पोप ने अमेरिकी चुनाव में मतदान कर रचा इतिहास

वेटिकन सिटी। पोप लियो-14 ने इतिहास रच दिया है। वह अमेरिकी चुनाव में मतदान करने वाले दुनिया के पहले पोप बन गए हैं। वेटिकन ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। शिकागो में जन्मे पोप लियो ने 3 नवंबर को होने वाले अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के लिए डाक के जरिए अपना वोट डाला है। वेटिकन के मुताबिक, पोप नागरिकों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को अपना अधिकार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी मानते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने अमेरिकी नागरिक के रूप में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। वेटिकन के प्रेस कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि पोप लियो-14 ने अमेरिकी नागरिक होने के नाते जब-जब मतदान करने की पात्रता हासिल की, तब-तब अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस बार भी उन्होंने अपनी पुरानी परंपरा को जारी रखते हुए शिकागो में डाक मतपत्र (मेल-इन बैलेट) के जरिए वोट डाला। पोप लियो का नाम पहले रॉबर्ट प्रीवोस्ट था। वेटिकन न्यूज के मुताबिक, पोप ने दक्षिण अमेरिका के पेरू में रहने के दौरान भी पात्र होने पर हर बार मतदान किया था। वेटिकन के बयान में कहा गया, पवित्र धर्मगुरु का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हिस्सा लेना हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है।
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान होगा। प्रतिनिधि सभा के सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है। इसके अलावा अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर भी चुनाव कराए जाएंगे। वेटिकन न्यूज के मुताबिक, इन चुनावों में 36 राज्यों के गवर्नर भी चुने जाएंगे। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों और स्थानीय निकायों के कई प्रतिनिधियों के लिए भी मतदान होगा। अमेरिका के चुनावी नियमों के तहत विदेश में रहने वाले योग्य अमेरिकी नागरिकों को भी मतदान का अधिकार है। इसी तरह अपने पंजीकृत मतदान केंद्र से दूर तैनात सैन्यकर्मी भी अनुपस्थित मतपत्र (एब्सेंटी बैलेट) के जरिए वोट डाल सकते हैं। (हिफी)



