लेखक की कलम

लखनऊ मेयर का सटीक फैसला

महानगरों में महापौर अर्थात मेयर की भूमिका बहुत व्यापक होती है। उनका चुनाव सभासदों के माध्यम से भले ही होता हो लेकिन मेयर को न सिर्फ लाखों लोगों की सुख-सुविधा का ध्यान रखना पड़ता है बल्कि बाहर से आने वाले देशी-विदेशी मेहमानों के सामने महानगर की छवि भी प्रस्तुत करनी होती है। मेयर के पास प्रतीक रूप में नगर की चाबी होती है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेयर का दायित्व सुषमा खर्कवाल संभाल रही हैं। उनकी नगर निगम टीम ने शहर की अवैध डेयरियों के खिलाफ अभियान चलाया। कुछ दबंगों ने इसका विरोध करते हुए नगर निगम कर्मियों को घायल कर दिया। मेयर ने इसे गंभीरता से लेते हुए सैकड़ों की संख्या में भैंस पकड़वाकर नीलाम करवा दीं। कुछ सभासदों ने भी नीलामी का विरोध किया था लेकिन मेयर सुषमा खर्कवाल ने अपने कदम पीछे नहीं हटाए। अवैध डेयरी से जनता को परेशानी होती है और मेयर का दायित्व है कि महानगर की जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस नीलामी से नगर निगम के खजाने में लाखों रूपये भी आ गये। सबसे बड़ी बात यह है कि जब सरकार ने डेयरी उद्योग को प्रोत्साहन दे रखा है, तब अवैध रूप से इस धंधे को लोग
क्यों चला रहे हैं? इतना ही नहीं
माफियाओं के नाम पर धमकी भी देते हैं। उत्तर प्रदेश में सरकार डेयरी बिजनेस पर 11.80 लाख रुपये की सब्सिडी दे रही है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारा इलाके में भैंसों को लेकर हुए विवाद पर समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल की ओर से लगाए गए आरोपों पर मेयर सुषमा खर्कवाल ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, अखिलेश यादव मानवता दिखाएं, एक शब्द जवानों के लिए भी बोलें। आपको मानवता सिर्फ एक धर्म में दिखता है। मेयर ने कहा, मेरे कर्मचारियों पर हमला हुआ है। मैं नगर निगम की मुखिया हूं, मेरे कर्मचारियों पर जब हमला होगा तब-तब सामने आऊंगी। उन्होंने कहा, अतीक अहमद के रिश्तेदार कहकर कर्मचारियों को धमकाया जाता है। गलत काम करने वाले जिसके भी रिश्तेदार हों, नियम-कायदे से सब चलेगा।
लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र में पशुओं को अवैध रूप से पाला जा रहा था। बीते दिनों सूचना मिलने पर नगर निगम की कैटल कैचर टीम पशुओं को पकड़ने के लिए मौके पर पहुंची, जहां पशुपालकों ने उनपर हमला कर दिया था। लाठी-डंडों से हमला कर दिया और टीम और सरकारी वाहनों पर पथराव शुरू कर दिया गया। हमले में नगर निगम के तीन कर्मी और बुद्धेश्वर चैकी प्रभारी विनय पटेल घायल हो गए थे। चैकी प्रभारी के सिर में गंभीर चोट आई थी। पथराव में नगर निगम के चार सरकारी वाहनों के आगे के शीशे भी टूट गए थे। समाजवादी पार्टी मीडिया सेल के ऑफिशियल एक्स हैंडल से कुछ वीडियोज शेयर करते हुए मेयर पर गंभीर आरोप लगाए गए। इस पोस्ट में लिखा गया, लखनऊ की मेयर महोदया भ्रष्टाचार के मामलों में चैतरफा घिर चुकी हैं, तो उन्होंने अपना आखिरी अस्त्र हिंदू मुसलमान चलाया है और हिंदू मुसलमान का राग अलाप कर भैंस डेरी पर कार्यवाही कर के पैसा वसूली की योजना बनाई है। ऐसी सूचना है कि जब्त की गई भैंसों को छोड़ने की एवज में प्रति भैंस 1 लाख रूपये की घूस मेयर महोदया की तरफ से डेरी संचालकों से मांगी गई है।
सपा के इन आरोपों पर मेयर सुषमा खर्कवाल ने जवाब दिया। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा, आपको मानवता सिर्फ एक धर्म में दिखती है? जो भैंस पाल रहे हैं, उनके लिए मानवता दिखा रहे हैं, एक शब्द उन जवानों के लिए भी बोलें जो पीटे गए हैं। वहीं, एक लाख रुपये घूस मांगने के आरोपों पर कहा कि लिखकर बताएं कि क्या भ्रष्टाचार है, जो आरोप लगा रहे हैं। