दूरगामी है ब्राजील का विरोध

अमेरिका ने ब्राजील से आयात होने वाले अधिकांश उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला लिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार यह नया शुल्क 22 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। इस नीति के तहत भविष्य में चीन, भारत, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको सहित कई अन्य देशों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है और विश्व अर्थव्यवस्था में एक नए व्यापारिक टकराव की शुरुआत कर सकता है।
यह नई टैरिफ नीति ऐसे समय लागू की जा रही है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष ट्रंप प्रशासन की पहले की टैरिफ व्यवस्था के प्रमुख हिस्से को निरस्त कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने ’’यू.एस. ट्रेड एक्ट की धारा 301 ’’के तहत कथित अनुचित व्यापारिक गतिविधियों की जांच के आधार पर नई रणनीति तैयार की। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने अब तक लगभग 80 व्यापारिक जांच शुरू कर दी हैं, जिनके आधार पर कई देशों के खिलाफ नई व्यापारिक कार्रवाई की जा सकती है।
ब्राजील के खिलाफ यह निर्णय जून 2026 में प्रस्तावित 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ के बाद लिया गया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ब्राजील डिजिटल व्यापार, पर्यावरण संरक्षण, विशेष रूप से अवैध वनों की कटाई तथा कुछ अन्य व्यापारिक नीतियों में अनुचित व्यवहार कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि पिछले एक वर्ष से दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन इन मुद्दों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने कहा कि अमेरिका अभी भी बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन जब तक ब्राजील अपनी नीतियों में आवश्यक बदलाव नहीं करता, तब तक यह टैरिफ लागू रहेगा। उनके अनुसार इस कार्रवाई का उद्देश्य निष्पक्ष और संतुलित व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
दूसरी ओर, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिका के इस फैसले को पूरी तरह अनुचित और बिना किसी वैध आधार का बताया। उन्होंने कहा कि ब्राजील इस निर्णय का कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर विरोध करेगा। राष्ट्रपति लूला ने घोषणा की कि उनकी सरकार देश के रिसिप्रोसिटी लॉ के तहत जवाबी कदम उठाएगी और इस मामले को विश्व व्यापार संगठन के विवाद निपटान तंत्र के समक्ष भी ले जाएगी।
इस विवाद ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव भी बढ़ा दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने राष्ट्रपति लूला पर आरोप लगाया कि उन्होंने अमेरिका के साथ ईमानदारी से बातचीत नहीं की। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में लूला ने ब्राजील की जनता के हितों से अधिक अपने राजनीतिक रुख को प्राथमिकता दी और यही कारण है कि अब देश को इन टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक दूरी को भी दर्शाता है।
नई टैरिफ व्यवस्था के तहत ब्राजील से अमेरिका आने वाले हजारों उत्पाद प्रभावित होंगे। इनमें चीनी, कृषि मशीनरी, परिधान, विद्युत उपकरण, कागज और इस्पात जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं। हालांकि अमेरिका ने कुछ महत्वपूर्ण वस्तुओं को इस शुल्क से बाहर रखने का निर्णय लिया है। इनमें गोमांस, कॉफी, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ऑर्गेनिक शहद, पिग आयरन और बिना स्वाद वाली इंस्टेंट कॉफी जैसे कुछ उत्पादों को भी छूट सूची में शामिल किया गया है।
हालांकि कुछ विशेष उत्पाद, जैसे उच्च शुद्धता वाला डिसॉल्विंग पल्प तथा कुछ औद्योगिक रसायनों को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा। इससे ब्राजील के कई उद्योगों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
स्थिति को और जटिल बनाने वाली बात यह है कि ब्राजील के खिलाफ एक अलग सेक्शन 301 जांच भी जारी है, जो कथित रूप से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम से जुड़े मामलों की पड़ताल कर रही है। यह जांच 24 जुलाई 2026 तक पूरी होने की संभावना है। यदि इसके आधार पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाता है, तो ब्राजील के कई उत्पादों पर कुल शुल्क बढ़कर 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इससे ब्राजील के निर्यातकों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
ब्राजील ने अमेरिका के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विशेष रूप से अमेरिका द्वारा ब्राजील की डिजिटल भुगतान प्रणाली पर लगाए गए आरोपों को ब्राजील ने निराधार बताया है। अमेरिका का दावा है कि यह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड कंपनियों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा करती है, जबकि ब्राजील का कहना है कि यह केवल उपभोक्ताओं को सस्ता, सुरक्षित और तेज भुगतान विकल्प उपलब्ध कराती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह नई व्यापार रणनीति केवल ब्राजील तक सीमित नहीं रहेगी। यदि आने वाले महीनों में भारत, चीन, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी इसी प्रकार के शुल्क लगाए जाते हैं, तो वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित होंगी, उत्पादन लागत बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के लिए वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
भारत के संदर्भ में भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि वह कई देशों की व्यापार नीतियों की समीक्षा कर रहा है। यदि भारत भी नई टैरिफ नीति के दायरे में आता है, तो भारतीय निर्यात, विशेषकर इस्पात, इंजीनियरिंग उत्पाद, वस्त्र और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अभी भारत के खिलाफ कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
अमेरिका और ब्राजील के बीच शुरू हुआ यह नया व्यापारिक विवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक मंदी, महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चुनौतियों से जूझ रही है, बड़े देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक टकराव वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा सकते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश वार्ता के माध्यम से समाधान निकाल पाएंगे या यह विवाद विश्व व्यापार संगठन और व्यापक व्यापार युद्ध का रूप लेगा। आने वाले सप्ताहों में लिए जाने वाले निर्णय न केवल अमेरिका और ब्राजील, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



