लेखक की कलम

भाजपा में ‘नवीन’ युग की शुरुआत

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बन गये हैं। उनको 15 दिसंबर को कार्यकारी
अध्यक्ष बनाया गया था और उनके नाम की घोषणा से सभी चैंक गये थे। उसी समय यह भी कहा जा रहा था कि नितिन नवीन ही पूर्णकालिक अध्यक्ष भी बनेंगे। बाद में जब स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके नाम का प्रस्ताव किया तो हण्ड्रेडवन परसेंट तय हो गया। नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने को दो तरीके से देखा जा रहा है। भाजपा के पक्के अनुयायी तो यही कहेंगे कि यह ऐसी पार्टी है जहां आम कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकता है लेकिन तटस्थ लोग जानते हैं कि भाजपा में वही होता है जो नरेन्द्र मोदी और अमित शाह चाहते हैं। इस कठोर सत्य के साथ ही नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना एक नये युग का संकेत भी देता है। नितिन नवीन ने बहुत से अन्य संभावित अध्यक्षों को साइड लाइन तो नहीं किया है लेकिन ओवर टेक जरूर कर गये हैं। सवाल बरकरार है कि जब अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी इसी उम्र में जनसंघ के अध्यक्ष बने थे तब वे दोनों राष्ट्रीय नेतृत्व की हैसियत से अपने को साबित कर चुके थे।

नितिन नवीन ने भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कुछ किया है और ज्यादा करके दिखाना है। इसलिए नये अध्यक्ष के सामने चुनौतियां गंभीर हैं। इसी साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। नितिन नवीन की पहली परीक्षा इन्हीं चुनावों में होगी।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को पार्टी का 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। बीजेपी के मुख्यालय में उनके नाम का आधिकारिक ऐलान किया गया। नितिन नबीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जिनकी उम्र 45 साल है। वह बिहार के ऐसे पहले नेता हैं, जो इस पद तक पहुंचे हैं। बीजेपी मुख्यालय में नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चयन का आधिकारिक ऐलान किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत बीजेपी के वरिष्ठ नेता, साथ ही बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष भी शामिल हैं।

नितिन नबीन की छवि एक ग्राउंड वर्कर की है और उनकी संगठन में मजबूत पकड़ है। वह 5 बार के विधायक रह चुके हैं। नितिन नबीन का चयन बीजेपी के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। उनकी नेतृत्व क्षमता और ग्राउंड लेवल पर काम करने की छवि के चलते पार्टी के अंदर और बाहर उनके योगदान को सराहा जाता है। बीजेपी का यह कदम खासतौर पर आगामी चुनावों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आज से ठीक 6 साल पहले यानी 20 जनवरी 2020 को जेपी नड्डा को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। अब 2026 में बीजेपी को नया अध्यक्ष मिला है। यह समय बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर असम, बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनावों के मद्देनजर, जहां पार्टी को बड़ी चुनौती का सामना करना है। नितिन नबीन ने अपने अध्यक्ष पद के ऐलान से पहले दिल्ली के विभिन्न प्रमुख मंदिरों में पूजा अर्चना की, जिससे उन्होंने साफ संदेश दिया कि बीजेपी हिंदुत्व की राजनीति करती है और हिंदू पार्टी के कोर वोटर हैं।

उन्होंने सबसे पहले झंडेवालान देवी मंदिर में पूजा की, फिर वाल्मिकी मंदिर में जाकर एससी समुदाय को संदेश दिया। इसके बाद, नबीन ने मंदिर भी गए और अंत में बंगला साहिब गुरुद्वारा में जाकर सिख समुदाय के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।
45 साल के नितिन नबीन के नाम के ऐलान से हर किसी को सरप्राइज मिला था। दिल्ली के सियासी गलियारे में आज सबसे ज्यादा चर्चा नितिन नबीन की थी। कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन दिल्ली पहुंचे। यहां भाजपा मुख्यालय पर अमित शाह, जेपी नड्डा समेत कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद नितिन नबीन ने अपना पद संभाल लिया। पद संभालने के बाद नितिन नबीन का पहला बयान भी सामने आया है।

