कर्नाटक में भाजपा का दांव पलटा

राजनीति में कभी-कभी धुरंधर भी औंधे मुंह गिर जाते हैं। दक्षिण भारत में भाजपा के साथ कुछ इसी तरह का हो गया है। भाजपा इस समय देश की सबसे ताकतवर पार्टी है। केन्द्र के साथ ही कई राज्यों में उसकी अपनी सरकार है। अभी हाल में पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ममता बनर्जी के बेहद मजबूत किले को धराशायी कर दिया। इतना ही नहीं वहां विधायकों और सांसदों की भगदड़ मच गयी। लगभग डेढ़ दशक तक सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एकदम बिखर गयी है। हालांकि भाजपा ने अपनी तरह से कोई दावा नहीं किया लेकिन टीएमसी से बगावत करने वाले भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की बात कह रहे हैं। इसी प्रकार महाराष्ट्र में वहां की सबसे ताकतवर पार्टी रही शिवसेना को पहले एकनाथ शिंदे ने तोड़ा और भाजपा के साथ सरकार बनायी। अब विधान परिषद चुनाव में विपक्षी दलों के महागठबंधन से 6 प्रत्याशी चुनाव मैदान से पीछे हट गये और सत्तारूढ़ महायुति के प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिये गये। इसके पहले शिवसेना (उद्धव गुट) के 9 में से 6 सांसद बगावत कर भाजपा के साथ जुड़ने का इशारा कर रहे हैं। इन सभी मामलों को आपरेशन लोटश माना जा रहा है लेकिन कर्नाटक में यही आपरेशन रिवर्सगियर में चला गया है। विधान परिषद के चुनाव में भाजपा और जेडीएस के कई विधायकों ने क्रास वोटिंग कर दी। इससे कांग्रेस के सभी पांच उम्मीदवार जीत गये। वहां कुछ दिन पहले ही सिद्धारमैया को हटाकर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया है। डीके शिवकुमार ने भाजपा को इशारों-इशारों में बता दिया है कि अभी कांग्रेस में बहुत दम है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कर्नाटक के मामले को बहुत गंभीरता से लिया है।
विरोधी दलों से सदस्यों के भाजपा के पक्ष में मतदान की खबरें आती रही हैं लेकिन कर्नाटक में कुछ ऐसा हुआ, जिसने भाजपा आलाकमान के कान खड़े हो गये। कर्नाटक में रिवर्स ऑपरेशन लोटस हो गया। कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जेडी(एस) के कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की इस सियासी चाल ने कांग्रेस के सभी 5 उम्मीदवारों को जीत दिला दी। दूसरी ओर एनडीए के सहयोगी जेडी(एस) के उम्मीदवार
को करारी हार झेलनी पड़ी। आखिर क्रॉस वोटिंग कैसे हुई? कौन-कौन
विधायक टूटे? इन सब चीजों की जांच के लिए बीजेपी ने कमेटी गठित कर
दी है।
भाजपा ने कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी विधायकों की कथित क्रॉस-वोटिंग से जुड़े तथ्यों और हालात का पता लगाने के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। पार्टी ने इस मामले में आंतरिक जांच कराने का फैसला किया है। इस कमेटी में पूर्व मंत्री और एमएलसी टी. रवि, भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष एन. महेश और विधायक महेश तेंगिनाकाई शामिल हैं। कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वह मामले की विस्तार से जांच करे और 25 जून, 2026 तक या उससे पहले पार्टी नेतृत्व को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कर्नाटक बीजेपी चीफ को बी.वाई विजयेंद्र और अन्य पार्टी नेताओं को दिल्ली तलब किया। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि विधान परिषद चुनाव में भाजपा विधायकों द्वारा कथित क्रॉस वोटिंग के मामले को पार्टी ने गंभीरता से लिया है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन के दोनों दलों में क्रॉस वोटिंग हुई है। उनके अनुसार, जेडी(एस) के छह से सात विधायकों और भाजपा के चार से पांच विधायकों ने गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आने वाले विधायक यदि क्रॉस वोटिंग में शामिल पाए गए तो उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। हालांकि उन्होंने संबंधित विधायकों के नाम बताने से इनकार किया, लेकिन कहा कि पार्टी के पास पर्याप्त जानकारी है और मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा, भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और हर चीज की एक सीमा होती है। पार्टी कार्यकर्ता इन घटनाओं से आहत हैं। विजयेंद्र ने कहा कि चुनाव परिणाम से कुमारस्वामी बेहद आहत हैं और क्रॉस-वोटिंग केवल जेडी(एस) ही नहीं, बल्कि भाजपा का भी अपमान है। उन्होंने कहा, यदि भाजपा विधायकों ने जेडी(एस) उम्मीदवार के साथ विश्वासघात किया है, तो यह भाजपा के साथ भी विश्वासघात है। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी के भीतर कुछ समय से आंतरिक मतभेद दिखाई दे रहे हैं, लेकिन भरोसा जताया कि भाजपा नेतृत्व इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर उचित कार्रवाई करेगा। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की राजनीतिक रणनीतियों से भाजपा के भयभीत होने के सवाल पर विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा किसी से डरने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी का संगठन मजबूत है और वह हर राजनीतिक चुनौती का मुकाबला करेगी। कर्नाटक विधान परिषद चुनाव एलएलसी में कांग्रेस ने अपने सभी पांच उम्मीदवारों को जीत दिलाकर बड़ी सफलता हासिल की। भाजपा को दो सीटें मिलीं, जबकि उसकी सहयोगी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) जेडी(एस) को हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है, जबकि भाजपा और जेडी(एस) के लिए यह झटका है। इसे केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है, जिन्होंने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का विषय बनाया था और मुख्यमंत्री शिवकुमार को खुली चुनौती दी थी।
कांग्रेस ने अपेक्षा से अधिक समर्थन हासिल करते हुए 11 अतिरिक्त वोट प्राप्त किए। इनमें भाजपा से निष्कासित दो विधायकों के अलावा भाजपा के तीन और विधायक और जेडी(एस) के छह विधायकों के कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने की बात सामने आई है।कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, आज कर्नाटक के इतिहास में एक बड़ा दिन है। यह सिर्फ कांग्रेस के पांच उम्मीदवारों की जीत नहीं, बल्कि कर्नाटक की जनता की जीत है। राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया है। सुरजेवाला ने कहा, हमारे अनुमान के अनुसार कांग्रेस को 138 विधायकों का समर्थन प्राप्त था, जिसमें 135 कांग्रेस विधायक, एसकेपी के एक सदस्य और दो निर्दलीय शामिल थे, लेकिन अंततः हमारे उम्मीदवारों को 151 विधायकों का समर्थन मिला, जो हमारी अपेक्षा से कहीं अधिक था।
उन्होंने कहा, इसके विपरीत भाजपा, जिसके पास दो निर्दलीयों समेत 64 विधायकों का समर्थन था, उसे केवल 56 प्रथम वरीयता वोट मिले, जबकि भाजपा का एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया। वहीं 18 सदस्यों वाली जेडी-एस को केवल 14 वोट मिले। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा मतदान के पैटर्न से यह स्पष्ट हुआ है कि हमारे तीन वोट दूसरी तरफ
गए हैं। उन्होंने कहा, हम यह पता लगाएंगे कि किसने विपक्ष के पक्ष में मतदान किया और पार्टी इस पर
उचित निर्णय लेगी। जीत की खुशी है, लेकिन हम अपनी गलतियों को भी
सुधारेंगे। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



