अखिलेश की चुनावी रणनीति

समाजवादी पार्टी (सपा) को सत्ता-संघर्ष में मजबूत महारथी बनाने के लिए अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति सफल हो रही है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों के नतीजों ने समाजवादी पार्टी के खेमे में नया उत्साह भर दिया है। यह ऊर्जा आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव मंे एक तरफ भाजपा के लिए कड़ी चुनौती प्रस्तुत करेगी तो वहीं कांग्रेस को सीटों की सौदेबाजी करने से रोकेगी। इस चुनाव में सपा का प्रदर्शन केवल पार्टी के ग्राम स्तर से लेकर प्रदेश स्तर के कार्यकर्ताओं का सिर्फ मनोबल ही नहीं बढ़ा रही है बल्कि यह संदेश भी दे रहा है कि अखिलेश यादव संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने की क्षमता रखते हैं। उनकी सटीक रणनीति चुनावी जंग में विजय हासिल कर सकती है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों मंे जोर-शोर से जुटी सपा ने एमएलसी चुनाव में अपनी मुख्य प्रतिद्वन्द्वी भाजपा को उसी की चुनावी कार्यशैली से सीधी टक्कर दी और लगभग बराबरी का मुकाबला किया है। अब बरेली से भाजपा के दिग्गज नेता रहे धर्मेन्द्र कश्यप को सपा से जोड़ा है और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर से विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी भी अभी से घोषित कर दिया है। अखिलेश यादव अब जिताऊ उम्मीदवार उतारने की रणनीति से भाजपा को पछाड़ना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी में उत्साह बढ़ा है। राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में सपा के कार्यकर्ता व नेताओं ने जमकर पोस्टर लगाए हैं लेकिन इन सबमें खास एक पोस्टर है, जिस पर लिखा है, ‘अयोध्या जीते अवधेश पासी, आशुतोष, लालबिहारी जीते काशी।’ इसके अलावा पोस्टर में लिखा है कि पीडीए का संदेश, 2027 में आ रहे अखिलेश। बता दें कि काशी में दोनों सीटें जीतने के बाद सपा में खुशी का माहौल है। अमेठी के नेता जयसिंह प्रताप यादव ने सपा मुख्यालय पर होर्डिंग लगवाया है।
समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में विजयी सपा उम्मीदवारों को बधाई दी है। इसके साथ ही, उन्हें जीत पर हो-हल्ला करने या जुलूस नहीं निकालने की हिदायत भी दी। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में लिखा कि हो-हल्ला ना करें और जुलूस नहीं निकालें, जिससे भाजपा के लोगों को उसमें घुसकर माहौल को बिगाड़ने का मौका न मिले। हुड़दंग करने का आरोप न लगा पाएं। हमें हर तरह के षड्यंत्र और झूठे आरोपों से बचना है, क्योंकि सामने विधानसभा चुनाव है। भाजपा गुंडागर्दी की साजिश करके कभी भी हमारी छवि बिगाड़ सकती है। हम आप सबका अभिनंदन स्वयं करेंगे, हो सका तो आपके क्षेत्र में आकर करेंगे। इस बीच आप सभी जीते हुए एमएलसी, उन लोगों की लिस्ट बना लीजिए, जिन्होंने इस जीत में आपका समर्थन-सहयोग करके आपको जिताया है। हम ऐसे सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और शुभचिंतकों का भी सम्मान करेंगे।
अखिलेश यादव की यह अपील ऐसे वक्त में आई है, जब वह आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की छवि को लेकर सावधान रहने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। वह अपने कार्यकर्ताओं को समझा रहे हैं कि ऐसा कोई काम नहीं करना है, जिससे उनके विरोधियों को आरोप लगाने का मौका मिले। इस बीच, अखिलेश यादव ने पीडीए में ए को ए फॉर अग्रवाल और ए फॉर अग्रहरि भी बता दिया है। साथ ही, कार्यकर्ताओं को समझा रहे हैं कि जोश में होश ना खोए। अपनी खुशी को शांति से सेलिब्रेट करें ताकि बीजेपी उनकी जीत को गुंडागर्दी ना बताने लगे। इन नतीजों के जरिए बीजेपी जहां अपनी सियासी ताकत दिखाना चाहती है तो दूसरी तरफ अखिलेश पीडीए के दम पर 2027 में सत्ता में वापसी का दावा कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की खंड शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों में से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने छह और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने 5 सीटें जीती हैं। वाराणसी खंड स्नातक सीट पर मतगणना करीब 50 घंटे से अधिक चला। इसके बाद सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने जीत हासिल कर ली है। वाराणसी खंड स्नातक सीट से भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए परोक्ष रूप से अपनी हार स्वीकार करते हुए समर्थन देने वाले मतदाताओं का आभार जताया है। वहीं वाराणसी खंड शिक्षक सीट से सपा के लाल बिहारी यादव विजयी रहे। आगरा खंड शिक्षक सीट से सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल, आगरा खंड स्नातक सीट से भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह और इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक सीट से सपा के डॉ. मानसिंह यादव ने जीत दर्ज की। मेरठ खंड शिक्षक सीट से भाजपा के श्रीचंदर शर्मा, बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक सीट से भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट से भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी विजयी घोषित किए गए। लखनऊ खंड स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह ने जीत हासिल की।
इसी के साथ उत्तर प्रदेश के बरेली मंडल में एक बड़ा राजनीतिक खेल देखने को मिला है। यहां की आंवला लोकसभा सीट से सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप बेटी कीर्ति कश्यप के साथ बीजेपी से अलग होकर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। दिलचस्प बात यह है कि सपा की सदस्यता के साथ ही कीर्ति कश्यप को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बिथरी चैनपुर सीट से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया गया है। अखिलेश यादव ने सबसे पहले अयोध्या सीट पवन पांडे और अब बिथरी से कीर्ति कश्यप को उम्मीदवार घोषित कर अपने पीडीए फॉर्मूले को धार देने की कोशिश की है।
इस फैसले के साथ ही साफ हो गया है कि मामला सिर्फ पार्टी बदलने का नहीं, बल्कि सम्मान और 2027 के विधानसभा चुनाव की पूरी तैयारी का है। इस प्रकार आंवला सीट से पूर्व सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप अब समाजवादी पार्टी के साथ आ गए हैं। लखनऊ पहुंचकर बरेली से आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सपा की सदस्यता ली, जिससे पार्टी को इलाके में नया चेहरा और मजबूत सियासी समीकरण मिला है। पार्टी बदलने की वजह पूछने पर कीर्ति कश्यप ने साफ शब्दों में कहा, ‘कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना जहां सम्मान नहीं, वहां रहना नहीं।’ कीर्ति कश्यप पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बेटी के तौर पर ही जानी जाती हैं। लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद कीर्ति क्षेत्र में कई सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेती रही हैं, लेकिन वहां भी वह पिता के प्रतिनिधि के तौर पर ही पहचान बना पाईं। पिता धर्मेंद्र कश्यप भी कीर्ति को कई कार्यक्रमों में अपने साथ ले जाते रहे हैं। अखिलेश यादव का मानना है कि धर्मेंद्र कश्यप और अन्य नेताओं के आने से बरेली ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और पूरे उत्तर प्रदेश में पार्टी की ताकत बढ़ेगी।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



