नेताओं में हिन्दू विरोध का फैशन

भारत का सनातन धर्म शांति और सद्भाव के मार्ग पर चलना सिखाता है लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं कि कोई उसको अपमानित करे और हिन्दुओं के आराध्य और रीति-रिवाजों की अनर्गल व्याख्या करे। राजनीति में तथाकथित हिन्दू नेता भी अब हिन्दू धर्म की खिल्ली उड़ाने मंे गर्व महसूस करते हैं। इससे उन्हें खबरों मंे जगह मिल जाती है लेकिन जनता के आक्रोश का सामना भी करना पड़ता है। अभी हाल मंे समाजवादी पार्टी के नेता आरके चैधरी ने नया ज्ञान दिया है। वह कहते हैं कि हिन्दुओं के दाह संस्कार से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है क्योंकि शव जलाने से कार्बन मोनोआक्साइड और कार्बन डाईआक्साइड गैसें निकलती हैं। इसी आधार पर वह होलिका दहन को भी रोकना चाहते हैं। उधर, पश्चिम बंगाल मंे ममता बनर्जी की पार्टी के एक नेता ने तो हिन्दू धर्म का इतिहास ही बदल दिया है। वह कहते हैं कि भगवान राम हिन्दू नहीं थे बल्कि मुसलमान थे। ऐसे नेताओं को अपना ज्ञान अपने तक ही सीमित रखना चाहिए। वे सामाजिक सद्भाव तो बिगाड़ ही रहे हैं, साथ ही भाजपा को एक मुद्दा भी पकड़ा देते हैं। पश्चिम बंगाल मंे अगले साल अर्थात् 2026 मंे होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए ममता बनर्जी अपनी पार्टी के नेताआंे की जुबान पर काबू रखवा सकें तो बेहतर होगा। सपा सांसद आरके चैधरी भी विवादित बयान देने में काफी आगे रहे हैं।
वायु प्रदूषण की समस्या के बीच समाजवादी पार्टी के नेता आरके चैधरी ने विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब दाह संस्कार के लिए शवों को जलाया जाता है, तो उसे कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है। इसकी वजह से वातावरण में ऑक्सीजन कम हो जाती है। यहां तक कि होलिका दहन के दौरान भी ऐसा होता है। चैधरी कहते हैं एयर पॉल्यूशन को लेकर हमारा देश गंभीर नहीं है। यह धर्म का मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण का मामला है।सपा सांसद आरके चैधरी ने कहा कि अपने देश में लोग पर्यावरण को लेकर सीरियस नहीं है। होलिका दहन पर करोड़ों जगह एक साथ होलिका दहन होता है। इससे वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड घुलती है। अगर ये चीजें पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं तो दूसरे तरीकों के बारे में सोचना चाहिए। बॉडी को लकड़ी पर जलाने के बजाय और भी तरीके हैं। गौरतलब है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी प्रदूषण को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एक्स पर किए पोस्ट में लिखा, दिल्ली का प्रदूषण अब लखनऊ तक पहुंच गया है। इसीलिए लखनऊ में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच नहीं हो पाया। दरअसल इसकी वजह कोहरा या फॉग नहीं, स्मॉग है। हमने जो पार्क लखनऊ की शुद्ध हवा के लिए बनवाए थे, भाजपा सरकार वहां भी इंवेटबाजी करवाकर उन्हें बर्बाद करना चाहती है। भाजपाई न इंसान के सगे हैं, न पर्यावरण के। मुंह ढक लीजिए कि आप लखनऊ में हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मोहनलालगंज से सपा सांसद आरके चैधरी को नोटिस जारी किया था। सपा सांसद पर जाति-धर्म के आधार पर वोट मांगने का आरोप लगाया गया था।
यह आदेश न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने ज्ञानी की ओर से दाखिल निर्वाचन याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याची के वकील विष्णु शंकर जैन और शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि चुनाव के समय न सिर्फ प्रत्याशी बल्कि उसकी पार्टी के द्वारा भी ‘पीडीए’ शब्द का कई बार प्रयोग किया गया है। याचिका के
माध्यम से यह भी आरोप लगाया गया है कि 12 मई 2024 की चुनाव रैली में मोहनलालगंज में आरके चैधरी ने खुलेआम जाति व धर्म के नाम पर वोट मांगे। इसके साथ ही साथ ये भी बताया गया की सोशल मीडिया साइटों पर भी चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से आरके चैधरी व उनकी पार्टी द्वारा जाति, धर्म व समुदाय के आधार पर वोट मांगे गए।
सोशल मीडिया पर आए दिन नेताओं के ऐसे बयान तेजी से वायरल होते हैं और कई बार यही वीडियो बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस की वजह बन जाते हैं। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों जमकर वायरल हो रहा है। जो पश्चिम बंगाल से आया है। इसमें टीएमसी के एक नेता भगवान श्री राम को मुस्लिम बताते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। यूजर्स की प्रतिक्रियाएं बेहद तीखी हैं। कई लोग इस बयान को आस्था पर हमला बता रहे हैं. तो कुछ यूजर्स ने टीएमसी नेता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तक कर दी है। टीएमसी नेता मदन मित्रा का भगवान श्रीराम को मुसलमान बताने वाला बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर भारी बवाल मच गया। लोगों का मानना है कि यह सिर्फ एक गैर जिम्मेदार टिप्पणी नहीं। बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और धार्मिक भावनाओं का खुला अपमान है। वीडियो वायरल होते ही यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे जानबूझकर किया गया उकसावे वाला बयान बताया। कई लोगों ने कहा कि ऐसे बयान समाज में तनाव फैलाने का काम करते हैं और नेताओं को बोलने से पहले जिम्मेदारी समझनी चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टीएमसी नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी। कुछ यूजर्स ने गुस्से में फांसी की सजा तक की बात कह दी। कामरहाटी के विधायक एक जनसभा को संबोधित कर रहे हैं तभी उन्होंने वचह ज्ञान परोसा।
फिलहाल तृणमूल ने विधायक मदन मित्रा द्वारा भगवान राम पर की गई टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि जब बात मदन मित्रा की हो, तो हम उनके बयानों पर टिप्पणी करने के योग्य नहीं हैं। हमने रामायण पढ़ी है, हम अयोध्या, लंका और सीतामढ़ी के बारे में जानते हैं। बंगाल बीजेपी ने कहा, हमारी संस्कृति और इतिहास का यह निरंतर अपमान कोई जुबान फिसलने वाली बात नहीं है! बल्कि यह अवैध बांग्लादेशियों को एक स्पष्ट संदेश है कि टीएमसी सबसे हिंदू-विरोधी पार्टी है और इसलिए उनके विचारों का प्रतिनिधित्व करती है। भाजपा ने टीएमसी को मित्रा के खिलाफ कार्रवाई करने की चुनौती भी दी। टीएमसी ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि विधायक के करीबी सूत्रों ने दावा किया- यह मनगढ़ंत है। उन्होंने कहा था कि भगवान राम धर्म से ऊपर हैं। इसे जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)


