लेखक की कलम

कैसे बचेगी बेटी कैसे पढे़गी बेटी?

हाल ही में एक बार फिर एक मेडिकल छात्रा के साथ पाशविकता को दोहराया गया है। पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के दुर्गापुर में एक मेडिकल कॉलेज की द्वितीय वर्ष की छात्रा के साथ गैंगरेप की सनसनीखेज वारदात हुई है। पीड़िता ओडिशा के जलेश्वर की रहने वाली है। गत 10 अक्टूबर रात कॉलेज परिसर के बाहर आरोपियों ने उसे अगवा कर लिया। उसे जंगल में ले जाकर अपनी हवस का शिकार बनाया। पुलिस ने हमेशा की तरह आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करके इस मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जाता है कि ये घटना उस समय हुई जब छात्रा अपनी एक सहेली के साथ रात का खाना खाने के लिए कॉलेज परिसर से बाहर गई थी। रात करीब 8 से 8-30 बजे के बीच तीन युवक उनके पास पहुंचे। उन्हें देखकर छात्रा की सहेली घबरा गई और मौके से भाग निकली। इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता का मोबाइल फोन छीन लिया और उसे जबरन पास के जंगल में ले गए। वहां तीनों ने छात्रा को अपनी हवस का शिकार बना डाला। दरिंदगी के बाद उन तीनों ने उसे धमकाया कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो अंजाम गंभीर होंगे। आरोपी जाते-जाते यह भी कह गए कि मोबाइल वापस चाहिए तो पैसे देने होंगे। इस वारदात के बाद पीड़िता की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। उसे दुर्गापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।
आपको बता दें कि हाल ही में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्याकांड की पहली बरसी पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने ममता बनर्जी सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है। मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक्स पर आंकड़ों के साथ एक बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल महिलाओं के लिए देश के सबसे असुरक्षित राज्यों में से एक बन गया है। उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2022 में राज्य में महिलाओं के खिलाफ 34 हजार 738 अपराध दर्ज हुए, जिससे यह देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। उनके अनुसार, राज्य की अपराध दर 7118 प्रति एक लाख आबादी है, जो राष्ट्रीय औसत 6514 से अधिक है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अगस्त 2024 तक पश्चिम बंगाल में बलात्कार और पॉक्सो से जुड़े 48 हजार 600 मामले लंबित है, जबकि फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें मौजूद है। मालवीय के अनुसार, यह ममता बनर्जी सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। मालवीय ने कहा, ममता बनर्जी के नेतृत्व में बंगाल की महिलाएं असुरक्षित, अनसुनी और उपेक्षित हैं। राज्य को केवल जवाब नहीं, जवाबदेही चाहिए। 2026 में उन्हें सत्ता से बाहर करना ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि आरजी कर घटना के एक वर्ष बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। गौरतलब है कि बंगाल एकमात्र ऐसा स्थान है जोकि आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना करने के लिए प्रसिद्ध है। वहां का दुर्गा पूजा विश्व प्रसिद्ध है। ऐसे में वहां से यह खबर आना कि एक महिला चिकित्सक के साथ वीभत्स कार्य हुआ है। यह काफी झकझोर देने वाला है। महिलाएं इस सृष्टि के सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके साथ ऐसा जघन्य पाप किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। बंगाल में यह पहली घटना नहीं है। कुछ महीनों पहले संदेशखाली की घटना ने भी राज्य के मुख पर कालिख पोती थी। फिर सोशल मीडिया पर तमाम वीडियो डाले गए जहां जानवरों से भी ज्यादा बदतर हालत में महिलाओं को पीटा जा रहा था। उसके बाद महिला चिकित्सक से हुई यह घटना काफी निंदनीय है। यह देखकर काफी खुशी होती है कि इसके विरोध में महिलाएं सड़कों पर उतर आयीं है। हालांकि यह संघर्ष केवल महिलाओं का ही नहीं है। इसके साथ पुरूषों को भी यह समझने की जरूरत है कि स्त्रियां कोई वस्तु नहीं है, जिनका कि वह उपभोग करके छोड़ दें। उन्हें यह भी समझने की जरूरत है कि यदि रक्तबीज रूपी पिशाच उनके आबरू को गंदा करने की कोशिश करेगा, तो वही स्त्री चंडिका का रूप घर के उनका संहार करने में सक्षम है। ममता बनर्जी खुद महिला हैं। उनको महिलाओं की वेदना समझना चाहिए। क्योंकि महिला ही यदि महिला के साथ नहीं खड़ा होगी तो गिद्ध दृष्टि वाले उनको अपनी हवस का शिकार करने के लिए तो बैठे ही हैं। इसके वाला छद्म नारीवाद का चोला पहनने वालीं स्त्रियां ही विरोध प्रदर्शन को हवा नहीं देंगी। तो यह दुष्कृत्य ऐसे ही होते रहेंगे। अगर आप सभ्यता का चोला पहनने हैं। अपने देश में महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय पर नहीं बोलते हैं तो आप भी बराबर के अपराधी हैं। पार्टी, राजनीति, विचारधारा से ऊपर उठकर मणिपुर, संदेशखाली, हाथरस और ऐसे तमाम कृत्यों की निंदा करें। इसलिए नहीं कि वह आपका व्यक्तिगत मामला नहीं है। बल्कि इसलिए कि आपके अंदर मानवीय संवेदना जीवित है। आपके घर परिवार में भी स्त्रियां हैं जो यह गर्व से कह सकें कि आप उस श्रेणी का हिस्सा नहीं हैं, जोकि महिलाओं को जीव कम पशु ज्यादा समझते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराधों के संदर्भ में 2022 में पश्चिम बंगाल में प्रति एक लाख की दर से अपराध दर 7118 थी। एनसीआरबी अपराध दर की गणना प्रति एक लाख जनसंख्या के आधार पर दर्ज करता है। यानी पश्चिम बंगाल में प्रति एक लाख महिलाओं ने 7118 अपराध के मामले दर्ज करवाए। ये आंकड़ा उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से अधिक था।
सवाल सिर्फ राजनीति करने का नहीं है। सवाल इस देश की बेटियों की अस्मिता की सुरक्षा देने का है सवाल उस माँ-बाप को भरोसा देने का है जो पढ़ाने के लिए पांच सौ हजार किलोमीटर दूर अपनी बेटी को किसी मेडिकल या इंजीनियरिंग कॉलेज में भेजता है। यदि बेटियों के साथ वहां ऐसी हैवानियत दरिंदगी बर्बरता की वारदातों को अंजाम दिया जाता है तो कल कौन माँ-बाप हिम्मत कर बेटी को घर से दूर भेजेंगे? क्या सरकार सिर्फ बयानबाजी और भोथरे नारे लगाने के लिए है? बेटियों की ईजजत को इसी तरह हैवानियत का शिकार बनाया जाता रहेगा आघ्ैर राजनीति बयानबाजी तक ही सीमित रहेगी।(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)

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