लेखक की कलम

फडणवीस के दांव से विपक्ष हक्का-बक्का

महाराष्ट्र में विधान परिषद के चुनाव में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने ऐसी रणनीति अपनाई कि विपक्षी महा विकास अधाड़ी हक्का-बक्का रह गयी। महायुुति ने 6 सीटें निर्विरोध जीत लीं। बाकी 11 सीटों पर क्रास वोटिंग की आशंका है। लगभग 4 साल पहले जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर अपने गुट को असली शिवसेना बताया था तब लम्बी कानूनी लड़ाई हुई थी। एकनाथ शिंदे की पार्टी को असली शिवसेना माना गया और भाजपा के साथ उसकी सरकार बनी थी। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व में महाराष्ट्र में सरकार बनी और एकनाथ शिंदे डिप्टी सीएम बनाये गये। अब उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना (यूबीटी) में एक बार फिर सांसदों ने बगावत कर दी है। उद्धव ठाकरे ने इसे परखने के लिए ही अपने सांसदों की बैठक बुलाई थी जिसमें सिर्फ तीन लोकसभा सदस्य शामिल हुए। इस प्रकार यूबीटी के 9 सांसदों में 6 की अनुपस्थिति बगावत की पुष्टि कर रही है। बताया जा रहा है कि ये 6 सांसद आगामी 20 जून को डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मिलेेंगे। अरअसल बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संसद में अलग बैठने की लिखित मांग रखी है।
महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) की 17 स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करते हुए 6 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। शेष 11 सीटों पर 18 जून को मतदान हुआ, मतगणना 22 जून को की जाएगी। चुनाव को लेकर राज्य के कई जिलों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कथित होटल पॉलिटिक्स भी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्वराज्य संस्था मतदारसंघों से होने वाले इन चुनावों को आगामी स्थानीय निकाय और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महायुति में सीट बंटवारे के तहत भाजपा ने 11, शिवसेना ने 4 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 2 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। महायुति ने जिन छह सीटों पर निर्विराध विजय हासिल की है, उनमें भाजपा, शिवसेना और एनसीपी को दो-दो सीटें मिली हैं। भाजपा को वर्धा-गड़चिरोली-चंद्रपुर अरुण लखानी अहिल्यानगर-प्राजक्त तनपुरे सीट मिली। शिवसेना को ठाणे-रवींद्र फाटक यवतमाल- दुष्यंत चतुर्वेदी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को रायगढ़-रत्नागिरी सिंधुदुर्ग अनिकेत तटकरे व पुणे-विक्रम काकड़े जीते। इन सभी उम्मीदवारों को संबंधित स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्रों से महाराष्ट्र विधान परिषद का सदस्य निर्विरोध चुना गया है।
बाकी 11 सीटों पर सीधा मुकाबला हुआ। सोलापुर- राजेंद्र राऊत (भाजपा) बनाम वसंतराव देशमुख (राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार)। जलगांव- नंदकिशोर महाजन (भाजपा) बनाम शरद तायडे (ठाकरे गुट) बनाम रेश्मा काले (बागी) सांगली-सातारा धैर्यशील कदम (भाजपा) बनाम अभयसिंह जगताप (राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार) बनाम किशोर धुमाल (निर्दलीय) नांदेड़-अमर राजूरकर (भाजपा) बनाम रामदास पाटिल (कांग्रेस) नागपुर (उपचुनाव) डॉ। राजीव पोद्दार (भाजपा) बनाम अतुल लोंढे (कांग्रेस) भंडारा-गोंदिया- अविनाश ब्राह्मणकर (भाजपा) बनाम नरेश ईश्वरकर (कांग्रेस समर्थित) नासिक- नरेंद्र दराडे (शिवसेना) बनाम गोकुल गीते (निर्दलीय) अमरावती- प्रवीण पोटे (भाजपा) बनाम हर्षदीप देशमुख (कांग्रेस) बनाम निलेश विश्वकर्मा (वंचित बहुजन आघाड़ी)
धाराशिव-लातूर-बीड़ बसवराज पाटिल (भाजपा) बनाम महेश देशमुख (कांग्रेस) परभणी-हिंगोली- सईद खान (शिवसेना) बनाम डॉ. विवेक नावंदर (ठाकरे गुट) बनाम सुशील देशमुख (निर्दलीय) के बीच मुकाबला रहा।
