
गिरोहबंद अपराधियों पर नकेल कसने की जरूरत
किसी भी राज्य में यदि गिरोह बंद अपराधी संगठित होकर लोगों को धमकी दे कर उन पर हमले करवा कर फिरोती या रंगदारी टैक्स की जबरन वसूली करें तो ऐसे शासन को भयमुक्त लोकतंत्र कहना गलत होगा। भाजपा के सरकार में आने और लगातार अपना जनाधार बढ़ाने के पीछे एक खास वजह यह भी है कि भाजपा ने भयमुक्त समाज का सपना दिखाया लेकिन अब भाजपा के इस थीम को अपराधी चैतरफा चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में सरकार की छवि को धूमिल करने का मकसद सफल हो रहा है और सरकार की साख को नुकसान पहुंच रहा है। आपको बता दें कि राजधानी दिल्ली सहित देश के अनेक भागों में गैंगस्टरों और उनके गुर्गों के जबरन वसूली गिरोह (रंगदारी मांगने वाले) सक्रिय हैं जो मांगी गई रकम न मिलने पर हत्या तक करने से संकोच नहीं करते। ये गिरोह मुख्य रूप से व्यापारियों तथा आम लोगों तक को किसी न किसी बहाने निशाना बना कर ब्लैकमेल कर रहे हैं हाल ही में एक के बाद एक ऐसी दर्जनों वारदातों ने सुर्खिया बटोरी है।
16 फरवरी को गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) में पंकज दीक्षित नामक एक डाक्टर को असामाजिक तत्वों द्वारा 15 लाख रुपए रंगदारी देने का संदेश मिलने और रंगदारी न देने पर उसके होटल तथा पूरे परिवार को समाप्त कर देने की धमकी मिलने पर पूरा परिवार दहशत में आ गया। 4 अप्रैल को खरगौन मध्य प्रदेश में एक कॉटन व्यापारी के घर पर अंधाधुंध गोलीबारी करके लारेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 10 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी गई और मांग पूरी न करने पर हैंड ग्रेनेड से हमला करने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया।
18 मई को बोकारो (झारखंड) में रंगदारी की मांग के चलते जयराम प्रसाद नामक व्यक्ति की कुछ लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी।
29 मई को गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) में होटल कारोबारी आलोक राय द्वारा रंगदारी देने से इन्कार करने पर स्थानीय कटरा गैंग के सदस्यों ने उनके बेटे विनीत राय की हत्या कर दी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बाद में एनकाऊंटर में उक्त कांड के मुख्य आरोपी कमलेश को मार गिराया।
2 जून को मुंगेर (बिहार) में अपराधियों ने रंगदारी न देने पर खेत में सो रहे किसान मंसूरी यादव की गोली मार कर हत्या कर दी। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व उक्त बदमाशों ने मंसूरी यादव से रंगदारी की मांग की थी और न देने पर जान से मार देने की धमकी दी थी।
3 जून को गुरुग्राम पुलिस ने रंगदारी के लिए लोगों का अपहरण करने वाले नितिन को एनकाऊंटर में घायल करके गिरफ्तार किया।
17 जून को पानीपत (हरियाणा) से एक 12 वर्षीय बच्चे का अपहरण करके 1.5 करोड़ रुपए रंगदारी मांगने के सिलसिले में पुलिस ने एक महिला सहित 3 आरोपियों को रोहतक से गिरफ्तार करने के साथ ही बच्चे को भी उनके कब्जे से छुड़ाया।
26 जून को असंध (हरियाणा) में एक मिष्ठान भंडार के मालिक से 1 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने तथा मांग पूरी न करने पर गोली मारने की धमकी देने के सिलसिले में पुलिस ने केस दर्ज किया। 29 जून को साकची (जमशेदपुर, झारखंड) में एक युवक ने एक दुकानदार द्वारा रंगदारी देने से इंकार करने पर चाकुओं से वार करके उसे घायल कर दिया।
10 जुलाई को जालंधर (पंजाब) में एक फायनेंसर को रास्ते में रोक कर और हथियार दिखा कर उससे फिरौती मांगने तथा विदेश के नम्बरों से फोन करवा कर उससे शिकायत वापस लेने के लिए धमकाने के मामले में पुलिस ने 5 लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया।
12 जुलाई को जालंधर (पंजाब) स्थित कर्मा फैशन स्टूडियो के मालिक को विदेश में बैठे गैंगस्टर डोनी बल ने 50 लाख रुपए फिरौती देने का संदेश भेजा और रकम न देने पर जान से मारने की धमकी दी। 12 जुलाई को ही दिल्ली पुलिस ने एक व्यापारी से 5 करोड़ रुपए रंगदारी मांगने के मामले में विदेश में मौजूद गैंगस्टर हैरी बॉक्सर के 3 शूटरों शिव गोविंद, अभिनव उर्फ आकाश तथा विवेक को गिरफ्तार किया। इनके पास से पुलिस ने 3 अत्याधुनिक पिस्तौल, 26 कारतूस तथा मोबाइल फोन बरामद किए।
पता हो कि भारत में रंगदारी और डिजिटल जबरन वसूली संगठित अपराध का एक बड़ा और गंभीर नेटवर्क बनता जा रहा है। आधुनिक तकनीकों के आने से अपराधियों ने अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों को अपना धंधा बना लिया है। डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को ऑनलाइन डराते हैं। वे पीड़ितों को घंटों वीडियो कॉल पर बंधक जैसी स्थिति में रखकर लाखों रुपये वसूलते हैं। ऐप्स में लोगों को छोटा कर्ज देते हैं। बाद में उनके फोन का डेटा हैक कर, अश्लील तस्वीरें बनाकर और परिवार को बदनाम करने की धमकी देकर जबरन वसूली करते हैं।
लॉरेंस बिश्नोई जैसे बड़े संगठित गैंग विदेशों (जैसे कनाडा, दुबई) में बैठकर वर्चुअल इंटरनेशनल नंबर्स से व्यापारियों और मशहूर हस्तियों को धमकी भरे कॉल करते हैं। पुलिस से बचने के लिए अब रंगदारी की रकम कैश के बजाय बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टोकरेंसी में मांगी जाती है, जिसे ट्रैक करना मुश्किल होता है। इससे बचने के लिए सरकार ने पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया है, जहां तुरंत शिकायत दर्ज की जा सकती है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी और राज्यों की पुलिस (जैसे मकोका या एंटी-एक्सटॉर्शन सेल) इन गिरोहों के वित्तीय नेटवर्क और संपत्तियों को कुर्क कर रही है। बैंकों और गृह मंत्रालय द्वारा लगातार लोगों को अनजान कॉल्स और ऐप्स से सावधान रहने की चेतावनी दी जाती है।
इस प्रकार की घटनाओं के विषय में पुलिस का कहना है कि वसूली की काल आने के बाद बिचैलिए भी समझौता करवाने के लिए सक्रिय हो जाते हैं और इनमें कई पुलिस वाले भी शामिल हैं। जबरन वसूली करने वाले गिरोहों के कारण लोगों में दहशत व्याप्त है। अतः ऐसे गिरोहों को सख्ती पूर्वक फौलादी हाथों से कुचलने की आवश्यकता है ताकि लोग निर्भीकतापूर्वक अपना कारोबार कर सकें और निश्चित होकर जी सकें।(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)