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच लखनऊ नगर निगम ने 243 भैंसों की नीलामी की है। इन भैंसों से नगर निगम को कुल 58,89,000 रुपये की कमाई हुई है। यह नीलामी सोमवार सुबह 11 बजे शुरू हुई और दोपहर करीब 1 बजे तक चली। एसपी यूथ ब्रिगेड और चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। एसपी कार्यकर्ताओं का आरोप था कि नीलामी के लिए लखनऊ के बाहर से लोग आए थे, जिनमें कई कसाई भी शामिल थे। हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने दखल दिया। मामला बढ़ने के बाद, लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक अरमान खान मौके पर पहुंचे। वे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया, उन्हें एक-एक करके बस में चढ़ाया और इको गार्डन ले जाया गया। वहीं, विधायक अरमान ने अतिरिक्त नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव को एक पत्र सौंपकर नीलामी रोकने की मांग की। सब-इंस्पेक्टर पर हमले के बाद, अवैध डेयरियों से जब्त की गई 243 भैंसों की नीलामी की गई।
समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल से किए गए पोस्ट में लिखा गया, अखिलेश यादव ने लखनऊ के बुद्धेश्वर में नगर निगम द्वारा पशुपालकों की 350 भैंसे जब्त किए जाने के मामले में पीड़ित पशुपालकों से मुलाकात की और उनकी हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। पशुपालकों के साथ अमानवीय व्यवहार एवं शोषण हो रहा है, प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए पीड़ितों का उत्पीड़न कर रहा है। इस अन्याय को बंद करे सरकार। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी बिना इजाजत सड़क जाम करने और नगर निगम ऑफिस परिसर में सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। हजरतगंज पुलिस स्टेशन के लालबाग आउटपोस्ट इंचार्ज प्रदीप कुमार की ओर से दर्ज कराई गई इस एफआईआर में सपा कार्यकर्ता अनीस राज और 10 अन्य लोगों के साथ-साथ 50 अज्ञात कार्यकर्ताओं को भी नामजद किया गया है। पुलिस ने इस मामले में अनीस राज को मुख्य आरोपी बनाया है। पुलिस का कहना है कि यह कृत्य सार्वजनिक शांति भंग करने, अवैध जमावड़ा लगाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने की श्रेणी में आता है। प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई।
ध्यान रहे मिनी नंदिनी योजना के तहत 10 गायों की डेयरी लगाने पर
कुल 23.60 लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें सबसे खास बात यह है कि सरकार कुल लागत का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 11.80 लाख रुपये की बंपर सब्सिडी देती है। बाकी बचे 50 फीसद हिस्से में से आवेदक को केवल 15 फीसद पैसा यानी लगभग 3.54 लाख रुपये अपनी जेब से लगाना
होता है।
बाकी 35 फीसद रकम के लिए बैंक से आसानी से लोन मिल जाता है। यह सब्सिडी सीधे पशुपालक के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए दो बार में ट्रांसफर की जाती है 25 फीसद राशि शेड और इंफ्रास्ट्रक्चर बनने के बाद और 25 फीसद गायें खरीदने के बाद। इस योजना का फोकस सिर्फ भारतीय यानी देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने पर है। इसमें साहीवाल, गिर और थारपारकर जैसी ज्यादा दूध देने वाली गायों की यूनिट शुरू की जा सकती है। नियम के मुताबिक पशुपालक को यह गायें उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त ब्रीडिंग ट्रैक्ट या फिर दूसरे राज्यों के मान्यता प्राप्त ब्रिडर्स से खरीदनी होंगी।
इसके साथ ही गायें पहली या दूसरी बार मां बनी हों और बच्चे को जन्म दिए 45 दिनों से ज्यादा का समय न हुआ हो। इसके अलावा सभी खरीदी गई गायों की ईयर-टैगिंग और इंश्योरेंस कराना पूरी तरह जरूरी रखा गया है जिससे किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके। इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहले आवेदक के पास गाय या भैंस पालन का कम से कम 3 साल का एक्सपीरियंस होना चाहिए जिसे चीफ वेटरनरी ऑफिसर से वेरिफाई कराया गया हो। डेयरी शेड और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए 0.20 एकड़ जमीन और हरा चारा उगाने के लिए कम से कम 0.80 एकड़ जमीन होना जरूरी है। यह जमीन आपकी खुद की, खानदानी या फिर 7 साल के रजिस्टर्ड लीज पर ली गई हो सकती है। इसके बावजूद कुछ लोग अवैध रूप से डेयरी चला रहे हैं। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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