अध्यात्म

उत्तराखण्ड में आस्था का सैलाब

देव भूमि उत्तराखण्ड के कण-कण में आस्था उद्दीप्त होती है तो तृण-तृण में प्राकृतिक सुषमा पर्यटकों को आकर्षित करती है। इस समय तो धार्मिक पर्यटन अपने चरम पर रहता है। राज्य की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का प्रारंभ हो चुका है। गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जा चुके हैं। इसके बाद 22 अप्रैल को जयकारों के बीच बाबा केदारनाथ के कपाट भी खोल दिये गये। केदारनाथ बाबा को मंदिर को 51 क्विंटल फूलों से सजाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स पत्नीक वहां उपस्थित थे और बाबा की पूजा-अर्चना की। अब 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट भी खुल गये हैं। भगवान बदरी विशाल की कपाट मंगलम की प्रक्रिया 22 अप्रैल से ही प्रारंभ हो गयी थी। भगवान बदरीनाथ जी की पूजा शीत कालीन पूजा स्थली नृसिंह मंदिर में विधिवत सम्पन्न की गयी। इसके पश्चात भगवान जगत गुरु शंकराचार्य की गद्दी और विष्णु वाहन भगवान गरुड़ जी की डोली ने भू-बैकुण्ठ धाम के लिए प्रवेश किया था। बदरीनाथ धाम और बाबा केदारनाथ की यात्रा के लिए बाकायदा रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। इसके अलावा मोबाइल फोन ल जाने की भी अनुमति नहीं होगी।
श्रद्धालुओं के लिए 22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी पत्नी गीता पुष्कर धामी के साथ बाबा के दर्शन के लिए केदारनाथ धाम पहुंचे। मंदिर परिसर को दिल्ली और पश्चिम बंगाल से मंगाए गए करीब 51 क्विंटल फूलों से बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया है। सीएम धामी ने कहा, यह सचमुच एक सुखद अनुभव है। मंदिर समिति ने यहां बेहतरीन व्यवस्थाएं की हैं, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि अब आम लोग भी अपेक्षाकृत कम समय में बाबा के आसानी से दर्शन कर सकें। अगर आप चारधाम यात्रा पर जाने की सोच रहे हैं तो यात्रा से पहले कुछ नियमों के बारे में जरूर जान लें। केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री मंदिर परिसर में मोबाइल और कैमरा पूरी तरह बैन रहेंगे। इसलिए इन चीजों को अपने साथ लेकर न चलें। मंदिर में जाने से पहले आपको अपना फोन जमा करना होगा, जिसके लिए क्लॉक रूम की सुविधा दी गई है। वहीं यमुनोत्री धाम सभी के लिए खुला है, लेकिन बाकी धामों में गैर-हिंदू श्रद्धालुओं के प्रवेश को लेकर कुछ शर्तें लागू की गई हैं। इसीलिए इस नियम पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है।
केदारनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है। बिना रजिस्ट्रेशन यात्रा की परमिशन नहीं दी जाएगी। हर यात्री और वाहन को आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्टर करवाना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ही श्रद्धालु को दर्शन के लिए स्लॉट टोकन दिया जाएगा, जिसे रास्ते में चेक भी किया जाएगा। केदारनाथ यात्रा पर जाने के लिए सिर्फ रजिस्ट्रेशन ही काफी नहीं है। आपका फिट होना भी बहुत जरूरी है। इसीलिए स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है। खासकर 55 साल से ऊपर के लोगों को मेडिकल चेकअप कराना होगा। अस्थमा, डायबिटीज जैसी बीमारी वाले लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है।
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। चार बजे बाबा केदार की पंचमुखी डोली धाम पहुंच चुकी थी और रात से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। कपाट खुलने से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार, रावल की पूजा और विशेष अनुष्ठान सम्पन्न किए गए, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए। इसके साथ ही छह माह तक चलने वाली केदारनाथ यात्रा विधिवत शुरू हो गयी। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। गत वर्ष अर्थात 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, जबकि इस बार 22 अप्रैल को खुले। यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले से बाबा केदार के दर्शन कर रहे हैं। करीब 6 महीने तक बंद रहने के बाद 22 अप्रैल को वृष लग्न में सुबह 8 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खोलने का मुहूर्त शिवरात्री के अवसर पर निकाला गया था। उसी वक्त बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने का भी मुहूर्त निकला था। बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले गये, जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट 19 अप्रैल को खुल चुके हैं।
केदारनाथ मंदिर परिसर में फोटो, वीडिया और रील बनाने पर सख्ती रहेगी। अब कोई भी श्रद्धालु केदारनाथ मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन लेकर नहीं जा सकेगा। ऐसा करने वालों को दंडित किया जाएगा। पांचवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली 20 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंची थी। इस दौरान सेना के बैंड की मधुर लहरियों और हजारों भक्तों के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली गुप्तकाशी के विश्वनाथ मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद फाटा पहुंची, जहां भगवान की उत्सव डोली का रात्रि विश्राम हुआ। इसके बाद भगवान की उत्सव डोली गौरीकुंड पहुंची, जहां पर माता गौरीकुंड में रात्रि विश्राम के बाद डोली 17 किमी पैदल यात्रा तय करते हुए जंगलचट्टी, रामबाड़ा, छोटे-बड़े लिनचोली और बेस कैंप होते हुए केदारपुरी पहुंची।
मंदिर परिसर में पहुंचते ही हजारों श्रद्धालुओं ने हर हर महादेव और जय बाबा केदार के जयघोषों के साथ पुष्प वर्षा कर डोली का भव्य स्वागत किया। डोली, मंदिर की परिक्रमा कर भंडार गृह में प्रवेश किया, जहां विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान 8वीं सिखलाई रेजीमेंट के बैंड की मधुर धुनों और डमरू-वाद्य यंत्रों की गूंज से पूरा धाम शिवमय हो गया। इस मौके पर पुलिस और आईटीबीपी की कड़ी सुरक्षा है। केदारनाथ उत्सव डोली का इतिहास सदियों पुरानी हिमालयी परंपरा से जुड़ा है, जो ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ (शीतकालीन गद्दी) से केदारनाथ धाम तक भगवान शिव की पंचमुखी चल विग्रह मूर्ति की पवित्र पदयात्रा है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसमें बाबा केदार शीतकाल में ऊखीमठ में और कपाट खुलने पर धाम में विराजमान होते हैं। यह यात्रा आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है। चल विग्रह उत्सव डोली केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद, भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली (चल विग्रह) को ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में पहुंचती है, जहां वे 6 महीने शीतकाल में रहते हैं। यह सदियों पुरानी परंपरा है कि केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले डोली को धूमधाम से पैदल मार्ग से केदारनाथ धाम तक ले जाया जाता है। डोली ऊखीमठ से निकलकर फाटा, गौरीकुंड (गौरी माई मंदिर) और अन्य स्थानों पर विश्राम करती हुई केदारनाथ पहुंचती है। डोली यात्रा का गवाह बनना भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
(मोहिता-हिफी फीचर)

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