उधर शिवसेना उद्धव के अंदर राजनीतिक लड़ाई तब और तेज हो गई जब उद्धव ठाकरे गुट ने पार्टी की संसदीय बैठक में शामिल नहीं होने वाले छह बागी लोकसभा सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। वहीं दूसरी ओर, बागी नेताओं ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में अपने गुट के विलय की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देना शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि ये छह सांसद 20 जून को एकनाथ शिंदे से मिलेंगे। उस बैठक के बाद, वे स्पीकर के साथ हुई बातचीत और शिवसेना उद्धव (यूटीबी) छोड़ने के कारणों का ब्योरा देने वाले दस्तावेज सार्वजनिक कर सकते हैं। इससे शिवसेना के दोनों विरोधी गुटों के बीच राजनीतिक और कानूनी टकराव का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
संसदीय दल की इस बैठक को उद्धव गुट ने बहुत अहम बताया था, लेकिन इसमें सिर्फ चार सांसद ही शामिल हुए। बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे के साथ-साथ राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद थे। छह लोकसभा सांसदों के बैठक में नहीं आने के कारण अब पार्टी के भीतर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद नेताओं ने बागी नेताओं के खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक विकल्पों पर चर्चा की। हालांकि, कानूनी जानकारों का कहना है कि संसदीय दल की आंतरिक बैठक में शामिल होना दलबदल विरोधी कानून के दायरे में नहीं आता है। दसवीं अनुसूची के तहत, व्हिप केवल सदन की कार्यवाही के दौरान ही लागू होता है, ना कि पार्टी की आंतरिक बैठकों के लिए। हालांकि पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है, लेकिन अयोग्यता अपने आप नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक, सभी छह बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की है और एक पत्र सौंपा है। इस पत्र में कहा गया है कि शिवसेना उद्धव (यूटीबी) बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से भटक गई है। खबरों के अनुसार, सांसदों ने स्पीकर को बताया कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो रहे हैं ।
शिवसेना ठाकरे गुट के 6 बागी सांसद आने वाले दिनों में अपना अलग संसदीय गुट बना सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, परभणी के सांसद संजय जाधव को इस नए गुट का नेता बनाया जा सकता है। सांसद श्रीकांत शिंदे ने कुछ समय पहले ही इन सभी सांसदों से फोन पर फिर से बात की है। सांसदों ने श्रीकांत से कहा कि वे पिछले एक साल से उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।
इससे पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 9 लोकसभा सदस्यों में से 6 संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए जिससे पार्टी में विभाजन के संकेत स्पष्ट हो गए। शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे बैठक में शामिल हुए। पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सदस्य संजय राउत भी बैठक में मौजूद थे। शेष 6 सांसदों की गैर मौजूदगी ने पार्टी के संसदीय दल में विभाजन की लगभग पुष्टि कर दी। बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसद नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचैरे हैं। बैठक के बाद सावंत ने संवाददाताओं से कहा कि इन 6 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। लोकसभा में शिवसेना के नेता सावंत ने कहा, ‘‘उनसे पूछा जाएगा कि व्हिप जारी किए जाने के बावजूद वे बैठक में शामिल क्यों नहीं हुए। उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा। यदि वे जवाब नहीं देते हैं तो हम उनकी सदस्यता रद्द किए जाने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखेंगे। इधर, उद्धव ठाकरे के 6 बागी सांसदों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। महाराष्ट्र सरकार के इंटेलीजेंस कमिश्नर के आदेश पर इन सभी 6 सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया गया है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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