लेखक की कलम

अखिलेश भी निकालेंगे धर्म रथ यात्रा

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से राम रथ यात्रा निकाली थी। यह यात्रा भाजपा के लिए बहुत ही शुभ साबित हुई। राजनीतिक जानकारों के अनुसार आडवाणी की रथ यात्रा ने ही भाजपा को राजनीति के शिखर पर पहुंचाया है। अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में रथ यात्रा निकालने वाले हैं। यह रथ यात्रा प्रदेश की किसी धर्म नगरी से निकाली जाएगी। हालांकि अखिलेश यादव अभी दुविधा ये मुक्त नहीं हुए हैं। उन्होंने ही अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में चोरी का मामला उठाया था। इस मामले को वह आगामी विधानसभा चुनाव में भी प्रमुख मुद्दा बनाएंगे। इसलिए चढ़ावे में चोरी का मामला वह बार-बार उठाते हैं। इसके साथ ही समाजवादी और पीडीए को भी मजबूती से थामे हैं। इसीलिए अपनी संभावित रथ यात्रा का नाम समाजवादी पीडीए रथ यात्रा रखे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 15 जुलाई को जगन्नाथ रथ यात्रा पर शुभकामनाएं भी दी हैं। उन्होंने कहा देशवासियों को महाप्रभु भगवान विष्णु के अवतार जगन्नाथ सुख-समृद्धि और वैभव प्रदान करें। इस प्रकार अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव में धार्मिक पुट डालना चाहते हैं। सपा प्रमुख की संभावित रथ यात्रा प्रदेश की 400 से ऊपर विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव का आगाज रथयात्रा से करने वाले हैं। सितंबर के पहले हफ्ते में वह समाजवादी पीडीए रथ यात्रा निकालने वाले हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा चुनावों से पहले शुरू होने वाली इस रथयात्रा की शुरुआत अखिलेश यादव हिंदुओं के किसी बड़े धार्मिक स्थल से कर सकते हैं। हालांकि वह धार्मिक स्थान कौन सा होगा, फिलहाल इसको लेकर पार्टी आलाकमान मंथन में जुटा है। लेकिन अखिलेश यादव की रथयात्रा के ऐलान के साथ ही यूपी का सियासी पारा गर्माना शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी को अच्छी सफलता मिली थी और यूपी में पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं। सपा यात्रा की शुरुआत किसी बड़े हिंदू धार्मिक स्थल जैसे अयोध्या, मथुरा या वाराणसी से शुरू कर सकती है। इसे सपा के सॉफ्ट-हिंदुत्व के मोर्चे पर भाजपा को घेरने के तौर पर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव की रथयात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों और 75 जिलों को कवर करेगी। सियासी गलियारों में चर्चा है कि यात्रा का विशेष फोकस पश्चिमी यूपी के जाट और गुर्जरबहुल क्षेत्रों पर रहेगा जिसमें बुलंदशहर और मुरादाबाद मंडल अहम हो सकता है क्योंकि समाजवादी पार्टी अभी से नए सामाजिक समीकरण गढ़ने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव खुद इस यात्रा की कमान संभालने वाले हैं जबकि सांसद डिंपल यादव, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे, शिवपाल सिंह यादव समेत पार्टी के सभी सांसद विधायक और जिलाध्यक्ष यात्रा की तैयारियों में जुटेंगे। यात्रा की थीम पीडीए पर होगी जिसमें सरकार यूपी की कानून व्यवस्था पर भी निशाना साधने की तैयारियों में जुटे है।
इस प्रकार समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी पारंपरिक पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति के साथ-साथ सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति अपना रहे हैं। इसके तहत वे सीधे तौर पर हिंदुत्व के मुद्दे पर मुखर होकर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव सनातन ही समाजवाद है का नैरेटिव सेट कर रहे हैं, जिसके जरिए वे खुद को और अपनी पार्टी को सच्चे सनातनी के रूप में पेश कर रहे हैं। वे लगातार विभिन्न प्रमुख मंदिरों, जैसे चित्रकूट, काल भैरव और केदारेश्वर मंदिर के दर्शन कर रहे हैं, ताकि हिंदू मतदाताओं तक अपनी पहुंच बनाई जा सके। अखिलेश यादव राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और भ्रष्टाचार के मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठा रहे हैं और भाजपा पर भगवान राम के नाम पर घोटाला करने का आरोप लगाते हैं। उन्होंने बड़े मंगल (ज्येष्ठ माह में मंगलवार को मनाया जाने वाला हनुमान जी का त्योहार) के दौरान हनुमान चालीसा के दोहे पढ़े। अखिलेश ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह ज्योतिषियों से सलाह लेते हैं और पंडित कहे तभी आगे बढ़ते हैं। अखिलेश ने अपने पैतृक शहर इटावा में श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पर 50 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने की बात कही जा रही है। मंदिर परिसर में भगवान राम की बाल मूर्ति स्थापित की गई है। अखिलेश ने कहा कि यह मंदिर शिवशक्ति अक्ष रेखा के ऊपर स्थित है, जो इसे आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। गत 9 जुलाई को अखिलेश यादव ने लखनऊ में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। यह चार महीने में उनकी दूसरी मुलाकात थी। इसके बाद अखिलेश ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, पूज्य शंकराचार्य जी के दर्शन और आशीर्वाद पाना सौभाग्य की बात थी। सनातन धर्म पर आ रहे संकट को दूर करने और धर्म को अधर्मियों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए सार्थक चर्चा हुई।
इस राजनीतिक बदलाव का उद्देश्य भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे की काट खोजना और बहुसंख्यक हिंदू वोट बैंक में सेंध लगाना है। अखिलेश यादव अच्छी तरह समझते हैं कि सिर्फ पीडीए के दम पर सत्ता में वापसी मुश्किल है। उत्तर प्रदेश
की आबादी का करीब 80 फीसद
हिंदू है और सिर्फ अल्पसंख्यक या खास जातियों के भरोसे बहुमत
हासिल नहीं किया जा सकता।
2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा की हार का एक बड़ा कारण यह भी था कि पार्टी को मुस्लिम तुष्टिकरण वाली छवि से नुकसान हुआ।
इसलिए 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वे अब पारंपरिक जातीय समीकरणों (यादव-मुस्लिम) से हटकर पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के साथ-साथ सॉफ्ट हिंदुत्व को भी अपना रहे हैं। एक्सपर्ट्स इसे नियो-सोशलिस्ट रणनीति कह रहे हैं, यानी पीडीए आधार को बचाते हुए उसमें सॉफ्ट हिंदुत्व का एक नया रंग घोलना। फॉर्मूला वही रणनीति है, जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा को बड़ी कामयाबी दिलाई। 2019 में बीजेपी को उत्तर प्रदेश की 80 में से 64 सीटें मिली थीं जबकि 2024 में यह आंकड़ा घटकर 33 पर आ गया, जबकि सपा ने 37 सीटें जीतीं। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने कुल 43 सीटें (37 सपा और 6 कांग्रेस) हासिल कीं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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