लेखक की कलम

मायावती की राजनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसका एक कारण है बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की बदलती रणनीति है। पिछले लोकसभा चुनाव (2024) में समाजवादी पार्टी (सपा) के पीडीए समीकरण ने न सिर्फ अखिलेश यादव को सियासी लाभ पहुंचाया बल्कि उसके साथ में कांग्रेस को भी फायदा हुआ था लेकिन तब से कांग्रेस और सपा के रिश्ते भी बदले हैं और इरादे भी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के भविष्य माने जाने वाले राहुल गांधी के गत 26 अप्रैल को गार्गी कालेज और दिल्ली विश्वविद्यालय की युवा महिलाओं से बातचीत करते हुए कहा कि यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती बहुत बहादुर और असरदार हैं। दरअसल बातचीत के दौरान एक लड़की ने राहुल गांधी से सवाल किया था कि राजनीति में किन महिलाओं ने बहुत अच्छा काम किया है। इसका जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती उनकी विरोधी हैं पर मायावती ने यूपी की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राहुल गांधी ने कहा कि बसपा सुप्रीमो ने काफी वर्षों तक यूपी की सियासत पर असर डाला है। बसपा प्रमुख मायावती की यह तारीफ अकारण नहीं है बल्कि कांग्रेस बहुत पहले से यूपी में बसपा का साथ चाहती है। इससे पहले बसपा छोड़ चुके नसीमुद्दीन रोड़ा बने थे अब वह भी कांग्रेस छोड़कर सपा में चले गये। उधर, बसपा प्रमुख मायावती ने पिछले हफ्ते कई बड़े नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया है और 2007 के विधानसभा चुनाव की पुख्ता तैयारी कर रही हैं।
मायावती ने बसपा के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश, पूर्व विधायक धर्मवीर सिंह अशोक, युवा नेता सरफराज राईन और उपकार बावरा को अलग-अलग तारीख में पार्टी से निष्कासित किया है। बसपा प्रमुख मायावती अपनी अलग राजनीतिक स्टाइल के लिए जानी जाती हैं और किसी को भी फर्श से उठाकर अर्श पर बैठा देती हैं तो अर्श से गिराकर फर्श पर पटक भी देती हैं। उन्होंने अपने सगे भतीजे आकाश को भी नहीं बख्शा है। बसपा 2012 से सत्ता से दूर हैं इसलिए 2027 के लिए पूरा दम लगाया जा रहा है। जेवर एयर पोर्ट को लेकर और महिला आरक्षण बिल पर उनका रुख सभी का ध्यान दिलाता है।
बसपा में पूर्व मंत्री धर्मवीर अशोक की गिनती पार्टी संस्थापक कांशीराम के साथियों में होती है। मायावती ने उनको कई राज्यों की जिम्मेदारी भी दे रखी थी। संगठन में उनकी गहरी पैठ होने की वजह से वह खासे लोकप्रिय भी थे। अचानक उनका निष्कासन पश्चिमी उप्र के साथ कई राज्यों में बसपा के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वहीं जयप्रकाश की बसपा में लंबे समय के बाद वापसी हुई थी। निष्कासित होने के बावजूद वह पश्चिमी उप्र में युवाओं को बसपा से जोड़ते रहे। उनकी कार्यशैली को देखते हुए मायावती ने उन्हें केरल चुनाव की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक केरल के प्रभारी होने के बावजूद पश्चिमी उप्र में संगठन के कार्यों में दखल देने की उनकी शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई है। हालांकि इसके पीछे बसपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की भूमिका मानी जा रही है, जिन्हें पश्चिमी उप्र के एक मंडल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। उनकी कार्यशैली को लेकर कार्यकर्ताओं में पनप रहे आक्रोश का खामियाजा जयप्रकाश को भुगतना पड़ा।
बसपा ने अन्य दलों के मुकाबले अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण शुरू कर दिया है। कई जिलों की सीटों पर प्रभारियों की तैनाती भी हो चुकी है, जिन्हें चुनाव नजदीक आने पर प्रत्याशी घोषित किया जाना है। टिकट वितरण में पश्चिमी उप्र के तीन वरिष्ठ नेताओं धर्मवीर अशोक, जयप्रकाश और सरफराज राईन की भूमिका भी थी। तीनों के निष्कासन के बाद अब बसपा का चुनावी समीकरण बिगड़ने की संभावना जताई जा रही है। इस फैसले से बसपा की उस मुहिम को भी झटका लगा है, जिसके तहत पुराने नेताओं को पार्टी में वापस लिया जा रहा था।
देश में महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण का लाभ देने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बीएसपी प्रमुख मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने इस बिल का स्वागत करते हुए कहा है कि ये देर से उठाया गया सही फैसला है। मायावती ने कहा कि वो महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण की वकालत करती हैं और मानती हैं कि महिलाओं की आबादी के हिसाब से उन्हें आधा आरक्षण मिलना चाहिए।
बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा कि उनका मानना है कि एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं को अलग से कोटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की असली हकदार एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाएं हैं। अगर इस बिल में इन महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई, तो ये महिलाएं फायदे से वंचित रह जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसा न होने से ऐसी महिलाओं को फायदा मिलेगा, इस पर संदेह है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बीएसपी सुप्रीमो मायावती में कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं को आरक्षण दिए जाने की बात कांग्रेस पार्टी को अब क्यों याद आ रही है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में इस जरूरी मुद्दे को जातिगत द्वेष की वजह से दरकिनार कर दिया था। उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल लाकर महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की कोशिश की थी लेकिन तब भी कांग्रेस ने इसका विरोध किया था।
आंकड़ों की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी की स्थिति बेहद कमजोर है। लोकसभा में बीएसपी का एक भी सांसद नहीं है वहीं राज्यसभा में बीएसपी का सिर्फ एक सांसद मौजूद है। यूपी विधानसभा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है जहां बीएसपी से सिर्फ एक विधायक चुनाव जीत सका था। हालांकि बीएसपी के पास अभी भी दलितों का एक बड़ा वोट बैंक है। ऐसे में मायावती का समर्थन एनडीए सरकार के लिए राहत की खबर है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद अब इसकी क्रेडिट को लेकर यूपी में राजनीति तेज हो गई है। इसी कड़ी में अब यूपी की पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो मायावती भी सामने आ गई हैं। मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की रूपरेखा के साथ-साथ सभी जरूरी बुनियादी काम बीएसपी की मेरी सरकार में शुरू हो गए थे। साथ ही मायावती ने कहा पश्चिमी यूपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट के दूसरे बेंच और उनके लिए अलग से प्रदेश बनाने का सपना कब पूरा होगा।
बसपा चीफ मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा- काफी लम्बे इंतजार के बाद जेवर में नोएडा इण्टरनेशनल हवाई अड्डा के प्रथम चरण का उद्घाटन हुआ, जबकि इसकी रूपरेखा ही नहीं बल्कि इसके सभी जरूरी बुनियादी कार्य बसपा की मेरी सरकार में ही शुरू हो गये थे। इतना ही नहीं बल्कि उस समय केन्द्र में रही कांग्रेस पार्टी की सरकार अगर रोड़ा नहीं अटकाती तो विकास का यह कार्य, यमुना एक्सप्रेसवे आदि की तरह, काफी पहले मेरी सरकार में ही पूरा हो गया होता।
इस तरह बसपा प्रमुख अभी एनडीए के साथ ही सपा व कांग्रेस से भी दूरी बनाए हुए हैं लेकिन अपने संगठन को इस तरह तराश रही हैं ताकि 2017 में उनकी पार्टी को कोइ्र नजरंदाज न कर सके। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर))

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