बिहार का जंगल राज कब तक!

लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की सत्ता के 11 साल जंगलराज के रूप में प्रचारित किये जाते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव-2025 में भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव से पहले रैलियांे में जंगल राज की खूब याद दिलायी। यह भी माना जा रहा है कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को कम विधायक मिलने का एक कारण यह भी रहा। हालांकि चुनाव में मतदान से ठीक पहले मोकामा में दुलार चन्द यादव की जिस तरह हत्या हुई, उसे भी जंगलराज ही कहा जाएगा। नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री बन गये लेकिन अभी 8 दिसंबर को खबर मिली कि सत्तारूढ़ जनता दल (यू) की सांसद विजय लक्ष्मी से ही 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गयी। बिहार में इस बार एक बड़ा परिवर्तन यह हुआ कि गृह मंत्रालय का प्रभार मुख्यमंत्री ने अपने पास नहीं रखा और भाजपा नेता व राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चैधरी गृह मंत्री बनाए गये हैं। राज्य में सत्तारूढ़ दल के सांसद से ही अगर रंगदारी मांगी जा रही है तो कहना होगा कि बिहार में अभी जंगलराज खत्म नहीं हुआ है।
बिहार में सत्तारूढ़ दल जनता दल यूनाइटेड की सांसद से रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। सीवान से जेडीयू सांसद विजयलक्ष्मी देवी से 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है। पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई है। बताया जाता है कि सांसद विजयलक्ष्मी देवी के नंबर पर फोन करके यह धमकी दी गई है।सांसद के प्रतिनिधि मनोरंजन श्रीवास्तव ने इस संबंध में मैरवा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। बताया जाता है कि 3 दिसंबर की रात 10.38 मिनट पर सांसद के पास कॉल आई जिसमें 10 लाख की रंगदारी मांगी गई और पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी गई। सांसद प्रतिनिधि ने एफआईआर में उस नंबर का भी जिक्र किया जिस नंबर से कॉल करके रंगदारी मांगी गई थी। फिलहाल ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सांसद से रंगदारी मांगने की इस घटना में असामाजिक तत्वों का हाथ हो सकता है। उधर, विजयलक्ष्मी देवी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- मैरवा थाना द्वारा मेरे मोबाइल पर आई रंगदारी व धमकी की सूचना पर जिस तत्परता और गंभीरता से कार्रवाई हो रही, उसके लिए मैं सिवान पुलिस एवं पूरी जांच टीम का आभार व्यक्त करती हूं।वहीं, मामले की जांच के क्रम में पुलिस को पता चला कि बड़हरिया क्षेत्र के विधायक को भी उसी तरह का कॉल किया गया है तथा इसी प्रकार अन्य पदाधिकारी लोगों को भी इस तरह की कॉल कर रंगदारी की मांग की जा रही है।
ध्यान रहे इसे सामान्य बात तो नहीं कहा जा सकता। दुलारचंद की हत्या 30 अक्तूबर को हुई थी, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैला हुआ था। इस हत्या के खिलाफ घोसवरी थाने में अनंत सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के आदर्श आचार संहिता को सुनिश्चित करने के लिए तीनों उम्मीदवारों के साथ एक-एक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी, सशस्त्र बल और वीडियोग्राफर की तैनाती की गई थी।गंगा के दक्षिणी छोर पर बसे पटना जिले के 14 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है मोकामा विधानसभा सीट.
इस सीट से अनंत सिंह जीतते रहे हैं।पटना की सड़कों पर बग्घी दौड़ाने वाले बाहुबली अनंत सिंह इस बार भी चुनाव जीते, जेडीयू ने उन्हें मोकामा से उम्मीदवार बनाया था तो आरजेडी ने बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को टिकट दिया था। जनसुराज ने इस सीट से पीयूष प्रियदर्शी को अपना उम्मीदवार बनाया था। दुलारचंद यादव जनसुराज के पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे तभी उनकी हत्या हो गयी।
नयी सरकार बनने के बाद बिहार में अपराध की खबरें लगातार आ रही हैं जिनमें हाल ही में अररिया में एक महिला टीचर की गोली मारकर हत्या, पटना में पुलिस द्वारा डॉक्टर और ड्राइवर की पिटाई और मोतिहारी व मुजफ्फरपुर जैसे जिलों में हत्या और अपराध की अन्य घटनाएं शामिल हैं। ये राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं। हालांकि कुछ अपराधों जैसे शराबबंदी से जुड़े कानूनों में नरमी भी बरती गई है। पटना में जेपी सेतु चेकपोस्ट पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा एक डॉक्टर और उनके ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई की गई जिससे ड्राइवर घायल हो गया। यह घटना पुलिसिया बर्बरता की मिसाल है।
मोतिहारी के एक व्यक्ति कामेश्वर साहनी की घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुजफ्फरपुर के एक भाजपा विधायक के पीए की हत्या हुई जिसके बाद अपराधियों को बख्शने की बात कही गई।
हिंसक अपराध, हत्याएं, गोलीबारी जैसी घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। खासकर जब ये सार्वजनिक स्थानों या दिन के उजाले में हो रही हैं। पुलिसिया ज्यादती सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस की बर्बरता और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें भी आ रही हैं। बिहार में अपराध का माहौल चिंताजनक है जिसमें हिंसक वारदातें और कानून.व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासन इसे नियंत्रित करने के दावे करते हैं।
शिवगंज में बिहिया जदयू प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुशवाहा पर फायरिंग की गई। कुशवाहा अपने सहयोगियों के साथ घर से बाहर निकलें थे। इस घटना ने एक बार फिर से कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया। बिहार के भोजपुर जिले में अपराधियों ने एक बार फिर बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश की। जगदीशपुर थाना क्षेत्र के शिवगंज में बिहिया जदयू प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुशवाहा पर मोटरसाइकिल सवार हथियारबंद अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। घटना उस वक्त हुई जब मनोज कुशवाहा अपने दो सहयोगियों के साथ घर के बाहर बैठे हुए थे। इसी दौरान अचानक एक बाइक पर सवार तीन अज्ञात युवक पहुंचे और बिना कुछ कहे उन पर गोलीबारी शुरू कर दी।मिली जानकारी के अनुसार अपराधियों ने तीन राउंड फायरिंग की जिसमें एक गोली मनोज कुशवाहा के पैर को छूते हुए निकल गई। गनीमत रही कि गोली शरीर के किसी अंदरूनी हिस्से में नहीं लगी। मनियारी थाना क्षेत्र में देर रात बाइक सवार अपराधियों ने बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता के निजी सहायक विनोद दास को गोली मार दी। विवाह समारोह से लौटते समय हुई वारदात में घायल विनोद दास खुद अस्पताल पहुंचे। विनोद दास कुढ़नी प्रखंड के अमरख निवासी और भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह वर्तमान में कुढ़नी विधायक के निजी सहायक के रूप में कार्यरत हैं। घटना की सूचना मिलते ही विधायक व पूर्व मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता अस्पताल पहुंचे और घायल का हाल जाना। उन्होंने कहा कि यह नीतीश कुमार और सम्राट चैधरी का बिहार हैए अपराधी किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे। आम जनता इस तरह के आश्वासन से अपने को सुरक्षित नहीं समझेगी।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



