बेहतर भविष्य का बजट

बजट हमेशा राजनीति की चाशनी लेकर बनाया जाता है। चुनाव का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी साल पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट में चुनावी राज्यों को साधने का प्रयास तो किया लेकिन ज्यादा जोर मिशन-2047 अर्थात आजादी के शतक पर भारत को विकसित देश बनाने पर दिया गया है। इसलिए लोक लुभावन बातों को इस बार निर्मला सीतारमण ने तरजीह नहीं दी है बल्कि भविष्य बेहतर हो, इसका ध्यान रखा है। पिछली बार बिहार के चुनाव को ध्यान में रखकर वित्त मंत्री ने मधुबनी कला से सजी साड़ी पहनी थी और मखाना, मधुबनी और मिथिलांचल को बड़ी सौगात भी दी थी। इस बार तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर कांजीवरम की साड़ी पहनी थी। काजू, नारियल और चंदन को लेकर कुछ घोषणाएं भी की गयी हैं लेकिन मुख्य फोकस विकसित भारत की नींव मजबूत करने पर है।
संसाधनों को बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र मंे 7.85 लाख करोड़ का आवंटन दूरदर्शिता की राजनीति और रणनीति मानी जा रही है। पिछले साल 6.81 लाख करोड़ का रक्षा बजट था। इस बार 50 हजार करोड़ रुपए बढ़ाए गये हैं। करों (टैक्स) में राहत सरकार ने पिछले वर्ष ही दे दी थी, इसलिए अभी उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। बजट में ऐसे प्रावधान किये गये हैं जिनका लाभ भविष्य में मिलेगा। मैन्यूफैक्चरिंग, लाॅजिटिक्स, एनर्जी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सरकार का जो इरादा है, सफल हो जाए तो विकसित भारत का सपना पूरा होने में कोई संदेह नहीं रहेगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां बजट पेश किया। नौवें बजट का भाषण लोकलुभावन के ऊपर लोक के मंत्र के साथ शुरू हुआ, जो किसी अलंकरण या आख्यान से मुक्त घोषणाओं पर केंद्रित रहा। भाजपा के लिए सत्ता पाने की दृष्टि से दो राज्यों में प्रस्तावित चुनावों को देखते हुए लोकलुभावन घोषणाओं की अपेक्षा की जा रही थी लेकिन सीतारमण ने पश्चिम बंगल और तमिलनाडु का नाम मात्र उल्लेख किया। निर्मला सीतारमण ने बजट में युवा शक्ति पर जोर दिया गया। बजट के प्रस्ताव विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के नवोन्मेषी विचारों से प्रेरित हैं, जो इसे एक युवा-केंद्रित बजट बनाते हैं।
नवनिर्मित कर्तव्य भवन से प्रेरित होकर बजट में तीन लक्ष्यों पर ध्यान दिया गया। आर्थिक वृद्धि को तेज और टिकाऊ बनाना, आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण और सबका साथ, सबका विकास का कार्यान्वयन। सरकार ने अनिश्चितता पर ठोस कार्रवाई और लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय ठोस सुधारों को प्राथमिकता दी है। ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए नियमों को सरल बनाया गया है, जिससे वे दंड के बजाय अतिरिक्त राशि देकर पुराने मामलों को बंद कर सकेंगे। भाषण का अंत किसी कविता के बजाय जीवन यापन की सुविधा के मुद्दे और जय हिंद के उद्घोष के साथ हुआ।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अगर किसी ईंधन ने आम आदमी को थोड़ी राहत दी है, तो वह है सीएनजीए अब इसी राहत को और मजबूत करते हुए बजट 2026 में सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिसका असर सीधे लोगों की जेब और पर्यावरण दोनों पर पड़ेगा। खेतों में जलने वाली पराली, शहरों का कचरा और उससे बनने वाली बायोगैस अब सिर्फ हरित ऊर्जा की कहानी नहीं रही, बल्कि यह सस्ता ईंधन बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बन गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के मंच से बायोगैस मिक्स सीएनजी पर बड़ा टैक्स ब्रेक देते हुए इसे आम उपभोक्ताओं के लिए और किफायती बना दिया है। केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब बायोगैस मिक्स सीएनजी पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी की गणना करते समय बायोगैस के पूरे मूल्य को बाहर रखा जाएगा। इसका मतलब साफ है कि जिस हिस्से में बायोगैस मिलेगी, उस पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। पहले टैक्स कैलकुलेशन में बायोगैस की कीमत भी जोड़ दी जाती थी, जिससे इसकी लागत बढ़ जाती थी।
इससे पहले रेगुलर सीएनजीए पर करीब 14 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगती थी, जिससे प्रति किलो कीमत में 14-15 रुपये तक टैक्स जुड़ जाता था। साल 2023 में सरकार ने आंशिक राहत जरूर दी थी। बायोगैस के पूरे मूल्य पर छूट नहीं मिलने से टैक्स का बोझ बना रहता था।
इसी प्रकार सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़ा कदम उठाया। वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीपीएसई) की महत्वपूर्ण अचल संपत्ति संपत्तियों के पुनर्चक्रण में तेजी लाने के लिए समर्पित आरईआईटी की स्थापना, उधारदाताओं को विवेकपूर्ण ढंग से निर्धारित आंशिक ऋण गारंटी प्रदान करने के लिए अवसंरचना जोखिम गारंटी कोष, प्रत्येक शहरी आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) के लिए 5 वर्षों में 5000 करोड़ रुपये का आवंटन, तटीय माल ढुलाई प्रोत्साहन योजना से 2047 तक अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय जहाजरानी की हिस्सेदारी 6 फीसद से बढ़कर 12 फीसद हो जाएगी। संचालन में सहायता प्रदान करने के लिए सीप्लेन वीजीएफ योजना शुरू की जाएगी।
पूर्व में डंकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने वाले नए समर्पित माल ढुलाई गलियारे अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग (उत्तर पश्चिम) पर्यावरण के अनुकूल यात्री प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए शहरों के बीच 7 हाई-स्पीड रेल गलियारे ‘विकास कनेक्टर’ के रूप में आवश्यक मानव संसाधन के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने से देश का विकास होगा।
सरहदों पर बढ़ती चुनौतियों और आधुनिक भारत के बढ़ते संकल्प के बीच, केंद्र सरकार ने रक्षा बजट की तिजोरी खोल दी है। वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किए गए बजट 2026 में भारतीय सेनाओं के लिए एक ऐसा रक्षा कवच तैयार किया गया है, जिसकी धमक न सिर्फ देश के भीतर बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। इस साल का रक्षा आवंटन केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के उन अभेद्य इरादों की कहानी है, जो राफेल की दहाड़ और स्वदेशी मिसाइलों की ताकत से लिखी जा रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट ऐलान किया है। यदि हम इसकी तुलना पिछले साल से करें, तो यह एक बड़ी छलांग है। पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में सरकार ने रक्षा क्षेत्र को 6,81,210.27 करोड़ दिए थे, जो खुद 2024-25 के मुकाबले 9.5 फीसद अधिक था। इस साल का बजट दर्शाता है कि भारत अपनी सामरिक शक्ति को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। आधुनिक युद्ध अब केवल संख्या बल पर नहीं, बल्कि तकनीक और एडवांस वेपन्स पर लड़े जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ की राशि अलग रखी है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)


