासनकाल मंे महात्मा गांधी ने अंग्रेजों द्वारा नील की खेती करने वाले किसानों के उत्पीड़न के खिलाफ चंपारण क्षेत्र में ऐतिहासिक सत्याग्रह किया था और स्वतंत्रता के बाद यहीं से जयप्रकाश नारायण ने देशव्यापी आंदोलन करके कांग्रेस को सत्ता से दूर किया था। इसके बाद जनता दल की सरकार बनी और भाजपा ने भी सत्ता का स्वाद चखा लेकिन मुख्यमंत्री बनने का मौका तब भी नहीं मिला जब उसके पास सबसे ज्यादा विधायक थे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समझ मंे भी आ गया कि अब भाजपा को बिहार मंे उसका हक मिलना चाहिए। सम्राट चैधरी ने 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर बिहार मंे भी भगवा फहरा दिया है।
सम्राट चैधरी ने 15 अप्रैल को बिहार के सीएम पद की शपथ ले ली है। इसके साथ ही वह बिहार के 24वें मुख्यमंत्री हो गये हैं। विजय चैधरी के साथ विजेंद्र यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सीएम और डिप्टी सीएम पद की शपथ दिलाई है। दोनों डिप्टी सीएम जद(यू) से हैं। सम्राट चैधरी के सीएम बनने के बाद बिहार में नीतीश और लालू युग की राजनीति का अंत माना जा रहा है। अब तक बिहार इकलौता हिंदी भाषी राज्य था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं बन सका था। सम्राट चैधरी को मिलाकर अब देश के 16 राज्यों में भाजपा के सीएम हंै।
सम्राट चैधरी (बिहार) 15 अप्रैल 2026 को सीएम बने। इससे पूर्व युमनम खेमचंद सिंह (मणिपुर), रेखा गुप्ता (दिल्ली), देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र), नायब सिंह सैनी (हरियाणा), पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश), मोहन चरण माझी (ओडिशा), भजनलाल शर्मा (राजस्थान), मोहन यादव (मध्य प्रदेश), विष्णु देव साय (छत्तीसगढ़), डॉ. माणिक साहा (त्रिपुरा), भूपेंद्र पटेल (गुजरात), योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश), प्रमोद सावंत (गोवा), पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड) और हिमंत बिस्वा सरमा (असम) के मुख्यमंत्री बने। यूपी में योगी का दूसरा कार्यकाल है।
सम्राट चैधरी सीएम बनने से पहले बिहार के डिप्टी सीएम थे। बीते दिन नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट को बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुना था। गौरतलब है कि सम्राट आरएसएस की पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं। सम्राट के पिता शकुनी चैधरी बिहार के कद्दावर नेता माने जाते थे। सम्राट की राजनीति में एंट्री 1990 में हुई। साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में सम्राट चैधरी परबत्ता विधानसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीते थे लेकिन 2005 में इस सीट से चुनाव हारने के बाद उन्होंने 2010 में फिर से शानदार वापसी की। फिर साल 2014 में आरजेडी का साथ छोड़कर सम्राट जेडीयू में शामिल हो गए। हालांकि जेडीयू के साथ उनका साथ ज्यादा नहीं चला फिर 2017 में बीजेपी में शामिल हो गए। वर्ष 2023 में वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। जनवरी 2024 में नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाए गए और वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास, पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग को संभाला फिर 2025 के विधानसभा चुनाव में तारापुर से जीत दर्ज की। सिर्फ आठ से नौ साल में भाजपा में उनकी तेज तरक्की को पार्टी की ओबीसी आउटरीच रणनीति का नतीजा माना जा रहा है।
नरेंद्र मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार हरियाणा (2014), असम (2016), महाराष्ट्र (2014), मणिपुर (2017), ओडिशा में 2024 और अब बिहार में 2026 में भाजपा का मुख्यमंत्री बना है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मोदी लहर में ही पहली बार 2017 में भाजपा अपने बलबूते सत्ता में आई। सम्राट चैधरी इस लिस्ट में नया नाम है।
पूर्वोत्तर के राज्यों मेघालय, नगालैंड, पुडुचेरी और सिक्किम में बीजेपी के गठबंधन वाले सहयोगी दलों का मुख्यमंत्री है। इस फेहरिस्त में आंध्र प्रदेश भी शामिल है, जिसके मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनकी पार्टी टीडीपी केंद्र सरकार में भी बीजेपी की अहम सहयोगी है।
बिहार में बीजेपी दशकों तक नीतीश कुमार की जेडीयू के साझेदार की भूमिका में थी। आरजेडी और जेडीयू में रहे सम्राट चैधरी पर भले ही बाहरी होने का ठप्पा लगाया जाए, लेकिन पार्टी को असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा जैसे ऐसे लड़ाकू चेहरे की जरूरत थी जो लालू यादव के एमवाई समीकरण और नीतीश के लव-कुश वोट बैंक में सीधे सेंध लगा सके। सम्राट उस कोरी समुदाय से आते हैं जो बिहार की सत्ता की चाबी माना जाता है। नीतीश के केंद्र की राजनीति में लौटने के बाद बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन में बड़े नेता के तौर पर बड़ी शून्यता पैदा हुई है।। पहली बार मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही बीजेपी कमान अपने हाथ से नहीं निकलने देना चाहती और मजबूती से खंबा गाड़ना चाहती है।
सम्राट चैधरी भले ही पिछले दो साल से मुरैठा बांधकर सीधे नीतीश कुमार और लालू परिवार को चुनौती दे रहे थे। लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सहजता और उनका आक्रामक तेवर दौड़ में उन्हें सबसे आगे रखने में सफल रहा।उनकी बुलडोजर वाली छवि भी यूपी के योगी मॉडल से मेल खाती है। उनका यह लड़ाकू अंदाज बीजेपी के उस कोर कैडर को पसंद आता है जो सड़क पर उतरकर संघर्ष करना चाहता है। बिहार में नीतीश कुमार की ताकत का मुख्य आधार लव-कुश यानी कुर्मी-कोइरी वोट बैंक रहा है। सम्राट चैधरी कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं, जिसकी आबादी बिहार में करीब 4.2 फीसद से 5 फीसद है। बिहार में सोशल इंजीनियरिंग के सहारे पार्टी अभी पैठ और बढ़ाना चाहती है ताकि कभी भविष्य में गठबंधन की बैसाखी के बिना अकेले सियासी मैदान में कूदना पड़े तो वो तैयार रहे। महाराष्ट्र के राजनीतिक अनुभव को भी पार्टी ने ध्यान में रखा है। प्रखर हिंदुत्व की नीतियों के साथ उसने मंडल और कमंडल दोनों को साथा है। बिहार में यादव 14 फीसदी हैं, लेकिन गैर यादव ओबीसी और ईबीसी मिलकर करीब 50 फीसद से ज्यादा हैं। सम्राट चैधरी के पास एक लंबी राजनीतिक विरासत है। वो शकुनी चैधरी के पुत्र हैं, जो खुद बिहार की राजनीति के दिग्गज रहे हैं।। सम्राट ने पहले भी कई सरकारों में मंत्री के तौर पर काम किया है। उनके पास शासन चलाने का पर्याप्त अनुभव है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



