किम जोंग के ब्लैक आउट बम से चिंतित हैं ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस समय चैतरफा मुसीबत आई हुई है। कुछ मुसीबतों को तो उन्होने खुद जानबूझकर बुलाया है जैसे कि ईरान जबकि कुछ मुसीबतें ऐसी हैं, जो ट्रंप ने जाने-अनजाने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर अपने फैसलों से डाल दी हैं। ऐसी ही एक मुसीबत का नाम है- उत्तर कोरिया।।जिसके शासक किम जोंग उन ने अब एक बड़े सैन्य कदम से ट्रंप को कोरियाई प्रायद्वीप में बड़ा चैलेंज दे दिया है। अमेरिका के मित्र राष्ट्र दक्षिण कोरिया को भी परेशानी में डाल दिया है।
दरअसल, ईरान से अमेरिका के तनाव के बीच ही इसी हफ्ते उत्तर कोरिया में कई सैन्य टेस्ट किए गए हैं। इनमें कई नए हथियार भी शामिल हैं। इन टेस्ट में क्लस्टर बम वॉरहेड और बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन ने ये सारे परीक्षण खुद जाकर टेस्टिंग फील्ड में देखे हैं। दुनिया के सामने क्लस्टर बमों और ब्लैक आउट बमों का जखीरा पेश किया है। ऐसे ही एक ब्लैक आउट बम का नाम है- कार्बन फाइबर, जिसे दुनिया का सबसे खतरनाक बम माना जा रहा है। इसे ब्लैक आउट बम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि ये बिजली प्लांट्स को हिट करता है। कार्बन फाइबर के रेशों से उसे ढक कर निष्क्रिय कर देता है, जिससे बिजली के प्लांट्स तबाह हो जाते हैं, और पूरे शहर में लंबे वक्त के लिए अंधेरा छा जाता है। किम ने इस बम के सफल परीक्षण को उत्तर कोरिया की मजबूत सैन्य छवि के तौर पर पेश किया है। इसे प्योंगयांग की स्ट्रैटेजिक सैन्य क्षमता को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है लेकिन सवाल टाइमिंग का है जब अमेरिका, ईरान के साथ युद्ध में उलझा है, जब अमेरिका और नाटो देश मिलकर चार साल से रूस-यूक्रेन युद्ध का मसला नहीं सुलझा पा रहे हैं। तब क्या इस ब्लैक आउट बम का टेस्ट करके किम कोरियाई प्रायद्वीप में नया वॉर फ्रंट खोलना चाहते हैं। क्या वो दुनिया के इस हिस्से में भी ट्रंप के लिए एक नई चुनौती पेश करना चाहते हैं? किम का ये ब्लैकआउट बम वाला टेस्ट। दक्षिण कोरिया से अमेरिकी थाड सिस्टम हटने के बाद हुआ है। अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से थाड सिस्टम को हटाकर पश्चिमी एशिया में ईरान के खिलाफ लगाया था।



