शरद पवार के घर में एक और दीवार
तेजी से बदलते समीकरण और राज्यों को 50 प्रतिशत अधिक सीटों का लालीपाॅप
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। शिवसेना के बाद अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शरद पवार गुट में भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। संसद के मानसून सत्र में प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को लेकर पार्टी के भीतर दो अलग-अलग राय दिखाई दे रही हैं। सांसद सुप्रिया सुले ने संकेत दिया है कि यदि सरकार राज्यों को 50 प्रतिशत अधिक सीटें देने का लिखित आश्वासन देती है, तो इस पर विचार किया जा सकता है। वहीं विधायक रोहित पवार इस विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परिसीमन का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होगी।
वैचारिक मतभेद की आहट
इसी बीच यह चर्चा भी तेज है कि एनसीपी (शरद पवार गुट) के कुछ विधायक भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने के पक्ष में हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक में अधिकांश नेताओं ने सत्ता के साथ जाने की वकालत की, ताकि विकास कार्यों के लिए अधिक सरकारी संसाधन मिल सकें और आगामी चुनावों में राजनीतिक लाभ प्राप्त हो। हालांकि इस बैठक में रोहित पवार की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और इसे पार्टी के भीतर बढ़ते वैचारिक मतभेद का संकेत माना जा रहा है।
गम्भीर चर्चाआं में अनुपस्थित रहे रोहित पवार
हालांकि इन चर्चाओं पर अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम निर्णय शरद पवार के नेतृत्व में ही लिया जाएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि एनसीपी के भीतर राजनीतिक दिशा को लेकर असमंजस और मतभेद बढ़ रहे हैं, जिसका प्रभाव महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विधानसभा सत्र के दौरान विधान भवन मंे एनसीपी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने पार्टी विधायकों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें रोहित पार को छोड़कर शेष नौ विधायक मौजूद थे। सूत्रों के हवाले से यह बताया गया कि अधिकांश विधायकों ने एनडीए के साथ जाने मंे विशेष रुचि दिखाई है। उनका मनना है कि 2029 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सत्ता के साथ जाना राजनीतिक रूप से अधिक फायदेमंद हो सकता है।