सचमुच के पृथ्वी पुत्र बनें

प्रकृति के व्यवहार से हम नाराज होते हैं। हमारे देश में तो इतनी ऋतुएं होती हैं जितनी कहीं भी नहीं होतीं। सर्दी, गर्मी और वारिश का भी अपना एक क्रम होता था लेकिन अब आये दिन विक्षोभ का हवाला देकर मौसम विज्ञान बताता है कि गर्मी में सर्दी पड़ेगी और सर्दी के दिनों गर्मी होती है। समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक कचरा हमने ही भरा है। इन दिनों रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध हो रहा है तो ईरान और इजरायल में सीज फायर से पहले भीषण बमबारी हुई। यह सब मौसम का मिजाज बिगाड़ रहे हैं। दूसरी तरफ जंगल काटे जा रहे हैं और जो बचे भी हैं उनमें आये दिन आग लगती है जो महीनों तक बुझ नहीं पाती। व्यक्तिगत स्तर पर भी हम नागरिकों के कर्तव्य भूल गये हैं। हमने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ही देखा कि कोई भी कहीं भी कूड़ा, कचरा फेंक देता है। पवित्र नदियां भी कचरे से पट गयी हैं। पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक का ढेर बढ़ता जा रहा है। इन सभी गलत आदतों को छुड़ाने की सीख देने के लिए ही प्रत्येक 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। इस बार बुधवार 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया पर भी सलाह दी जा रही है। युवाओं को विशेष रूप से इन पर अमल करना चाहिए। हमारे सनातन धर्म में तो पृथ्वी को माता की संज्ञा दी गयी है। इस पृथ्वी माता ने हमको ढेर सारी सुविधाएं दी हैं तो इसकी रक्षा करने का दायित्व हमको निभाना पड़ेगा।
पृथ्वी दिवस हर साल अप्रैल में मनाया जाता है, जो 1970 में शुरू हुए पृथ्वी दिवस आंदोलन की निरंतरता है। यह हमारे ग्रह का जश्न मनाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इससे निपटने के लिए हम जो कदम उठा सकते हैं, उन्हें अपनाने का समय है। पहला पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल, 1970 को मनाया गया, जिसमें 20 मिलियन अमेरिकी देश के औद्योगिक विकास के प्रभाव के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसने आधुनिक पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत को चिह्नित किया और यह आज भी दुनिया के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक है। आज, विश्व भर के 190 से अधिक देशों में 1 अरब से अधिक लोग पृथ्वी माह की गतिविधियों और पहलों में भाग लेते हैं।
प्रत्येक वर्ष परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष विषय चुना जाता है, और 2026 का विषय है, हमारी शक्ति, हमारा ग्रह। आधिकारिक वेबसाइट पर पृथ्वी दिवस 2026 में शामिल होने के कई तरीके बताए गए हैं, जैसे कार्यक्रमों में भाग लेना या अपना कार्यक्रम आयोजित करना, साथ ही पृथ्वी दिवस से संबंधित गतिविधियाँ और संसाधन, जैसे प्रश्नोत्तरी, तथ्य पत्रक आदि। द ग्रेट ग्लोबल क्लीनअप एक विश्वव्यापी अभियान है जो स्थानीय सफाई अभियानों का आयोजन और प्रचार करता है। चाहे आप व्यक्तिगत रूप से या समूह में मदद करना चाहते हों, समान विचारधारा वाले अन्य लोगों के साथ मिलकर समुदाय को स्वच्छ बनाने में अपना योगदान दें। सफाई अभियान पूरे विश्व में साल भर आयोजित होते रहते हैं, और यदि आप चाहें या आपके आस-पास कोई अभियान न हो, तो आप स्वयं भी इसका आयोजन कर सकते हैं। यह पर्यावरण के प्रति अपना समर्थन दिखाने और साथ ही उसे बेहतर बनाने का एक शानदार तरीका है। कार्बन फुटप्रिंट के बारे में तो हम सबने सुना ही होगा, लेकिन हमारे फूडप्रिंट के बारे में क्या? हम जो भी खाना चुनते हैं, उसका असर धरती पर कई तरह से पड़ता है, उत्पादन से लेकर खरीदारी की आदतों, खाने की बर्बादी और भी बहुत कुछ। यह जानने के लिए थोड़ा समय निकालना कि हमारे चुनाव पर्यावरण को कैसे प्रभावित कर रहे हैं, बेहतर बदलाव लाने की दिशा में पहला कदम है।
