लेखक की कलम

नासिक टीसीएस का जिहादी बम!

हमारे देश की संसद में एक तरफ जहां नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश किया जा चुका है और उसके पारित होने की भी पूरी संभावना है, वहीं नारी शक्ति को कहीं-कहीं कुंठित किया जा रहा है। केरल फाइल्स जैसी फिल्में विवाद से भले ही घिरी रही हैं लेकिन महाराष्ट्र के नासिक मंे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) मंे महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मान्तरण का जो मामला उठाया गया है, उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। महाराष्ट्र मंे भाजपा के नेतृत्व में गठबंधन सरकार है और टीसीएस भी एक प्रतिष्ठित वर्क कल्चर की संस्था है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने गत 15 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मंे कहा था कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश में टाटा समूह की उपस्थिति दोगुनी से ज्यादा होगी। उन्होंने कहा था अगले पांच वर्षों में टीसीएस की यूपी इकाई में 20 हजार और पेशेवरों को जोड़ा जाएगा। टाटा मोटर्स के 10 लाखवें वाहन को यूपी के मुख्यमंत्री ने 15 अप्रैल को जब फ्लैग आफ किया, तभी एन चंद्रशेखरन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र मंे टाटा की महती भूमिका का भी संकेत दिया था। जाहिर है टीसीएस बड़ी संख्या मंे महिलाओं को रोजगार दे रहा है लेकिन वहां की गतिविधियों पर भी क्या समुचित नजर रखी जा रही है? नासिक टीसीएस के मामले ने यह गंभीर सवाल खड़ा किया है।
महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को लेकर बड़े खुलासे ने देश को हिलाकर रख दिया है। एक बड़ी कंपनी की 8 महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया है जिसने कॉर्पोरेट वर्क कल्चर पर सवालिया निशान लगा दिया है। महिला कर्मचारियों पर किस तरह से दबाव बनाया जाता था, इस बात का खुलासा हो गया है। पुलिस जांच में अब वह तरीका सामने आया है, जिसके जरिए आरोपी युवक-युवतियों को अपने जाल में फंसाते थे। आरोपियों की मोडस ऑपरेंडी सामने आ गई है। जानकारी के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को अपने नियंत्रण में रखने और उन्हें दबाने के लिए आरोपी अलग-अलग तरह के मानसिक दबाव के हथकंडे अपनाते थे। जांच में खुलासा हुआ है कि अपनी साजिशों को अंजाम देने के लिए संदिग्ध आरोपी ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी काफी देर तक कंपनी में रुकते थे। सबके सामने वे ऐसा जताते थे कि जैसे कंपनी का काम कर रहे हों, लेकिन असल में वे संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहते थे। सूत्रों के अनुसार, इन हरकतों के लिए उन्होंने कंपनी की संपत्ति और संसाधनों का भी इस्तेमाल किया। किसी भी गतिविधि को अंजाम देने से पहले आरोपियों द्वारा व्हाट्सएप के जरिए पूरी रणनीति तैयार की जाती थी। आरोपी व्हाट्सएप पर रणनीति बनाकर और देर रात तक कंपनी में रुककर महिला कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बनाने का काम करते थे। दफ्तर में आरोपियों से हिंदू महिलाओं से शादी करने के लिए कहा जाता था, ये दावा एक प्रत्यक्षदर्शी ने किया है। इस मामले में 9 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। पुलिस अब तक 6 पुरुषों और एक महिला समेत सात कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
टीसीएस के नासिक ऑफिस में एक कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर ने बताया, वे कहते थे, हिंदू लड़कियों को अपनी गर्लफ्रेंड बनाओ और उनसे शादी करो। वे लोग धर्म बदलने के लिए कहते थे और अपने धर्म के बारे में बातें करते थे। इसके लिए उनको पैसे भी दिए जाते थे। यह सिलसिला 2021 से चल रहा था। इसके लिए एचआर मैडम को भी पैसा दिया जाता था। पुलिस ने पिछले हफ्ते आठ महिला कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। महिलाओं का दावा है कि उनके सीनियर्स ने उनका मानसिक और यौन उत्पीड़न किया। एचआर विभाग ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। ये घटनाएँ फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच घटीं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों में से एक ने एक महिला कर्मचारी से शादी का झूठा वादा करके बार-बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। वहीं एक कर्मचारी को अनुचित तरीके से छुआ गया। उसके निजी और वैवाहिक जीवन के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।
पुलिस के मुताबिक, जब शिकायतकर्ता ने इन घटनाओं के बारे में कंपनी के हेड से मौखिक शिकायतें कीं, तो उन्होंने छेड़छाड़ की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। बल्कि, उन्होंने उनके कृत्यों को बढ़ावा दिया। महिला के शारीरिक रूप-रंग के बारे में भी अश्लील टिप्पणियां की गईं। आरोपियों ने एक पुरुष कर्मचारी को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया और उसके धर्म का अपमान किया। पीड़त महिलाओं ने जब कंपनी की महिला एचआर एग्जीक्यूटिव से इसकी शिकायत की, तो उन्हें कथित तौर पर नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। बता दें कि गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। उनकी पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और एचआर एग्जीक्यूटिव निदा खान के रूप में हुई है।
कंपनी के बीपीओ में काम करने वाली महिला वर्कर्स ने अपने टीम लीडर्स पर धर्म परिवर्तन की कोशिश, यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। एक गवाह ने दावा किया है कि आरोपी अन्य आरोपियों को हिंदू महिलाओं से शादी करने के लिए कहते थे। राज्य के कई थानों में इसे लेकर शिकायत भी दर्ज करवाई गई है। बड़ी आईटी कंपनी पर लगे इन आरोपों से कॉर्पोरेट जगत को बड़ा झटका लगा है। आरिन कैपिटल के चेयरमैन मोहनदास पाई इस पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे हैं कि एक बड़ी कंपनी में खुलेआम ये सब कैसे चलता रहा। वहां का मैनेजमेंट तमाशबीन बना ये सब कैसे देखता रहा। उन्होंने इसके खिलाफ सख्त एक्शन लिये जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों से वह सदमे में हैं। टीसीएस एक बड़ी कंपनी है। उम्मीद है कि उनके पास इस तरह के उत्पीड़न को रोकने के लिए अच्छा सिस्टम होगा। मोहनदास पाई ने कहा कि यह व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं का उल्लंघन और सांप्रदायिक तत्वों द्वारा एचआर का दुरुपयोग है। उन्होंने पढ़ा है कि यह शख्स सबके सामने एक महिला को पकड़ता था और लोग चुप रहते थे। यह तो डर भरी एक ऐसी बात है जिस पर विश्वास कर पाना मुश्किल है कि किसी भी कॉर्पोरेट ऑर्गनाइजेशन में ऐसा भी हो सकता है। टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी में इस तरह की चीजें हो रही हैं, जिस पर विश्वास करना मुश्किल है।
मोहनदास पाई ने सुझाव दिया कि ऐसे अपराधों के खिलाफ जांच में एचआर विभाग के बजाय किसी स्वतंत्र शिकायतकर्ता चैनल और बाहरी सदस्यों वाली समितियों और ऑडिट कमेटी को रिपोर्ट करने वाले सिस्टम को शामिल करना चाहिए। अगर आप मैनेजमेंट के खिलाफ शिकायत करते हैं तो वह इन बातों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। एक अच्छे वर्कप्लेस पर धार्मिक आधार पर महिलाओं को निशाना बनाना कॉर्पोरेट जगत के लिए काले धब्बे की तरह है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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