
राजनीति में बहुत बातें खुलकर नहीं कही जातीं लेकिन उनके संकेत साफ-साफ दिखाई पड़ते हैं। अगले साल के प्रारम्भ मंे ही उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों मंे विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश है जहां लगातार 10 वर्षों से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भगवा सरकार चल रही है। अब तीसरी बार लगातार सरकार बनाने के लिए भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार, जिनमें पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और बीएल संतोष भी शामिल हैं, लखनऊ का दौरा कर चुके हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भी यूपी दौरा इसी परिप्रेक्ष्य में निर्धारित था। इसलिए 30 अक्टूबर को लखनऊ मंे अमित शाह ने यूपी कार्यकर्ताओं की बैठक में जो कहा, उससे राजनीति गलियारे मंे चर्चा होना स्वाभाविक है। इससे पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और बीएल संतोष ने योगी के नेतृत्व को ही हरी झंडी दी थी लेकिन अमित शाह ने यूपी मंे भाजपा की सरकार को अंगद का पांच जरूर कहा लेकिन योगी के नेतृत्व का कोई जिक्र नहीं किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अमित शाह ने तारीफ जरूर की और उनकी सरकार के कामकाज को भी सराहा लेकिन नितिन नवीन की तरह योगी के नेतृत्व मंे ही हैट्रिक लगने की बात नहीं कही। राजनीतिक जानकारों के अनुसार हाल ही सम्पन्न हुए विधान परिषद के चुनावों मंे राज्य की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) की सफलता अमित शाह को अखर गयी है। भाजपा ने हालांकि अपनी सीटें बरकरार रखीं और सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हैं लेकिन प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में सपा के उम्मीदवारों का जीतना पार्टी के लिए चिंता का कारण माना जा रहा है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस पर टिप्पणी की है कि समाजवादी पार्टी का खाता वहां भी खुल गया जहां नहीं खुलना चाहिए। इस टिप्पणी से वह क्या कहना चाहते हैं, इस पर भी चर्चा हो रही है।
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी के सीनियर नेताओं ने अभी से मोर्चा संभाल लिया है। लखनऊ में 30 अक्टूबर को आयोजित बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया। अमित शाह ने कहा कि यूपी में बीजेपी अंगद का पैर है, जहां तीसरी बार राज्य में कमल खिलेगा। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर भी सीधा निशाना साधा और संसद में बहस की खुली चुनौती दी है। अमित शाह के लखनऊ दौरे के बाद यूपी से दिल्ली तक सियासी पारा गरमा गया है।
यूपी कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने कार्यकर्ताओं में जोश फूंकते हुए कहा उत्तर प्रदेश में भाजपा की स्थिति अंगद के पैर जैसी है, जिसे कोई हिला नहीं सकता। उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में तैयार रहने के लिए कहा और कार्यकर्ताओं को अर्जुन की तरह केवल मछली की आंख यानी आने वाले चुनावों में जीत पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। चुनाव के लिए तैयार रहना है। अमित शाह ने एक तरह से लखनऊ से कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में तैयार रहने के लिए कहा है। अमित शाह ने सीएम योगी की तारीफ करते हुए कहा यूपी में माफिया खत्म हो चुके हैं, इसके लिए उनको बधाई है। पीएम मोदी ने फंड देने में कोई कमी नहीं की है और योगी ने उसे जमीन पर उतारने में कोई कमी नहीं की है।
अमित शाह ने इस दौरान विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष की तरफ से चुनाव आयोग और ईवीएम पर उठाए जाने पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी को चैलेंज करते हुए कहा जब आप मैच हार जाते हैं, तो अंपायर पर दोष मढ़ने लगते हैं कि वोट चोरी हो गई, लेकिन मैं खुली चुनौती देता हूं कि भाजपा चुनाव आयोग और मतदान प्रक्रिया को लेकर संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार इसके लिए विशेष सत्र बुलाने को भी राजी है, जहां विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब दिया जाएगा। बीजेपी कार्यकर्ताओं से अमित शाह ने कहा 2014 में हमारे केवल 44 विधायक थे, बहुत निराशा थी। मैं तहसील तक गया। एक बार संगठन ठीक हो गया तो 2014 लोकसभा चुनाव में यूपी में 41 प्रतिशत वोट के साथ 73 सीट जीतीं। 2017 में नोटबंदी हुई थी तो अखिलेश को रात भर नींद नहीं आई थी। हमने 40 प्रतिशत वोट लेकर 2017 में 312 सीट जीती थीं। अमित शाह ने कहा यूपी में 30 अक्टूबर का बड़ा योगदान है। आज के दिन 1990 अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं। मैं पूछना चाहता हूं कि आप किस मुंह से सरकार बनाने की बात करते हैं। अमित शाह ने कहा कि देश में बीजेपी का विस्तार हो रहा है। गुजरात, हरियाणा, अरुणाचल और असम में कई बार कमल खिलने के बाद, भाजपा ने ओडिशा में बहुमत की सरकार बनाई और बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री देकर इतिहास रचा है। अब पूरे देश में भगवा का परचम लहरा रहा है।
अब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की समाजवादी पार्टी (सपा) का खाता वहां भी खुल गया, जहां नहीं खुलना चाहिए था। टिप्पणी पर गौर करें। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों पर यह प्रतिक्रिया राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दी है। मौर्य ने माना कि भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद थी कि वह पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पार्टी नतीजों की समीक्षा करेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर बीते 23 अक्तूबर को मतदान हुआ, उनमें छह सीटों पर बीजेपी और पांच पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है। सीटों की संख्या के लिहाज से बीजेपी आगे रही, लेकिन लखनऊ की स्नातक सीट पर हार, आगरा की शिक्षक सीट पर सपा की जीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा के कब्जे ने इन नतीजों को राजनीतिक रूप से अहम बना दिया है। विधान परिषद की 11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी थीं। ये सीटें थीं- लखनऊ स्नातक, लखनऊ शिक्षक, आगरा स्नातक, आगरा-अलीगढ़ शिक्षक, मेरठ स्नातक, मेरठ शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक, इलाहाबाद-झांसी स्नातक, वाराणसी स्नातक और वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र। सन् 2020 में इन 11 सीटों के चुनाव में बीजेपी ने छह, समाजवादी पार्टी ने तीन और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, इस बार बीजेपी की कुल सीटें तो छह ही रहीं, लेकिन सपा तीन से बढ़कर पांच सीटों पर पहुंच गई। समाजवादी पार्टी ने लखनऊ स्नातक, आगरा-अलीगढ़ शिक्षक, वाराणसी स्नातक, वाराणसी शिक्षक और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर जीत दर्ज की है। वहीं, बीजेपी ने लखनऊ शिक्षक, आगरा स्नातक, मेरठ स्नातक, मेरठ शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट अपने नाम की हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