जलवायु संरक्षण की बात करें तो पेड़ अमूल्य हैं। ये न केवल कार्बन डाइऑक्साइड और प्रदूषकों को अवशोषित करके हमारे आसपास की हवा को शुद्ध करते हैं, बल्कि मिट्टी के कटाव को भी रोकते हैं और वन्यजीवों के फलने-फूलने के लिए आवश्यक आवास प्रदान करते हैं, साथ ही अन्य कई लाभ भी प्रदान करते हैं। पृथ्वी दिवस मनाने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है कि आप अपना एक पेड़ लगाएं? वनीकरण के लिए समर्पित कई गैर-लाभकारी संगठन हैं, जहां आप पेड़ लगाने के लिए दान कर सकते हैं।मधुमक्खियाँ, तितलियाँ और पक्षी, साथ ही कई अन्य कीट, सभी परागणकर्ता हैं और पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अपने बगीचे में परागणकर्ताओं को आकर्षित करना और उनके जीवित रहने में सहायता करना, पृथ्वी के प्रति अपना योगदान देने का एक शानदार तरीका है।
हमारे हैंगिंग प्लांटर्स की बात करें तो, अर्थ मंथ के दौरान हमारे क्राफ्ट्स को आजमाने का इससे बेहतर समय कोई नहीं हो सकता। अपसाइक्लिंग चीजों को नया जीवन देने का एक शानदार तरीका है और हमारे कांच के गमले कैंडल होल्डर , फ्लावर पॉट और कई अन्य चीजों में बदलने के लिए एकदम सही हैं। अगर चीजों को दोबारा इस्तेमाल करना संभव नहीं है, तो अर्थ मंथ आपके नजदीकी रीसाइक्लिंग डिपो जाने का भी एक अच्छा मौका है। हो सकता है आपके पास पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान, प्लास्टिक बैग या बड़ी चीजें हों जिन्हें घर पर रीसायकल करना मुश्किल हो, उन्हें इकट्ठा करें और डिपो में ले जाकर लैंडफिल पर बोझ कम करें।
पृथ्वी माह साल का सिर्फ एक महीना है, लेकिन यह हमें अपनी आदतों पर विचार करने और हर दिन एक अधिक टिकाऊ भविष्य की दिशा में उठाए जा सकने वाले कदमों की याद दिलाता है। हम सभी जो छोटे-छोटे काम करते हैं, उनका हमारे आस-पास की दुनिया पर बड़ा प्रभाव पड़ता है- आप इसमें कैसे योगदान देंगे? पृथ्वी दिवस में लाखों लोग भाग लेंगे और उम्मीद है कि उनमें से कई लोग अपने आस-पास के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए स्वेच्छा से योगदान देंगे। इसमें कूड़ा-कचरा साफ करने से लेकर नए पेड़ लगाने तक कुछ भी शामिल हो सकता है।
पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में लगभग 27,000 से अधिक मलबे के टुकड़े (डेड सैटेलाइट, रॉकेट के हिस्से) 18,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहे हैं। यह अंतरिक्ष कचरा, जो लगातार बढ़ रहा है, उपग्रहों और आने वाले समय में पृथ्वी पर रिहाइशी इलाकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है, जिससे आग के गोले गिरने का जोखिम है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि सैटेलाइट्स का बढ़ता कचरा धरती के लिए खतरा बन सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी अंतरिक्ष मलबे के 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा टुकड़े मौजूद हैं जिनमें प्राकृतिक उल्कापिंड, कृत्रिम वस्तुओं के टूटे टुकड़े और निष्क्रिय उपग्रह शामिल हैं। अमेरिका के यूटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि अंतरिक्ष में काफी अधिक कचरा भर गया है जिसकी वजह से धरती के चारों तरफ शनि जैसे छल्ले का निर्माण करना पड़ेगा। इस छल्ले को बनाने के लिए मैग्नेट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे की वजह से अंतरिक्षयान और सैटेलाइट टकरा सकते हैं। पृथ्वी पर मौजूद प्रदूषण की तरह ही अंतरिक्ष कचरा भी खतरनाक है जो अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष मिशन के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकता है। एक आंकड़े के मुताबिक, बीते 10 साल में अंतरिक्ष में 7,500 मीट्रिक टन कचरे की वृद्धि हुई है। यह अंतरिक्ष में सैटेलाइटों की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है। सबसे पहले अंतरिक्ष में जो कचरा मिला था वह तांबे के सुईयों का एक बंडल था। इसको अमेरिकी सेना ने अतंरिक्ष में भेजा था ताकि अमेरिकी सेना के कम्यूनिकेशन में आ रही समस्या के बारे में पता लगाया जा सके। इसके बाद इस समस्या को दूर करने के लिए अमेरिका ने लाखों की संख्या में तांबे की सुइयों को अंतरिक्ष में भेज दिया। इसको आयनमंडल की विकल्प के रूप में भेजा गया था। इसके बाद से अंतरिक्ष में कचरा लगातार बढ़ रहा है जो पृथ्वी के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। अशोक त्रिपाठी



