धीरज के साथ नयी ड्रेस में सेना

हमें अपने देश पर और स्वयं पर गर्व करने का अधिकार है। हजार साल की गुलामी के अवशेष हमें हतोत्साहित कर सकते हैं, इसलिए उन अवशेषों को एक एक कर मिटाने का प्रयास सराहनीय है। भारतीय सेना ने औपनिवेशिक दौर की बची-खुची परंपराओं को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपनी वर्दी और ड्रेस कोड से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव किए हैं। यह स्वदेशीकरण अभियान का हिस्सा है। सेना को जनरल धीरज सेठ के रूप में नये सेनाध्यक्ष मिलने वाले हैं। सेना में स्वदेशीकरण और भारतीयकरण की यह प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से जारी है। वर्ष 2021 में गुजरात के केवड़िया में आयोजित कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र बलों से औपनिवेशिक परंपराओं को समाप्त कर भारतीय मूल्यों और परंपराओं को अपनाने का आह्वान किया था। ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ को उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भारतीय सेना की आधुनिक, आत्मनिर्भर और भारतीय पहचान को और मजबूत करेगा।
केंद्र सरकार ने वर्तमान में सेना के उप प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) के पद पर कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना का अगला प्रमुख (थल सेना अध्यक्ष) नियुक्त किया है। वह 30 जून को पदभार ग्रहण करेंगे। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम, 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ आर्मर्ड कोर (बख्तरबंद कोर) से संबंधित हैं और दिसंबर 1986 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया था। दो दशकों से अधिक समय बाद यह पहला अवसर होगा जब आर्मर्ड कोर का कोई अधिकारी सेना प्रमुख बनेगा। अपने लगभग चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने परिचालन, रणनीतिक योजना, क्षमता विकास और संस्थागत नेतृत्व के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने और उसके दीर्घकालिक आधुनिकीकरण में उनकी अहम भूमिका रही है। जनरल धीरज सेठ ने विभिन्न स्तरों पर विविध परिचालन क्षेत्रों में कमान संभाली है। उनके प्रमुख कमान दायित्वों में रेगिस्तानी क्षेत्र में एक आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर एक आर्मर्ड ब्रिगेड तथा जम्मू-कश्मीर में एक काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स का नेतृत्व शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशनों में से एक 21 स्ट्राइक कोर की कमान भी संभाली।
आर्मी कमांडर के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया। वह उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें दो परिचालन सेना कमानों की कमान संभालने का अवसर मिला। करीब ढाई वर्षों तक उन्होंने महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में रणनीतिक नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक नियुक्तियों पर भी कार्य किया, जिनका सेना की परिचालन योजना, बल प्रबंधन और क्षमता विकास पर व्यापक प्रभाव पड़ा। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ एक उत्कृष्ट सैन्य पेशेवर माने जाते हैं। उन्होंने सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण के विभिन्न पाठ्यक्रमों में शीर्ष स्थान प्राप्त किए हैं। वह हायर कमांड कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज के स्नातक हैं तथा पेरिस में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी कर चुके हैं। इससे उन्हें समकालीन सैन्य चुनौतियों और वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य की व्यापक समझ प्राप्त हुई है।
अब नये सेनाध्यक्ष के साथ ही सेना को नया ड्रेस कोड भी मिल रहा है। सरकार के इस फैसले के साथ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के नेतृत्व की कमान संभालने वाले देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों में शामिल हो जाएंगे और 30 जून से सेना प्रमुख के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी ग्रहण करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हाल ही में जारी 174 पृष्ठों के शैण मैनुअल ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं, जिनका उद्देश्य सेना की पहचान को आधुनिक भारतीय सोच और राष्ट्रीय भावनाओं के अनुरूप बनाना है। सेना के अधिकारियों के अनुसार, ऐसा व्यापक यूनिफॉर्म मैनुअल करीब आठ वर्ष बाद जारी किया गया है। नए नियमों में औपचारिक अवसरों पर बंद गले वाली ‘बंदी जैकेट’ पहनने की अनुमति, सेरेमोनियल पाउच बेल्ट को हटाना और परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखना वैकल्पिक बनाना प्रमुख बदलावों में शामिल हैं।
पहली बार फॉर्मल ड्रेस में शामिल हुई है बंदी जैकेट। नए मैनुअल के तहत अधिकारियों को बंदगला, लाउंज सूट और अन्य औपचारिक पोशाकों के साथ बंद गले वाली बंदी जैकेट पहनने की अनुमति दी गई है। मैनुअल के अनुसार बंदी जैकेट पूरी आस्तीन वाली शर्ट के ऊपर पहनी जा सकेगी और इसका रंग सादा तथा गरिमापूर्ण होना चाहिए। इसके साथ फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूते पहनना अनिवार्य होगा। इसक साथ ही सेना ने सभी रैंक के सैनिकों के लिए ‘3बी’ नामक नई सर्दियों की वर्दी भी शुरू की है। इसमें अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट शामिल होंगे। यह वर्दी कार्यक्षमता और आराम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। ‘मेस ड्रेस नंबर 5’ और ‘मेस ड्रेस नंबर 6’ से औपनिवेशिक दौर की पहचान मानी जाने वाली पाउच बेल्ट को हटा दिया गया है। हालांकि कुछ रेजिमेंट और कोर में विशेष सेरेमोनियल अवसरों पर इसके उपयोग की अनुमति जारी रहेगी।
ये ड्रेस राष्ट्रपति भवन, राजभवन, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के आवास पर आयोजित औपचारिक समारोहों तथा विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में होने वाले कार्यक्रमों में पहनी जाती हैं। परेड में तलवार रखना अब अनिवार्य नहीं होगा। नए नियमों के तहत परेड या औपचारिक समारोहों में समीक्षा करने वाले अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखना अब अनिवार्य नहीं रहेगा। इसे वैकल्पिक कर दिया गया है, जिससे औपनिवेशिक सैन्य परंपराओं से दूरी बनाने का संदेश मिलता है। मैनुअल में कई पुराने और औपनिवेशिक शब्दों को हटाया गया है। एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने प्रस्तावना में कहा है कि यह बदलाव सेना के पहनावे और परंपराओं को समकालीन भारतीय पहचान के अनुरूप ढालने की दिशा में एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है।
सेना के नये ड्रेस कोड में टैटू और शरीर पर पियर्सिंग की अनुमति नहीं होगी। यूनिफॉर्म में किसी प्रकार का ब्रेसलेट पहनना प्रतिबंधित रहेगा।
धार्मिक प्रतीकों के प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी, हालांकि सिख सैनिकों को परंपरागत छूट जारी रहेगी। मूंछों की लंबाई 12 सेंटीमीटर से अधिक नहीं हो सकती। यूनिफॉर्म में डिओडोरेंट और परफ्यूम के उपयोग पर रोक होगी, जबकि आफ्टर-शेव लोशन की अनुमति रहेगी।
महिला सैन्य अधिकारियों और कर्मियों के लिए भी पहनावे और सौंदर्य प्रसाधनों से जुड़े स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं। सादे रंग की साड़ी या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार पहना जा सकेगा।
बिना आस्तीन वाले कुर्ते, पलाजो और सिगरेट पैंट जैसे कैजुअल परिधानों पर रोक रहेगी। लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन पहनने की अनुमति नहीं होगी। विवाहित महिला कर्मी सिंदूर लगा सकती हैं, लेकिन यह बेरेट या पीक कैप पहनने पर दिखाई नहीं देना चाहिए।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



