लेखक की कलम

अब भगवा के निशाने पर पंजाब

भगवा का अश्वमेध यज्ञ का तुरंग पश्चिम बंगाल में विजय पताका फहराने के बाद अब उत्तर भारत के राज्य पंजाब की तरफ मुड़ गया है। उत्तर भारत का यह अकेला राज्य है जहां भाजपा की अपने दम पर सरकार नहीं बन सकी। पंजाब में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 92 सीटों पर कब्जा कर आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार बनायी है। दूसरे स्थान पर पूर्व की सत्तारूढ कांग्रेस रही जिसको 18 विधायक ही मिल पाये। तीसरे स्थान पर शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) रहा था जिसको 3 सीटें मिलीं। भाजपा पहले एसएडी के साथ सरकार में साझेदार थी लेकिन किसान आंदोलन पर मतभेद के चलते एसएडी एनडीए गठबंधन से अलग हो गया था। पंजाब की जनता ने भाजपा को 2 विधायक दिये थे। इसके अलावा 1 सीट मायावती की पार्टी बसपा को और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुआ था। इस प्रकार पंजाब में भी पश्चिम बंगाल की तरह के हालात हैं। इस बार भाजपा के पक्ष में माहौल बन रहा है। यहां भी मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल को जनता ठुकरा चुकी है। इस लिए भाजपा अपने को विकल्प रूप में प्रस्तुत कर रही है। भाजपा का मनोबल अब काफी बढ़ा हुआ है। सत्तारूढ दल आप के राघव चड्डा समेत कई राज्य सभा सदस्य एनडीए गठबंधन को समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई नेता भाजपा में पहले ही शामिल हो चुके हैं। इसीलिए पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर 2027 के चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हाल ही में पार्टी ने केवल सिंह ढिल्लों को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। हालाँकि पार्टी का जनाधार शहरी और व्यापारी वर्ग में मजबूत है, फिर भी ग्रामीण और किसान क्षेत्रों में इसे भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा हिन्दू वोटों को एकजुट करने का प्रयास भी कर रही है। इसी के चलते तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्य सभा में लाया गया है। रवनीत सिंह विट्टू भी पंजाब में अब पूरा समय देंगे। इसप्रकार भाजपा की किलेबन्दी बहुत मजबूत दिख रही है। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन को मजबूती देने और विधानसभा की चुनावी तैयारी के मद्देनजर दिल्ली में 12 जून को अहम बैठक आयोजित की गयी। भाजपा अध्यक्ष नीतिन नवीन और गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक का नेतृत्व किया।पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ और पंजाब के संगठन मंत्री श्रीनिवास बैठक में मौजूद रहे। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ,गृह मंत्री अमित शाह, संगठन महामंत्री बी एल संतोष के अलावा तरुण चुघ भी बैठक में शामिल थे।
पंजाब में चुनाव की रणनीति तय करने के लिए गत 12 जून को भाजपा आलाकमान ने नई दिल्ली में पंजाब बीजेपी के शीर्ष नेताओं की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक ढांचे और राज्य के राजनीतिक मुद्दों पर मुख्य रूप से चर्चा की गई।
राज्य में पार्टी के अभियान को धार देने के लिए नशीली दवाओं के दुरुपयोग और धर्मांतरण जैसे गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का रोडमैप तैयार किया गया।स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा को संतोषजनक परिणाम मिले हैं। जहाँ एक ओर पार्टी ने अबोहर जैसे शहरों में शानदार प्रदर्शन कर अपना पहला मेयर अपने दम पर बनाया है, वहीं कई अन्य क्षेत्रों में उसे आप और कांग्रेस के मजबूत विरोध का सामना करना पड़ा है। पंजाब विधान सभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़ी पार्टी के साथ किसी भी तरह के समझौते से भाजपा के इनकार के बाद बीते दिनों पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया बयान को अकाली दल के साथ रिश्तों की नई संभावनाओं के तौर पर देखा जा रहा है।भाजपा के प्रदेश महासचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी जगमोहन राजू ने दावा किया है कि अमृतपाल सिंह की पार्टी के कुछ नेताओं ने भाजपा के साथ गठबंधन का प्रस्ताव रखा था।
हालांकि, उन्होंने कहा कि भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह पंजाब में 2027 का चुनाव सभी 117 सीटों पर अपने दम पर लड़ेगी। राजू के इस बयान ने पंजाब की सियासत में नई बहस छेड़ दी है कि भाजपा किन राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रही है। इस प्रकार पंजाब की राजनीति में एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के पुराने गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बहस को और हवा तब मिली जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहली बार खुलकर इस संभावित वापसी पर टिप्पणी की और इसे लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उनके बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या सच में दोनों पार्टियां फिर से साथ आने की तैयारी में हैं या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) को हाल ही में कई बड़े राजनीतिक झटके लगे हैं। पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के बागी होने और मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई ज्ञान सिंह मान समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ। आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने बागी होकर भाजपा का दामन थाम लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई ज्ञान सिंह मान भी आप का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में चले गये। मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आप के बड़े नेताओंध्विधायकों पर कार्रवाई की है । पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई ज्ञान सिंह मान तीन अन्य प्रमुख हस्तियों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। उनके साथ बरनाला के कारोबारी और एनआरआई बलजिंदर सिंह बरनाला के साथ-साथ जलालाबाद के विधायक गोल्डी कंबोज के पूर्व पीए मनजिंदर सिंह साजन खेड़ा भी भाजपा में शामिल हुए।
आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान को संबोधित करते हुए भाजपा नेता जाखड़ ने कहा कि भाजपा कार्यालयों पर हमले प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की छापेमारी को नहीं रोकेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां भी भ्रष्टाचार हुआ है, वहां जांच जारी रहेगी और हर भ्रष्ट व्यक्ति को अंततः जवाबदेही के दायरे में लाया जाएगा।
हालांकि पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी (आप) को भी उस समय बड़ा राजनीतिक बल मिला, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील चाम (फगवाड़ा) और जॉर्ज सागर (जालंधर) अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। दोनों नेताओं को पंजाब आप के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, पार्टी महासचिव एवं पर्यटन विभाग के सलाहकार दीपक बाली और जालंधर कैंट प्रभारी राजविंदर कौर थियारा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल कराया गया। इस तरह भाजपा की पंजाब विधानसभा की राह बहुत आसान नहीं है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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