अखिलेश को सीएम बनाएगी कांग्रेस

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर राजनीतिक समीकरण उभरने शुरू हो गये हैं। हालांकि संशय की बदली भी छाई हुई है। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर बातचीत जारी है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन बरकरार रहने की संभावना है और अखिलेश यादव ही गठबंधन का चेहरा होंगे, हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर आधिकारिक बातचीत सितंबर से शुरू होनी तय की गई है। इसी के साथ कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि हमारी पार्टी छोटे और नए दलों को भी विपक्षी गठबंधन के साथ लाने की कोशिश कर रही है और उनकी कई दलों से बातचीत चल रही है। गौतम ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में दलित, अति-पिछड़ा, पिछड़ा वर्ग, किसान, मजदूर, छात्र और युवा राहुल गांधी की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अकेली पार्टी है जो जाति-धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर आइडिया ऑफ इंडिया की बात करती है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन की तैयारियों के बारे में गौतम कहते हैं कि उन्हें प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाले करीब एक महीना 20 दिन हुआ है और इस दौरान छह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) सचिवों की नियुक्ति हो चुकी है तथा प्रवक्ताओं की सूची भी तैयार है, जिसे जल्द घोषित किया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में संगठन सृजन अभियान 11 अगस्त से शुरू हो चुका है, इसके बाद 15 सितंबर तक जिला स्तर की कमेटियां और 30 सितंबर तक नई प्रदेश कांग्रेस कमेटी घोषित कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अक्टूबर के अंत तक ग्राम पंचायत और बूथ स्तर की कमेटियों के गठन का काम भी पूरा कर लिया जाएगा।
इस प्रकार यूपी में आगामी विधान सभा चुनाव के लिए मुख्य विपक्षी गठबंधन का चेहरा लगभग साफ हो गया है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ही विपक्षी गठबंधन का मुख्य चेहरा होंगे। सितंबर से सीट बंटवारे को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू होने की उम्मीद है, जो अक्टूबर तक तय हो सकती है। कांग्रेस का दावा है कि उत्तर प्रदेश में दोनों दलों के बीच एक सम्मानजनक और मजबूत समझौता होगा, जिससे मिलकर चुनाव लड़ा जा सके। इसी के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने बयान दिया है कि गठबंधन के जरिए ही विपक्षी ताकतें मजबूत होंगी और मिलकर सरकार बनाने का प्रयास किया जाएगा।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 19 अगस्त को कहा कि उनकी पार्टी यूपी विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे के मामले में सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की मदद के बिना समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। इतना ही नहीं उन्होंने मीडिया को दिए इंटरव्यू में बसपा प्रमुख मायावती से विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने तथा इंडिया गठबंधन में शामिल होने की अपील करते हुए यह भी कहा कि बसपा अध्यक्ष को समझना चाहिए कि देश और संविधान से बढ़कर कुछ नहीं है।
गौतम ने यह भी कहा कि बसपा, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) समेत उन सभी दलों का गठबंधन में स्वागत है जो लोग संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय में विश्वास रखते हैं तथा तानाशाही से मुक्ति चाहते हैं।
प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। गौतम का बयान अगर कांग्रेस आलाकमान की सहमति है तो सपा के लिए यह समस्या हो सकती है । बसपा प्रमुख ही नहीं उनके भतीजे आकाश आनंद भी अखिलेश यादव को निशाना बनाते रहते हैं। सवाल उठता है कि क्या अखिलेश यादव बसपा के साथ गठबंधन के लिए तैयार होंगे? गौतम कहते हैं कि मुझे नहीं लगता कि कोई आज इतना बड़ा जोखिम लेगा कि ‘इंडिया’ गठबंधन मजबूत हो और विपक्षी एकता बने तो वह उसके खिलाफ जाए। मुझे विश्वास है कि विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए, इंडिया गठबंधन की हर पार्टी तैयार होगी।
कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत के सवाल पर गौतम ने कहा कि चर्चा अभी शुरू होनी है और उनकी प्राथमिकता है कि 15 सितंबर के आसपास तक सीट बंटवारा तय हो जाए तथा अक्टूबर तक टिकट भी तय कर दिए जाएं। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन में सभी घटक दलों के बीच मिलकर चुनाव लड़ने को लेकर आम सहमति है और सीट बंटवारे पर सम्मानजनक समझौता होगा। गौतम का कहना है कि सीट बंटवारे का अंतिम फैसला शीर्ष नेताओं के स्तर पर बातचीत के बाद होगा, लेकिन मेरा यह भी कहना है कि यह समझौता आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस को सम्मान दिए बिना अखिलेश यादव जिंदगी में कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सकते, कांग्रेस की मदद के बिना वह कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सकते।
यह बात भी संदेह पैदा करती है कि जब उनसे यह पूछा गया क्या ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बनने पर अखिलेश यादव ही मुख्यमंत्री होंगे तो गौतम ने कहा, अभी तो हम लोग यही कह रहे हैं कि आपको (अखिलेश) बनाना चाह रहे हैं, अब जल्दी से मेहनत करें, चीजों को फाइनल करें।
कांग्रेस के यूपी प्रभारी ने कहा, नए दलों से मेरी बातचीत हो रही है। अखिलेश यादव के साथ बैठक में इन पर आगे चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि छोटी पार्टियां चुनाव में खुद जीत हासिल नहीं कर सकतीं, लेकिन किसी को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनके मुताबिक, कुछ छोटे दल कांग्रेस में विलय कर चुके हैं, जबकि कुछ ने पार्टी को पूर्ण समर्थन देने का वादा किया है।
मायावती और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के विपक्षी गठबंधन के साथ आने की संभावना पर गौतम कहते हैं कि जो लोग संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय में विश्वास रखते हैं तथा तानाशाही से मुक्ति चाहते हैं, उनका ‘इंडिया’ गठबंधन में स्वागत है। उन्होंने इतना जरूर कहा कि मायावती को इस बात पर जरूर विचार करना चाहिए कि देश सर्वोपरि है।देश और संविधान से बढ़कर कुछ नहीं है।
समाजवादी पार्टी ने भी सामाजिक न्याय और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के तहत अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं, हालांकि सीट बंटवारे के अंतिम स्वरूप पर अभी विचार-विमर्श बाकी है।
उधर, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी सतीश चंद्र मिश्रा को लेकर बड़ा फैसला किया है. बीते हफ्ते मिश्रा के भांजे अनंत मिश्रा उर्फ अंटू को पार्टी से निष्कासित करने के मायावती के फैसले के बाद सतीश चंद्र मिश्रा को लेकर भी कई कयास लगाए जा रहे थे. इन कयासों पर मायावती के फैसले से विराम लग गया है।
सोशल मीडिया साइट एक्स पर मायावती ने एक बयान में लिखा कि- बहुजन समाज पार्टी के काफी लम्बे अरसे से चले आ रहे राष्ट्रीय महासचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता व बसपा शासनकाल में यूपी के महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश बार काउन्सिल के कई बार अध्यक्ष तथा बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बसपा के राज्यसभा सांसद रहे सतीश चन्द्र मिश्र को, पार्टी द्वारा लीगल व मीडिया आदि के साथ-साथ अब चुनाव आयोग सम्बंधी कार्यों की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी है, इसलिए मायावती का गठबंधन में शामिल होना मुश्किल है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



