मोहन की लस्सी पाॅलिटिक्स

राजनीति में अब जनसेवा उतना महत्व नहीं रखती जितना तिकड़म और कलाकारी चर्चा का विषय बन जाती है। मीडिया भी ऐसी बातों को खूब उछालती है। याद कीजिए सन् 2014 का ऐतिहासिक साल जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की केन्द्रीय राजनीति की कमान संभाली थी। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने व्यंग्य किया था कि चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। इसी बात को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बना दिया था और जगह-जगह चाय पर चर्चा होने लगी थी। भारत मंे लाखों की संख्या मंे चाय बेचने वाले तो मोदी के मुरीद बन ही गये थे। इसी तरह पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव मंे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक दुकान पर खड़े होकर भूजा (लाई-चना) खाया। पश्चिम बंगाल में लाई को मूढ़ी कहा जाता है। इसकी मीडिया में जमकर चर्चा हुई और पश्चिम बंगाल मंे भी भाजपा ने अपनी सरकार बना ली है। अभी कुछ दिन पहले (22 अगस्त, 2026) यह खबर मिली कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने टीकमगढ़ दौरे के समय सड़क के किनारे एक लस्सी वाले की दुकान पर अपना काफिला रुकवाया और स्वयं लस्सी पी तथा नेताओं व अफसरों (काफिले में शामिल) को भी लस्सी पिलाई। मीडिया मंे इसकी खूब चर्चा हुई। लस्सी वाले तो खुश ही हो रहे होंगे। राज्य मंे इसे मोहन यादव की लस्सी पाॅलिटिक्स बताया जा रहा है। राजनीति का यह नया युग है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का टीकमगढ़ दौरा उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब उन्होंने सड़क किनारे एक लस्सी की दुकान देखकर अपना काफिला रुकवा दिया। मुख्यमंत्री गाड़ी से उतरे, दुकान पर पहुंचे और लस्सी का स्वाद चखा। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने साथ मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और अधिकारियों को भी लस्सी पिलवाई। लस्सी का स्वाद मुख्यमंत्री को इतना पसंद आया कि उन्होंने दुकानदार की खुलकर तारीफ की और जाते समय 500 रुपये देकर उसका हौसला भी बढ़ाया। मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर आसपास मौजूद लोग मोहन यादव की तारीफ अब भी कर रहे हैं।
लस्सी पीने के बाद मुख्यमंत्री ने दुकान संचालक जय सिंधी से बातचीत भी की और पूछा कि रोजाना कितनी लस्सी बिक जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टीकमगढ़ की लस्सी का स्वाद बेहद अच्छा है। उनकी इस तारीफ से दुकानदार और वहां मौजूद लोग काफी खुश नजर आए। लस्सी पीने के बाद मुख्यमंत्री दुकानदार को उसके पैसे देने लगे तो दुकानदार ने पैसे लेने से मना कर दिया। हालांकि आसपास मौजूद लोगों ने समझाया कि यह उसकी मेहनत की कमाई है और इसे स्वीकार करना चाहिए। इसके बाद दुकानदार ने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए 500 रुपये रख लिये।
मुख्यमंत्री का यह सहज और सामान्य व्यवहार अब टीकमगढ़ में चर्चा का विषय बना हुआ है। सड़क किनारे एक छोटी सी दुकान पर रुककर स्थानीय स्वाद का आनंद लेना और दुकानदार से आत्मीयता के साथ बातचीत करना लोगों को काफी पसंद आया। मुख्यमंत्री की इस पहल को स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों ने भी सराहा।
इस प्रकार पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारग्राम में एक स्थानीय दुकान पर रुककर प्रसिद्ध बंगाली स्ट्रीट फूड झालमूढ़ी (मूढ़ी) खाई थी। उन्होंने दुकानदार से झालमुड़ी बनवाई, उसके 10 रुपये दिए और दुकानदार से हल्की-फुल्की बातचीत भी की। उनका यह झालमुड़ी खाने का अंदाज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।सोशल मीडिया पर इस वीडियो को करोड़ों बार देखा गया और यह बंगाल के स्थानीय जनमानस से जुड़ने का एक प्रतीक बन गया।तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे एक राजनीतिक ड्रामा और प्रायोजित प्रचार बताया था बाद में एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने तंज कसते हुए कहा था, झालमूढ़ी मैंने खाई, लेकिन झाल (मिर्च/जलन) टीएमसी को लगी है
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी की जीत के लिए पीएम मोदी ने मोर्चा संभाल लिया था। पीएम मोदी ने बंगाल के कई हिस्सों में रैलियां कीं। इस दौरान पीएम मोदी का अनूठा अंदाज सामने आया। पीएम मोदी ने झारग्राम में झालमूढ़ी खरीदी। उन्होंने दुकानदार को 10 रुपये भी दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अनूठा अंदाज सामने आया है। पीएम मोदी ने झारग्राम में झालमूढ़ी का मजा लिया। वह एक स्थानीय दुकान पर पहुंचे और आवाज लगाकर कहा कि भाई मुझे अच्छा बाला झालमुढ़ी खिलाओ। दुकानदार ने पूछा कि सर प्याज खाते हैं तो पीएम मोदी ने कहा हां बस प्याज खाता हूं। बस दिमाग नहीं खाता हूं। पीएम मोदी ने इसके बाद दुकानदार को 10 रुपये भी दिए। दुकानदार ने जब रुपये लेने से मना किया तो पीएम मोदी ने कहा नहीं ऐसा नहीं। पीएम मोदी ने इसका वीडियो भी साझा किया है। यह वीडियो सुर्खियों में आ गया है। कुछ ही समय में मिलियन व्यूज को पार कर गया है। पश्चिम बंगाल में चटपटे स्वाद वाली झालमुड़ी काफी लोकप्रिय है। इस झाल मूरी भी कहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करके लिखा कि मैंने पश्चिम बंगाल भर में फैली चार जनसभाओं से भरे एक व्यस्त रविवार के बीच, झारग्राम में कुछ स्वादिष्ट और मसालेदार मुरमुरे का लुत्फ उठाया। पीएम मोदी ने उस दिन को पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ प्रचार किया था। उन्होंने राज्य के बिष्णुपुर, झारग्राम और फिर मेदिनीपुर में सभाओं को संबोधित किया था।
पश्चिम बंगाल में तीखी और चपपटी झालमुढ़ी खूब खाई जाती है। कुरकरे मुरमुरे (लाई) में बारीक कटे प्याज, टमाटर, उबले आलू, हरी मिर्च, भुनी मूंगफली, चनाचूर मिक्सचर, सरसों का तेल, नींबू का रस और चाट मसाला अच्छी तरह मिलाया जाता है। कुछ स्थानों पर इसमें स्वाद के अनुसार थोड़ा बदलाव भी किया जाता है। पीएम मोदी ने जब झारग्राम में झालमुड़ी खरीदी तो दुकानदार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पीएम मोदी ने सदरी की जेब से निकालकर 10 रुपये भी दुकानदार को दिए। दुकानदार ने पीएम मोदी द्वारा दिए गए नोट खुशी से लिया और माथे से लगा लिया।
अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने ठीक उसी अंदाज मंे सड़क के किनारे लस्सी पी है और उसकी भी चर्चा खूब हो रही है। राज्य में चुनाव भले नहीं हो रहे लेकिन तैयारी तो चल ही रही है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



