दिल्ली में अवैध नागरिकों पर शिकंजा

मतदाताओं का विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) का मुख्य उद्देश्य अवैध नागरिकों की पहचान करना है। इस मामले मंे देश भर मंे कार्रवाई हो रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की धर-पकड़ तेज कर दी है। गत 8 जनवरी को ही दिल्ली के भीतर 20 बांग्लादेशी नागरिों को पकड़ा गया। छानबीन के बाद पता चला कि ये सभी अवैध रूप से भारत मंे रह रहे थे। दिल्ली मंे इससे पहले भी अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी पकड़े गये थे। पिछले वर्ष 25 सितम्बर को 25 बांग्लादेशियों को पकड़ा गया था। उनको दक्षिणी दिल्ली से पकड़ा गया था। उसी दौरान त्रिपुरा के गोमती जिले मंे पुलिस ने पांच बांग्लादेशी कामगारों को हिरासत में लिया था। वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 19 सितम्बर 2025 को बताया था कि बांग्लादेशी नागरिक निर्माण और फर्नीचर का काम कर रहे थे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा कहते हैं कि ऐसे ही हालात रहे तो असम बांग्लादेश का हिस्सा बन जाएगा। उन्हांेने यह बात दिसम्बर 2025 मंे कही थी। बहरहाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता राष्ट्रीय राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुसलमानों को निकाल बाहर करने पर आमदा हैं।
भारत के विभिन्न राज्यों में अवैध बांग्लादेशियों की तलाश जारी है। पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में अवैध रूप से भारत में रहने वाले बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया जा रहा है और उन्हें वापस बांग्लादेश भेजा जा रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली के भीतर 20 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है। दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया से पहले ही पुलिस का बड़ा एक्शन देखने को मिला है। पुलिस द्वारा 20 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह सभी बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। पकड़े गए अवैध लोगों के पास से कुछ भारतीय पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं।
भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जल्द ही दिल्ली में वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर कराया जाएगा। दिल्ली में ये प्रक्रिया तीसरे चरण में होगी। चुनाव आयोग की ओर से पहले चरण के एसआईआर का आयोजन बिहार में कराया गया था। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में पिछली बार जब एसआईआर हुआ था, उसे 20 साल से ज्यादा समय बीत चुके हैं। इसलिए अब वोटर लिस्ट को अपडेट करना जरूरी हो गया है। अन्य राज्यों से मिले उदाहरण से ऐसी संभावना दिख रही है कि दिल्ली में भी लाखों की संख्या में वोटर लिस्ट से नाम बाहर किए जा सकते हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग हो सकते हैं जिनका निधन हो गया हो।
इससे पूर्व भी दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत में अवैध रूप से रह रहे 25 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। ये सभी लोग लंबे समय से दिल्ली में रह रहे थे। पुलिस ने इन सभी बांग्लादेशियों को दक्षिण दिल्ली से पकड़ा था। उन्हीं दिनों त्रिपुरा के गोमती जिले में पुलिस ने पांच बांग्लादेशी कामगारों को हिरासत में लिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने 19 सितंबर 2025 को इस बारे में जानकारी दी थी। अधिकारी के अनुसार, ये सभी बांग्लादेशी नागरिक महारानी इलाके में निर्माण और फर्नीचर का काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि वे कुछ दिन पहले ही भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे। उदयपुर की उप-मंडलीय पुलिस अधिकारी देबांजलि रे ने बताया कि महारानी इलाके में तलाशी के दौरान पुलिस ने एक ऑटो-रिक्शा को रोका। पूछताछ में शक होने पर पांचों यात्रियों को हिरासत में ले लिया गया। देबांजलि रे ने बताया था, पांचों मजदूरों को पश्चिमी त्रिपुरा में स्थित राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक आश्रय गृह में भेज दिया गया है। सीमा सुरक्षा बल ने इन्हें वापस भेजने के लिए बांग्लादेशी समकक्षों से बात की थी।
उधर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने एक बड़ा ही चैंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि अगर असम में रहने वाले बांग्लादेशी लोगों की आबादी में 10 प्रतिशत की और बढ़ोतरी होती है तो असम स्वयं ही बांग्लादेश का हिस्सा बन जाएगा। बता दें कि सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने बीते दिसम्बर ये बात एक आधिकारिक कार्यक्रम के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कही थी। उन्होंने कहा कि वह बीते पांच सालों से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। दरअसल, सीएम हिमंत विश्व शर्मा से बांग्लादेश के एक नेता की उस टिप्पणी को लेकर सवाल किया गया था जिसमें उस नेता ने पूर्वोत्तर का पड़ोसी देश में विलय करने की बात कही थी। इस पर सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने कहा- असम में 40 प्रतिशत आबादी बांग्लादेशी मूल की है। अगर यह संख्या 10 प्रतिशत और बढ़ जाती है तो हम स्वतः ही
इसमें शामिल हो जाएंगे। इसीलिए मैं पिछले पांच वर्षों से इस मुद्दे को उठा रहा हूं।
दरअसल, दिसंबर महीने की शुरुआत में बांग्लादेश में गठित एक नए राजनीतिक दल- नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के एक नेता हसनत अब्दुल्ला ने कथित तौर पर कहा था कि बांग्लादेश को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘अलग-थलग कर देना चाहिए। हसनत अब्दुल्ला ने ये भी कहा था कि ढाका को क्षेत्र में अलगाववादी तत्वों को समर्थन देना चाहिए। असम के कामरूप जिले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। युवक पर बांग्लादेश में हिंदू युवक की पीटकर हत्या के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का आरोप थे। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार युवक ने हिंदू युवक की हत्या का वीडियो कथित तौर पर पोस्ट किया और इस अपराध के समर्थन में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था।
दिल्ली पुलिस ने एक स्पेशल ड्राइव के तहत अवैध बांग्लादेशियों को भारत में बसाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में 6 बांग्लादेशी नागरिक, 5 भारतीय सहयोगी और कुल 33 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों के पास से फर्जी आधार कार्ड, बांग्लादेशी दस्तावेज, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, स्कैनर, मोबाइल सिम कार्ड बराकद हुए थे।
आरोपियों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत में अवैध रूप से बांग्लादेशों को बसाने और रोजगार दिलाने का आरोप है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस गैंग का सरगना चांद मियां है, जो खुद बांग्लादेशी है और भारत में अवैध रूप से 5 साल की उम्र से रह रहा है। पुलिस के मुताबिक चांद मियां पिछले तकरीबन 5 साल से भारत में अवैध बांग्लादेशियों को बनाने का रैकेट चला रहा है। चांद मियां पश्चिम बंगाल, मेघालय और बेनापोल
सीमा के जरिए बांग्लादेशियों को अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ करवाता था। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



