योगी के राज में सुगम सफर

योगी आदित्यनाथ की सरकार के दूसरे कार्यकाल में उत्तर प्रदेश को आधुनिक सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में एक और बड़ी सौगात मिली है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जुलाई को 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा का समय, जो पहले दो से तीन घंटे तक लग जाता था, अब घटकर लगभग 40 मिनट रह जाएगा। यह पहला एक्सप्रेसवे है जो एआई-एमसी तकनीक से बनाया गया। सफर को आसान बनाने के लिए इस एक्सप्रेसवे पर बिना ठहरे ही टोल टैक्स कट जाएगा।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ और कानपुर के बीच एक आधुनिक हाईवे की मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जैसे ही उन्हें इस परियोजना की आवश्यकता के बारे में बताया गया, उन्होंने तुरंत इसे स्वीकृति प्रदान की। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच वर्षों पुरानी ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि मार्च 2019 में इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था और अब यह जनता के लिए समर्पित हो चुकी है।
इस अवसर पर केवल लखनऊ-कानपुर छह लेन एक्सप्रेसवे का उद्घाटन ही नहीं हुआ, बल्कि हरदोई-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग के चार लेन विस्तार (पैकेज-4) का भी लोकार्पण किया गया। इसके अलावा इंजीनियरिंग कॉलेज चैराहे पर बनने वाले चार लेन फ्लाईओवर का शिलान्यास भी किया गया। इन परियोजनाओं से राजधानी क्षेत्र और आसपास के जिलों की सड़क संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ और कानपुर के बीच लगातार बढ़ते यातायात को देखते हुए इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई थी। उन्होंने बताया कि दोनों शहरों के बीच रोजाना लाखों वाहन चलते हैं, जिसके कारण कई बार यात्रा में तीन घंटे तक का समय लग जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए विश्वस्तरीय, सुरक्षित और तेज सड़क संपर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था।
गडकरी ने बताया कि दिसंबर 2020 में इस परियोजना को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-6 का दर्जा दिया गया। इसके साथ ही यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे बन गया है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली पूरी तरह लागू की गई है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भविष्य की स्मार्ट सड़क प्रणाली का उदाहरण है और देश के अन्य एक्सप्रेसवे के लिए भी एक मॉडल साबित होगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माण कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए परियोजना को दो हिस्सों में विभाजित किया था। पहला पैकेज लगभग 18 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ क्षेत्र को जोड़ता है। घनी आबादी, भारी ट्रैफिक और भूमि अधिग्रहण जैसी चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरों ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए इस जटिल हिस्से का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया।
दूसरा पैकेज लगभग 45 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सेक्शन है, जिसे नई भूमि पर विकसित किया गया है। यह मार्ग लखनऊ के 11 और उन्नाव के 31 गांवों से होकर गुजरता है। इस एक्सप्रेसवे के बनने से न केवल दोनों शहरों के बीच आवागमन आसान होगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी बेहतर सड़क संपर्क और आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिलेगा।
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अत्याधुनिक तकनीक है। सड़क निर्माण में ऑटोमेटेड मशीन गाइडेंस सिस्टम का व्यापक उपयोग किया गया, जिसमें कंप्यूटर और सैटेलाइट तकनीक से संचालित मशीनों ने निर्माण कार्य को अधिक सटीक, मजबूत और टिकाऊ बनाया। इससे निर्माण की गुणवत्ता बेहतर हुई और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी काफी कम हो गई।
एक्सप्रेसवे पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं होंगे। वाहन बिना रुके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से यात्रा कर सकेंगे और टोल शुल्क ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक के माध्यम से स्वतः कट जाएगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी समाप्त होगी।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे आधुनिक सड़क मार्गों में शामिल है। पूरे 63 किलोमीटर मार्ग पर 80 से अधिक हाई-डेफिनिशन कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड रडार लगाए गए हैं। यदि कोई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक गति से चलता है तो नियंत्रण कक्ष से स्वतः ई-चालान जारी कर दिया जाएगा। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने और यातायात नियमों के बेहतर पालन की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज का उत्तर प्रदेश बेहतर कानून व्यवस्था, सुशासन और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना के कारण देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। उन्होंने केंद्रीय रक्षा मंत्री और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों को जोड़ने वाला मार्ग नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के औद्योगिक, व्यावसायिक और शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर सड़क संपर्क से निवेश आकर्षित होगा, उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की आधारभूत संरचना के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, उन्नत सुरक्षा व्यवस्था और तेज कनेक्टिविटी से लैस यह परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि प्रदेश के आर्थिक विकास और औद्योगिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगी। आने वाले वर्षों में यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन गलियारों में से एक के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