नितिन नबीन ने कहा-विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व सौंपे जाने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। संसदीय दल के सभी सम्मानित सदस्यों तथा संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं का यह विश्वास मेरे लिए प्रेरणा और उत्तरदायित्व- दोनों है। नितिन नबीन ने आगे कहा-मैं संकल्पबद्ध हूं कि अपनी सम्पूर्ण शक्ति, सामथ्र्य और परिश्रम के साथ कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संगठन को और अधिक सशक्त, संगठित एवं उत्कर्ष की ओर अग्रसर करने का कार्य करूंगा। यह विश्वास है कि हम सब मिलकर सेवा, संगठन और समर्पण के मार्ग पर चलते हुए ‘विकसित भारत’ का मार्ग प्रशस्त करेंगे। नितिन नबीन को अध्यक्ष बनाने की पटकथा पटना में नहीं, बल्कि रायपुर (छत्तीसगढ़) के जंगलों और बूथों पर लिखी गई थी। छत्तीसगढ़ चुनाव में सारे सर्वे कह रहे थे कि बीजेपी चुनाव हारेगी, कांग्रेस छत्तीसगढ़ में फिर से सरकार बनाएगी।

बीजेपी को भी जीत का भरोसा नहीं था तब मोदी ने नितिन नबीन को छत्तीसगढ़ चुनाव का प्रभारी बनाकर रायपुर भेजा था। नितिन नबीन ने हारी हुई बाजी पलट दी। उन्होंने चुनाव लड़ने का तरीका बदला और छत्तीसगढ़ में सरकार बदल गई। कांग्रेस हार गई और बीजेपी की सरकार बन गई। यहां सबसे अहम बात यह है कि नितिन नबीन राष्ट्रीय राजनीति के लिए एकदम ताजा और ऊर्जावान चेहरा हैं, जो कार्यकर्ताओं को बूस्ट अप करने और पार्टी को बूस्टर डोज देने में सक्षम हैं। इसी वजह से वे केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में चढ़ गए। अब नितिन नबीन के नेतृत्व में ही बीजेपी बंगाल का चुनाव लड़ेगी। नितिन नबीन ही बीजेपी को असम, तमिलनाडु और केरल का चुनाव लड़वाएंगे। नितिन नबीन कायस्थ हैं, बिहार में उनकी जाति की आबादी सिर्फ 0.6 फीसद है। भारत में कायस्थ 0.1 फीसद से भी कम है लेकिन पश्चिम बंगाल के कुलीन अभिजात वर्ग में कायस्थ आबादी अच्छी खासी है। बोस, बसु, घोष, मित्रा, गुहा और दत्ता सरनेम वाले लोग बंगाली भद्रलोक का हिस्सा हैं। नितिन नबीन बंगाल के भद्रलोक में बीजेपी की एंट्री कराएंगे।

2024 लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था तब से नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश की जा रही थी। नड्डा 2020 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए थे। पीएम मोदी ने नितिन नबीन के लिए 6 लाइनें लिखी थीं। इन 6 लाइनों में उन्होंने नितिन नबीन की 6 खूबियां गिना दीं। मोदी ने कहा नितिन कर्मठ कार्यकर्ता, युवा और परिश्रमी, संगठन का अनुभव, प्रभावी काम. समर्पण भाव और, विनम्र स्वभाव के नेता हैं। छह अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी बनी और पहले अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी बने। तब बीजेपी कांग्रेस का विकल्प बनने की कोशिश कर रही थी। 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को केवल दो सीटें मिलीं। बीजेपी अब बहुत आगे निकल चुकी है और 45 वर्ष से ज्यादा का सफर तय कर चुकी है। नितिन नबीन का जन्म बीजेपी के जन्म से करीब दो महीने बाद 23 मई 1980 को हुआ था। अब उन्हीं नितिन नबीन के पास बीजेपी की जिम्मेदारी है। नितिन नबीन बीजेपी के अध्यक्ष तब बने हैं, जब बीजेपी ऐतिहासिक रूप से बहुत मजबूत है। आज बीजेपी की 240 लोकसभा सीटें हैं और 21 राज्यों में बीजेपी या उसकी अगुआई वाले गठबधन एनडीए की सरकार है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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