देश के विभिन्न राज्यों में संगठित अपराधियों द्वारा रंगदारी, फिरौती और धमकी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम नागरिकों और व्यापारियों में भय का वातावरण बन रहा है। हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सहित कई राज्यों में व्यापारियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों से करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगी गई। कई मामलों में मांग पूरी न होने पर हत्या, गोलीबारी और अपहरण जैसी गंभीर घटनाएं भी सामने आईं।
तकनीक बनी असुरक्षा वजह
अपराधियों ने अब आधुनिक तकनीक का भी सहारा लेना शुरू कर दिया है। डिजिटल अरेस्ट, साइबर ठगी, फर्जी पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डराना, मोबाइल डेटा हैक कर ब्लैकमेल करना तथा बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में फिरौती मांगना संगठित अपराध का नया स्वरूप बन गया है। विदेशों में बैठे गैंगस्टर भी इंटरनेट कॉल और वर्चुअल नंबरों के जरिए भारत में रंगदारी का नेटवर्क संचालित कर रहे हैं।
सरकार सक्रिय ताकि अपराध पर लगे लगाम
सरकार और जांच एजेंसियां ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। एनआईए, राज्य पुलिस और साइबर सेल अपराधियों के नेटवर्क और उनकी संपत्तियों पर कार्रवाई कर रहे हैं। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत के लिए पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 भी उपलब्ध कराई गई है। लाॅरेंस बिश्नोई जैसे बड़े संगठित गैंग विदेशों में बैठकर वर्चुअल इंटरनेशनल नम्बर से व्यापारियों और मशहूर हस्तियों को धमकी भरे काॅल करते हैं। पुलिस से बचने के लिये रंगदारी की रकम कैश के बजाय बिटकाॅइन या अन्य क्रिप्टो करेंसी में मांगी जाती है, जिसे टैक करना मुश्किल होता था। सरकार लगातार लोगों को चेतावनी देकर सतर्क कर रही है।
आवश्यक है कि संगठित अपराधियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई, त्वरित न्याय, आधुनिक तकनीक से लैस पुलिस व्यवस्था तथा जनता की सतर्कता सुनिश्चित की जाए। भयमुक्त समाज और सुरक्षित व्यापारिक वातावरण के लिए ऐसे गिरोहों को पूरी सख्ती से कुचलना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।