खरगे के बयान पर सियासत

कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी पार्टी के सामने नयी मुसीबत खड़ी कर दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना करने के क्रम में उन्हें आतंकवादी बोल दिया। बाद मंे खरगे ने सफाई दी कि उनका आशय यह था कि पीएम मोदी सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं के माध्यम से विपक्षी राजनीतिक दलों को आतंकित कर रहे हैं। हालांकि इस पर अब तक प्रधानमंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन भाजपा के नेता इस मुद्दे को तेजी से उछाल रहे हैं। इतना ही नहीं भाजपा ने इस मामले को चुनाव आयोग तक पहुंचाया है। मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा के सदस्य हैं। इसलिए उनकी राज्य सभा की सदस्यता पर संकट आ सकता है। हालांकि यह बात समझ मंे नहीं आयी कि कर्नाटक के बीदर मंे एक कार्यक्रम के दौरान उपराट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यक्रम के विषय से इतर खरगे के इस बयान का उल्लेख क्यों किया? उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति किसी पार्टी के सदस्य नहीं रह जाते हैं। यह विषय विचारणीय है। बहरहाल, कांग्रेस को भी अपने बुजुर्ग नेताओं से यह अपील करनी चाहिए कि वे अपनी वाणी को संतुलित रखने का प्रयास करें। याद कीजिए गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान जब कांग्रेस की अच्छी संभावनाएं थीं, तभी वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को ‘नीच’ कह दिया था। मोदी ने इसे इतने भावुक अंदाज में उठाया था कि गुजरात में कांग्रेस धराशायी हो गयी थी। अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव मंे इस मुद्दे को भुनाया जा
सकता है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन भी तमिलनाडु से हैं। संभवतः इसीलिए उन्हांेने प्रसंग न होने पर भी खरगे के बयान का अप्रत्यक्ष रूप से जिक्र किया।
कर्नाटक के बीदर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंच से ही राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। मंच पर खरगे की मौजूदगी में उपराष्ट्रपति ने कहा कि कभी-कभी उन्हें ऐसा लगता है कि खरगे जी काले और सफेद के बीच, या फिर आतंकवाद और आतंकियों के बीच फर्क नहीं कर पाते। यह टिप्पणी उन्होंने सीधे खरगे को संबोधित करते हुए की, जिसे मौजूदा राजनीतिक संदर्भ में अहम माना जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए बयान पर देशभर में विवाद छिड़ा हुआ है। खरगे की टिप्पणी पर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी को बीजेपी ने घोर आपत्तिजनक बताया है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के नेतृत्व में एक हाई लेवल बीजेपी प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। शिकायत दर्ज कराने के बाद किरेन रिजिजू ने कहा, प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहना सिर्फ अपमान नहीं, बल्कि एक अपराध है। यह राष्ट्रीय और लोकतांत्रिक मुद्दा है। किसी भी राजनीतिक दल ने पहले कभी प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी राजनीतिक दल ऐसी भाषा का प्रयोग करता है तो यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र के खिलाफ निंदनीय कृत्य है। रिजिजू ने चुनाव आयोग से मांग की कि मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस पार्टी देश की जनता से माफी मांगें। उन्होंने बताया कि आयोग ने शिकायत सुनी है और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। इस पूरे विवाद के बीच मल्लिकार्जुन खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा। खरगे के मुताबिक, उनका आशय यह था कि प्रधानमंत्री और उनकी सरकार जांच एजेंसियों (ईडी, आईटी, सीबीआई) के जरिए राजनीतिक दलों और नेताओं को डराने-धमकाने का माहौल बना रही है। खरगे ने कहा, मैंने कभी यह नहीं कहा कि पीएम मोदी आतंकवादी हैं। मेरा मतलब यह था कि वह लगातार धमकी देने की राजनीति करते हैं।
उपराष्ट्रपति की टिप्पणी, खरगे का बयान और बीजेपी की चुनाव आयोग में शिकायत। इन तीनों घटनाओं ने मिलकर राजनीतिक तापमान काफी बढ़ा दिया है। खासतौर पर तब, जब कई राज्यों में चुनावी माहौल है और आदर्श आचार संहिता को लेकर सियासी दल सतर्क तो हैं, लेकिन बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 21 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर “आतंकी” शब्द का इस्तेमाल किया था। मामले को तूल पकड़ता देख खरगे ने अपनी इस टिप्पणी पर सफाई पेश की है। जब एक पत्रकार ने उनसे इस टिप्पणी का संदर्भ पूछा, तो खरगे ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब ये था कि प्रधानमंत्री मोदी “लोगों और राजनीतिक दलों को आतंकित कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर आतंकवादी नहीं कहा। खरगे की इस टिप्पणी पर बीजेपी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और पार्टी ने कांग्रेस को “अर्बन नक्सल पार्टी” करार दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कहे जाने के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। बीजेपी ने उनकी इस टिप्पणी को घोर आपत्तिजनक बताते हुए इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की है।
दरअसल, मल्लिकार्जुन खरगे तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को लेकर अन्नाद्रमुक के बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर सवाल उठा रहे थे, इसी दौरान उन्होंने यह बयान दिया। खरगे ने कहा कि अन्नाद्रमुक, जो अन्नादुरै की तस्वीर लगाती है, वह कैसे पीएम मोदी के साथ जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और उनकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करते और ऐसा गठबंधन लोकतंत्र के साथ-साथ अन्नादुरै, कामराज, पेरियार, कलैगनार और डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों को कमजोर करता है। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में खरगे से
पूछा गया, क्या आप कृपया इस बयान को एक संदर्भ में समझा सकते हैं? नहीं, नहीं में जवाब देते हुए उन्होंने सफाई देना शुरू किया। तब खरगे ने कहा कि वह (मोदी) लोगों और राजनीतिक पार्टियों को डरा-धमका रहे हैं। ईडी, आईएण्डटी और सीबीआई जैसी संस्थाएं उनके हाथों में हैं। वह परिसीमन को भी अपने हाथों में लेना चाहते हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



