अपनी नब्ज को लेकर भी अमिताभ ने किया मजाक

कुछ साल पहले कौन बनेगा करोड़पति 13 के एक एपिसोड में एक मजेदार घटना देखने को मिली। शो के शानदार शुक्रिया वीक के दौरान कॉमेडियन मनीष पॉल, और टीवी एक्ट्रेस अदिति गुप्ता, दिशा परमार और चांदनी शर्मा गेस्ट बनकर पहुंचे थे।
अदिति ने अमिताभ बच्चन की कलाई पकड़कर नब्ज टटोलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कुछ फील नहीं हुआ। उन्हें लगा कि शायद उनसे गलती हो रही है, इसलिए उन्होंने पहले मनीष पॉल की नब्ज चेक की, जो बिल्कुल नॉर्मल थी। इसके बाद उन्होंने फिर अमिताभ की कलाई पकड़ी, लेकिन तब भी उन्हें नब्ज नहीं मिली। हैरान होकर उन्होंने पूछा, इनकी तो आ रही है, आपकी पल्स क्यों नहीं आ रही? इस पर अमिताभ बच्चन ने अपने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, हमारी जा रही है, इसलिए नहीं आ रही है। उनकी इस बात को सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े। यही उनका अंदाज है, जो सीरियस माहौल को भी लाइट और हैप्पी बना देता है।
साल 1982 में फिल्म कुली की शूटिंग के दौरान हुए गंभीर हादसे ने अमिताभ बच्चन की जिंदगी बदल दी थी। इस हादसे का जिक्र उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति 13 के एक एपिसोड में किया था। अमिताभ बच्चन ने बताया था कि उनकी कलाई पर अब नब्ज महसूस नहीं होती। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा, 1982 में कुली की शूटिंग के दौरान मुझे चोट लगी थी। मुझे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और डॉक्टरों ने मुझे क्लीनिकली डेड तक घोषित कर दिया था। बाद में मुझे फिर से बचाया गया। उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को उनके शरीर पर कई जगह चीरे लगाने पड़े थे। अंदर जमा खून निकालने के लिए हर आधे घंटे में उनकी कलाई के पास भी कट लगाया जाता था। लगातार ऐसा होने की वजह से उस कलाई की नसों पर असर पड़ा और समय के साथ वहां नब्ज महसूस होना बंद हो गई। अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में कहा, ष्अब मेरी नब्ज सिर्फ गर्दन में महसूस होती है।ष् लेकिन, ष्वहां छूने नहीं दूंगा मैं।ष् 26 जुलाई 1982 को बेंगलुरु यूनिवर्सिटी कैंपस में एक्टर पुनीत इस्सर के साथ अमिताभ का एक फाइट सीन शूट हो रहा था जिसमें पुनीत इस्सर और अमिताभ के बीच लड़ाई हो रही थी। सीन के दौरान अमिताभ बच्चन को पुनीत इस्सर के पंच से बचते हुए पीछे रखी एक टेबल पर गिरना था। टाइमिंग थोड़ी गड़बड़ होने के कारण पुनीत इस्सर का मुक्का सीधा उनकी पसलियों पर लगा और गिरते समय टेबल का नुकीला किनारा सीधे उनके पेट पर जा लगा जिसकी वजह से इंटरनल ब्लीडिंग होने लगी। उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि कुछ देर के लिए उन्हें क्लीनिकली डेड घोषित कर दिया गया था। बाद में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में लंबे इलाज के दौरान उनकी जान बचाई गई। इस हादसे के बाद अमिताभ को करीब 200 ब्लड डोनर्स ने 60 बोतल खून दिया गया। बाद में पता चला कि डोनर्स में से एक हेपेटाइटिस-बी वायरस से संक्रमित था। अमिताभ बच्चन इस हादसे से तो उबर गए, लेकिन साल 2000 में उन्हें पता चला कि उसी संक्रमण की वजह से उन्हें लिवर सिरोसिस हो गया है। इस बीमारी के कारण उनके लिवर का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो चुका था। (हिफी)



