लेखक की कलम

राहत से सीख लें राहुल व पवन

गलतियां सभी से हो सकती हैं। इंसान में सभी अच्छाइयां हो जाएं तो वह देवता हो जाएगा। इसलिए गलतियों से भी सीखना चाहिए। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा को 1 मई को अदालत से बड़ी राहत मिली है। राहुल गांधी पर सिमरन गुप्ता नामक एक महिला ने आरोप लगाया था कि 2025 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संभल कार्यालय का उद्घाटन करते हुए विवादास्पद टिप्पणी की। महिला ने मांग की थी कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी जाए। बहरहाल लम्बे समय के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को राहत देते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी है। इसी प्रकार कांग्रेस पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित सम्पत्ति है। इस बयान को लेकर पवन खेड़ा को हाईकोर्ट तक अग्रिम जमानत नहीं मिल पायी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई 2026 को पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी लेकिन पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा दोनों को नसीहत भी दी है। राहुल गांधी ने पहले भी विवादास्पद बयान दिये। पवन खेड़ा भी उसी राह पर चल रहे हैं। अदालत से मिली राहत से इन्हें सीख लेनी चाहिए।
राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर के आदेश की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। बता दें कि 15 जनवरी 2025 को राहुल गांधी के एक बयान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए जाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। सिमरन गुप्ता नाम की एक महिला की ओर से दायर इस याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रम डी. चैहान ने यह आदेश पारित किया। इससे पहले मामले में न्यायमूर्ति विक्रम डी. चैहान ने याचिकाकर्ता के वकील और राज्य सरकार के वकील की दलीलें सुनने के बाद 8 अप्रैल को आदेश सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने संभल की एक कोर्ट के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की थी।
संभल की कोर्ट ने 2025 में राहुल गांधी की कथित विवादास्पद टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग खारिज कर दी थी। याचिकाकर्ता ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के मुताबिक, राहुल गांधी ने 2025 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यालय के उद्घाटन के दौरान कहा था, हम भाजपा, आरएसएस और भारत सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस टिप्पणी से देशभर में लोगों की भावनाएं आहत हुईं क्योंकि राहुल गांधी की टिप्पणी देशद्रोह के समान है जो देश को अस्थिर करने की मंशा से जानबूझकर की गई थीं।
राहुल गांधी कई बार विवादास्पद बयान दे चुके हैं जैसे24 अक्टूबर, 2013 को इंदौर में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, मुजफ्फरनगर में जो आग लगी है। ऐसे 10-15 लड़के हैं, मुसलमान लड़के हैं, जिनके भाई-बहनों को मारा गया है। पाकिस्तान के लोग उनसे बात कर रहे हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लोग उन लड़कों से बात करना शुरू कर रहे हैं और मैं, उनसे बात कर रहा हूं, कह रहा हूं कि इनके बहकावे में मत आओ। दिल्ली के विज्ञान भवन में नौ अक्टूबर, 2013 को आयोजित दलित अधिकार सम्मेलन में दलितों के उत्थान पर राहुल गाँधी का इस्केप वेलोसिटी सिद्धांत वाला भाषण बेहद चर्चित रहा। राहुल ने भाषण में कहा कि दलितों को ऊपर उठने के लिए धरती से कई गुना ज्यादा बृहस्पति ग्रह की इस्केप वेलोसिटी जैसी ताकत की जरूरत है। इलाहाबाद के गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के कार्यक्रम में छह अगस्त, 2013 को राहुल ने कहा, गरीबी सिर्फ एक मानसिक स्थिति यानी दिमागी हालत है और इसका खाना खाने, रुपये और भौतिक चीजों से कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई शख्स खुद में आत्मविश्वास नहीं लाएगा तब तक वह गरीबी के मकड़जाल से बाहर नहीं निकल पाएगा। चार अप्रैल, 2013 को दिल्ली में सीआईआई के कार्यक्रम में राहुल ने कहा, मेरे लोगों ने मुझे कहा कि भारत चीन की तुलना के चक्कर में मत पड़ो लेकिन मैं उनकी बात नहीं मानता। देखिए दो तरह की व्यवस्थाएं हैं, एक केंद्रीकृत और दूसरी विकेंद्रीकृत। चीन में केंद्रीकृत व्यवस्था है, उसे ड्रैगन कहा जाता है। वह साफ दिखता भी है। वह बड़ा है, ताकतवर है। दिखता है, बड़े-बड़े ढांचे हैं और लोग हमें हाथी कहते हैं। ड्रैगन के सामने तुलना करने के लिए, लेकिन हम हाथी नहीं है। हम मधुमक्खी का छत्ता हैं।
राहुल ने कहा था, यह मजाक की बात लगती है लेकिन इस बारे में सोचिए। कौन ज्यादा ताकतवर है हाथी या मधुमक्खी का छत्ता? दोनों की ताकत बिल्कुल अलग ढंग से काम करती है। हमें समझना होगा कि हम क्या हैं? हमारी ताकत कहां से आती है? चंडीगढ़ के एक विश्वविद्यालय में 11 अक्टूबर, 2012 को भाषण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यूरोप के राजदूत ने कहा कि आने वाली सदी भारत की है क्योंकि यहां ह्यूमन रिसोर्स बहुत अच्छा है। लेकिन पंजाब के ह्यूमन रिसोर्स का क्या हो रहा है। यहां 10 में से सात युवा नशे की गिरफ्त में हैं।
अब पवन खेड़ा की बात करते हैं असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर आरोपों के मामले में आपराधिक मुकदमे का समना कर रहे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुए कहा है कि वह जांच में सहयोग देंगे और जब जरूरत होगी या बुलाया जाएगा तब पुलिस थाने में पेश होंगे। यह भी कहा है कि पवन खेड़ा जांच और ट्रायल के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ या उन्हें प्रभावित नहीं करेंगे साथ ही कोर्ट की पूर्व इजाजत के बगैर देश छोड़कर नहीं जाएंगे।
शीर्ष अदालत ने आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह मामला राजनीतिक रंजिश से उपजा हुआ लगता है। ये आदेश न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पवन खेड़ा की अपील स्वीकार करते हुए दिए। गौरतलब है कि खेड़ा ने असम चुनाव के पहले रिनिकी भुइयां सरमा पर तीन देशों का पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था साथ ही कहा था कि उनकी एक कंपनी अमेरिका में रजिस्टर है जिसमें उन्होंने भारी निवेश किया हुआ है। रिनिकी भुइयां सरमा ने आरोपों का खंडन करते हुए पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया था।
पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री द्वारा घटना के बाद दिये गए विभिन्न बयानों को आधार बनाते हुए गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत मांगी थी। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद खेड़ा सुप्रीम कोर्ट आए थे। सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को अग्रिम जमानत देते हुए अपने आदेश में कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार एक अनमोल मौलिक अधिकार है और इसे छीनने का कोई भी कदम ऊंचे मानदंडों पर सही ठहराया जाना चाहिए, खासकर तब जब आसपास के हालात राजनीतिक रंग होने का संकेत देते हों। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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