दिल्लीदेशराज्य

भारत में एआई की संभावनाएं

नई दिल्ली वैश्विक तकनीकी मानचित्र परछा गया है। भारत सरकार द्वारा आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री और तकनीकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी एकत्र हुए। उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की वैज्ञानिक प्रगति और युवाओं की क्षमता का प्रतीक बताया। पाँच दिवसीय इस सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक एआई शासन और सहयोग के लिए एक “साझा रोडमैप” प्रस्तुत करना था। इसमें लगभग ढाई लाख आगंतुकों के साथ 20 राष्ट्राध्यक्ष और 45 मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल था। सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा जैसे नेता भाग लेने वाले हैं। तकनीकी जगत से सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन, क्रिस्टियानो अमोन, ब्रैड स्मिथ और यान लेकुन जैसी हस्तियाँ भी मौजूद रहीं। सम्मेलन का केंद्रीय विषय “पीपल, प्रोग्रेस और प्लैनेट रहा जिसे तीन सूत्रों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सरकार का मानना है कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना – जैसे आधार और डिजिटल भुगतान प्रणालियाँ एआई को बड़े पैमाने पर और कम लागत में लागू करने का मॉडल दे सकती हैं। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के शब्दों में, एआई का लक्ष्य “मानवता, समावेशी विकास और सतत भविष्य” के लिए होना चाहिए। एआई शिखर सम्मेलनों का स्वरूप पिछले कुछ वर्षों में बदल गया है। सन् 2023 में लंदन के पास आयोजित पहली बैठक मुख्यतः एआई सुरक्षा और जोखिम नियंत्रण पर केंद्रित थी। लेकिन अब ये आयोजन व्यापार, निवेश, नवाचार और भू-राजनीतिक संतुलन के व्यापक मंच बन गए हैं। भारत इस मंच के जरिए स्वयं को विकसित अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साउथ के बीच एक सेतु के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है।
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई एम्पैक्ट समित में को-फाउंडर जिमी वेल्स ने भारत की एआई क्षमता पर गहरी उम्मीद जताई है. लेकिन साथ ही सावधानी बरतने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि भारत आज एआई का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और यह दौर भारत के एआई मोमेंट की शुरुआत है। वेल्स ने कहा कि भारत वह देश है जहां तकनीक अपनाने की ताकत सिर्फ कंपनियों से नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं से आती है। उन्होंने बताया कि भारत अंग्रेजी विकिपीडिया का तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है और 25 भारतीय भाषाओं में सक्रिय है। यह भाषाई विविधता भारत को वैश्विक एआई युग में सबसे महत्वपूर्ण देशों में शामिल करती है। वेल्स के अनुसार, एआई की सबसे उत्साहजनक दिशा उसका भाषाओं के बीच सुचारू रूप से काम करना है। यह क्षेत्र अभी सुधार की मांग करता है, लेकिन भारत जैसे बहुभाषी देश के लिए इसमें अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत सॉफ्टवेयर टैलेंट और उद्यमशीलता की
संस्कृति भारत को एआई नवाचार का बड़ा केंद्र बना सकती है। जिमी वेल्स ने चेतावनी दी कि एआई का उपयोग संघर्ष या हथियारकरण में सावधानी मांगता है। उन्होंने कहा, एआई बहुत सारा टेक्स्ट बना सकता है, लेकिन सही क्या है और गलत क्या, यह बताने के लिए इंसान की जरूरत है।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button