लेखक की कलम

कांग्रेस व जनसुराज में पक रही खिचड़ी

बिहार विधानसभा चुनाव-2025 मंे भाजपा और जद(यू) ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर 243 सदस्यीय विधानसभा मंे 202 सीटों पर विजयश्री प्राप्त की। इससे मुख्य विपक्षी दल राजद को तो झटका लगा ही, जिसे सिर्फ 25 विधायक मिल पाये, उनसे ज्यादा निराशा चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को मिली है। प्रशांत किशोर ने राज्य मंे अपनी पार्टी-जन सुराज पार्टी की सरकार बनाने की सोच रखी थी। इसीलिए उन्हांेने 238 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। प्रशांत किशोर की पार्टी को एक भी विधायक नहीं मिल पाया। इतना ही नहीं, पहली बार उनकी भविष्यवाणी पूरी तरह झूठी साबित हुई। प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू) को लेकर कहा था कि उसे 20-25 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी। आश्चर्य तब हुआ जब जद(यू) को 85 सीटों पर विजयश्री हासिल हुई। इसी प्रकार कांग्रेस को भी सिर्फ 6 विधायक मिल पाये हैं। गत दिनों (16 दिसम्बर) जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कांगे्रस की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की तो इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। प्रशांत किशोर लगभग सभी राजनीतिक दलों के साथ काम कर चुके हैं। तब वह चुनावी रणनीति तक ही सीमित रहे लेकिन अब प्रशांत किशोर पूरी तरह राजनीति मंे आ चुके हैं तो कांग्रेस और जन सुराज के बीच क्या खिचड़ी पक रही है, उसकी चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि दोनों नेताओं ने इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया लेकिन प्रशांत किशोर कोई खेल खेलने वाले हैं, इसकी पूरी संभावना है। चुनाव के दौरान कांगे्रस और राजद में कई बार तकरार भी देखने को मिली थी। इसके चलते यह मुलाकात महत्वपूर्ण है।
चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) की हाल ही में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी से दिल्ली में हुई मुलाकात की चर्चा के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह मुलाकात बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के कुछ सप्ताह बाद हुई, जब जन सुराज पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था और कांग्रेस का प्रदर्शन भी उम्मीदों से कम रहा था। अब ऐसे में सवाल यह है कि बिहार चुनाव के बाद प्रशांत किशोर किस मिशन में जुटे हैं?
दरअसल प्रियंका गांधी के साथ लगभग 2 घंटे बंद कमरे की लंबी बातचीत ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह चर्चा करने पर मजबूर कर दिया है कि क्या प्रशांत किशोर भविष्य की राजनीति कांग्रेस के साथ मिलकर करने का विचार कर रहे हैं। अब चर्चा तेज हो गयी है कि प्रशांत किशोर प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद क्या कर रहे हैं। क्या प्रशांत किशोर कांग्रेस के साथ किसी सीक्रेट प्लानिंग पर काम तो नहीं कर रहे हैं? बताया जा रहा है कि फिलहाल जनसुराज प्रोफेशनल टीम को भंग कर दिया गया है। जनवरी से इसे फिर से शुरू करने की चर्चा है। ऐसे में प्रशांत अपने खास लोगों के साथ मिलकर ही पार्टी की रणनीतियों को लेकर योजना बना रहे हैं। दरअसल प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की मीटिंग को कांग्रेस में प्रशांत किशोर के संभावित प्रवेश या किसी बड़े राजनीतिक समझौते की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा तो यह भी है कि प्रशांत किशोर कांग्रेस के साथ जुड़कर बिहार में किसी बड़ी योजना पर काम करने में जुट गए हैं। वहीं प्रशांत किशोर की कंपनी बंगाल समेत अन्य राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की मदद भी कर सकती हैं। हालांकि इसको लेकर किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में जन सुराज पार्टी को किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली और अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई। इसे पार्टी की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा के रूप में देखा गया, लेकिन परिणाम बेहद निराशाजनक रहे। चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने खुद चुनाव नहीं लड़ा, पर पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। चुनाव के तुरंत बाद पार्टी का प्रदर्शन और भविष्य की दिशा दोनों ही सवालों के घेरे में हैं। वहीं प्रशांत किशोर की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि प्रशांत किशोर कांग्रेस के साथ मिलकर किसी योजना पर काम कर रहे हैं। जनसुराज के समर्थकों ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो इंटरव्यू भी साझा किया है, जिसमें प्रशांत किशोर ने कहा कि वे अगले 10 साल तक बिहार के लिए काम करना जारी रखेंगे। इस वीडियो में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य सिर्फ चुनाव जीतना नहीं है, बल्कि बिहार को दीर्घकालिक बदलाव के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जब तक बिहार भारत के 10 अग्रणी राज्यों में शामिल नहीं हो जाता, तब तक वह यहीं काम करते रहेंगे। इस बयान को जनसुराज के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जनसुराज पर शेयर किया गया। ऐसे में प्रशांत किशोर के इस स्टेटमेंट से यह तो समझा जा सकता है कि वह फिलहाल बिहार की राजनीति से दूर नहीं जाने वाले हैं। प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रशांत किशोर कांग्रेस के साथ राजनीतिक पारी को लेकर
विचार कर रहे हैं। खासकर बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी मोर्चे को मजबूत करना। कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो रही हैं, लेकिन किशोर और कांग्रेस दोनों तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं
आई है। जन सुराज पार्टी की हार के बावजूद प्रशांत किशोर सक्रिय हैं और राजनीतिक मंच पर अपनी भूमिका को फिर से चर्चा में लाने की ओर काम कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर और गांधी परिवार के रिश्ते नए नहीं हैं। सन् 2021 में जेडीयू से अलग होने के बाद किशोर ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने पार्टी को पुनर्जीवित करने का एक ब्लूप्रिंट रखा था। अप्रैल 2022 में सोनिया गांधी के आवास पर हुई अहम बैठक में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थे। उस समय किशोर कांग्रेस में शामिल होने को तैयार थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें ‘एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप’ का हिस्सा बनने का प्रस्ताव दिया। हालांकि यहीं से बात बिगड़ गई। किशोर ने सीमित भूमिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया और खुलकर कहा कि कांग्रेस को व्यक्ति नहीं, बल्कि नेतृत्व और संरचनात्मक सुधारों की जरूरत है। इसके बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए और किशोर कांग्रेस के मुखर आलोचक बनते चले गए। दिलचस्प यह है कि बिहार चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने न सिर्फ कांग्रेस बल्कि राहुल गांधी की ‘वोट चोरी’ और एसआईआर जैसे मुद्दों को भी चुनावी मुद्दा मानने से इनकार किया था। लेकिन चुनावी नतीजों के बाद उनकी प्रियंका गांधी से मुलाकात ने यह संकेत दिया है कि राजनीतिक संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
कांग्रेस और प्रशांत किशोर, दोनों ही खेमे यह कह रहे हैं कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी लेकिन राजनीति में संयोग कम और संकेत ज्यादा मायने रखते हैं। बिहार में बुरी तरह विफल रहने के बाद प्रशांत किशोर का प्रियंका गांधी से मिलना यह जरूर दिखाता है कि वह अपने राजनीतिक विकल्पों पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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