सुखबीर-मोदी मुलाकात के निहितार्थ

पांच राज्यों के साथ अगले साल अर्थात् 2027 में पंजाब में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए 7 अगस्त को अकाली दल के नेता सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात दोनों दलों के पुनर्गठबंधन का संकेत देती है। अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का समर्थन भी कर दिया है। भाजपा और अकाली दल के बीच समय लम्बे समय तक गठबंधन चला। उस समय प्रकाश सिंह बादल का दबदबा था और भाजपा को बहुत कुछ सहन करना पड़ा लेकिन अब राबी और चिनाव का पानी भी भगवा का गुणगान करने लगा है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा समेत कई राज्यसभा सदस्य भाजपा का दामन थाम चुके हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी भाजपा के साथ आ गये हैं। इसलिए सुखबीर बादल भी समय की नजाकत समझ रहे हैं। उनकी पार्टी ने किसान आंदोलन के दौरान 2020 मंे एनडीए गठबंधन से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद अकाली दल (बादल) को जनता ने ठुकरा दिया। अकाली दल को 2022 के विधानसभा चुनाव मंे 117 सीटों वाली विधानसभा मंे सिर्फ 3 विधायक मिल पाये थे। भाजपा को उस समय भले ही एक सीट मिली थी लेकिन आज पंजाब में भाजपा का मजबूत जनाधार दिख रहा है। इसलिए अकाली दल और भाजपा मिलकर विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा ने पंजाब मंे चुनाव की कमान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सौंप रखी है।
पंजाब में सियासी सरगर्मी के बीच अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने 7 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या आगामी चुनाव को लेकर बीजेपी-अकाली दल गठबंधन की संभावना तलाश रहे हैं। सुखबीर सिंह बादल ने पीएम से मुलाकात के बाद कहा कि पंजाब की कानून व्यवस्था को लेकर बातचीत हुई है। इसके साथ साथ राज्य की सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को लेकर भी बात रखी है। बीजेपी, अकाली दल और कांग्रेस लगातार पंजाब की भगवंत मान सरकार को घेरती रही है। शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का समर्थन करके एकता के संकेत की पुष्टि कर दी है।
राज्य की सियासत में समय-समय पर बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन को लेकर अटकलें लगती रही है। हालांकि बीजेपी के नेता इससे इनकार करते रहे हैं और लगातार संगठन मजबूत करने में जुटे हैं। पिछले दिनों जब राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत सात सांसदों ने आम आदमी पार्टी (आप) में बगावत की और बीजेपी में शामिल हुए तो इसे सियासी गलियारों में बीजेपी का ऑपेशन पंजाब माना गया। पीएम मोदी से बादल की मुलाकात पर राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तंज कसा है। उन्होंने कहा, ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे। तो क्या चन्दा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?
बीजेपी और अकाली दल के बीच लंबे समय तक गठबंधन रहा है, लेकिन किसानों के मुद्दे पर सितंबर 2020 में गठबंधन टूट गया। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल और बीजेपी दोनों अलग अलग लड़ीं। राज्य विधानसभा की 117 सीटों में आम आदमी पार्टी को 92, कांग्रेस को 18, अकाली दल को 3 और बीजेपी को एक सीट मिली थी। इससे पहले 2017 के चुनाव में कांग्रेस को 77, आप को 20, अकाली दल को 15 और बीजेपी को तीन सीटें मिली थीं। वहीं 2012 में अकाली दल को 56, कांग्रेस को 46, बीजेपी को 12 सीटें मिली थीं।
पंजाब में अगामी विधानसभा चुनवा 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने प्रचार के लिए अपना मुख्य चेहरा हरियाणा के मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी को उतारा है। बीजेपी अगामी चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। इस बीच नायब सिंह सैनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए यह संकेत भी दिए कि बीजेपी आगामी चुनाव में किसी अलांयस के साथ चुनाव लड़ सकती है? सैनी ने महान क्रांतिकारी सरदार उधम सिंह की 86वीं शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह भी कहा था कि सनाउर की इस ऐतिहासिक धरती पर आने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा जो बलिदान सरदार उधम सिंह ने दिया, वह अपने या अपने परिवार को मजबूत करने के लिए नहीं था। उन्होंने इसलिए बलिदान दिया ताकि हमारा समाज और हमारा पंजाब खुशी से जी सके और आने वाली पीढ़ियों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
सैनी कहा कि सरकार ने दावा किया था कि वह युवाओं को रोजगार देगी। मैं सरकार से खासकर मान साहब और केजरीवाल से मंच से किए गए वादों के बारे में पूछना चाहता हूं। उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार ईमानदार है और उनकी पार्टी के नेता पूरी तरह ईमानदार हैं। उन्होंने रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए थे, हर घर में नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन असल में क्या हुआ? पंजाब के युवाओं को कितना रोजगार मिला? हरियाणा की बात करें तो हमारी सरकार वहां डेढ़ साल से सत्ता में है और इस दौरान हमने 50,000 नौकरियां दी हैं और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।
बहरहाल शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पंजाब के मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। सुखबीर बादल ने राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर अपनी चिंताएं प्रधानमंत्री के सामने रखीं।इसके साथ ही उन्होंने पंजाब सरकार की विभिन्न योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया और इस संबंध में अपना पक्ष रखा। बीते कुछ दिनों में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं के बयान आए हैं जिनसे यह संकेत मिल रहे हैं कि साल 2020 में टूटा अलायंस एक बार फिर हो सकता है।
आम आदमी पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच अलायंस होगा। हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने भी पंजाब में अलायंस को लेकर यह दावा किया था कि हम पहले यह देखेंगे कि कौन हमारी विचाराधारा के साथ आ सकता है। पंजाब विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। इस बीच सत्तारूढ़ दल आम आदमी पार्टी के साथ-साथ विपक्षी दलों ने भी तैयारी शुरू कर ली है। इसी क्रम में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) ने 20 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट भी जारी कर दी है जिनमें बड़ी विधानसभाओं पर प्रत्याशी उतारे गए हैं।
पंजाब में कुल 117 विधानसभा सीट हैं, जिनपर साल 2027 में चुनाव होने हैं। शिअद (अमृतसर) ने 28 जुलाई को पहली लिस्ट जारी कर के चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इन नामों को पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में मंजूरी दी गई। इसलिए सुखबीर बादल भी सक्रिय हो गये हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



