मीनाक्षी शेषाद्रि ने सुकून व संतुलन को चुना

मीनाक्षी शेषाद्री ने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत साल 1983 में फिल्म पेंटर बाबू से की थी। हालांकि यह फिल्म उन्हें बड़ी पहचान नहीं दिला सकी, लेकिन उसी साल रिलीज हुई सुभाष घई की सुपरहिट फिल्म हीरो ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। इस फिल्म में उनके साथ जैकी श्रॉफ थे और मीनाक्षी की मासूमियत, अभिनय और डांस ने दर्शकों का दिल जीत लिया। हीरो उस दौर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी और इसी फिल्म ने मीनाक्षी को हिंदी सिनेमा की लीडिंग अभिनेत्रियों की कतार में ला खड़ा किया। खास बात यह रही कि फिल्म में उनका आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस किसी नई अभिनेत्री जैसा नहीं लगा, बल्कि वे शुरुआत से ही एक परिपक्व कलाकार के रूप में उभरीं।
मीनाक्षी शेषाद्री का फिल्मी करियर 1980 के दशक के अंत और 1990 के शुरुआती वर्षों में बेहद सफल और प्रभावशाली रहा। उन्होंने केवल ग्लैमरस भूमिकाएं ही नहीं निभाईं, बल्कि मजबूत महिला किरदारों से अपनी अलग पहचान बनाई। मेरी जंग, आवारगी, शहंशाह, घायल और खासतौर पर दामिनी जैसी फिल्मों में उनका अभिनय काफी सराहा गया। फिल्म दामिनी में उनके दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड भी मिला।
मीनाक्षी शेषाद्री ने अपने करियर के शिखर पर होने के बावजूद साल 1995 में शादी के बाद फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। उन्होंने हरीश मैसूर से शादी की, जो पेशे से एक इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं और फिल्म इंडस्ट्री से उनका
कोई संबंध नहीं था। शादी के बाद मीनाक्षी अमेरिका शिफ्ट हो गईं और उन्होंने पूरी तरह से पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता दी। उस समय उनका इंडस्ट्री छोड़ना फैंस के लिए हैरान करने वाला फैसला था, क्योंकि वे लगातार हिट फिल्मों में काम कर रही थीं। हालांकि मीनाक्षी ने कभी इस फैसले पर अफसोस जाहिर नहीं किया और उन्होंने हमेशा यही कहा कि उन्होंने जीवन में संतुलन और सुकून को चुना। (हिफी)



