यूपी में पंकज चैधरी को कमान

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चैधरी ने जब 13 दिसंबर को उत्तर प्रदेश अध्यक्ष के लिए नामांकन किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं प्रस्तावक की भूमिका निभाई, तभी तय हो गया था कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व पंकज चैधरी को यूपी की कमान सौंपने वाला है। इसके बाद तो सब कुछ रस्म अदायगी के रूप में हुआ। पंकज चैधरी को 14 दिसंबर को बाकायदा उत्तर प्रदेश का भाजपा अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। संगठन और सरकार में एकरसता बनी रहेगी, यह प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा भी कि सरकार और संगठन मिलकर यूपी का विकसित राष्ट्र-राज्य का संकल्प नई गति से पूरा करेंगे। नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चैधरी के सामने निश्चित रूप से बहुत बड़ी जिम्मेदारियां हैं लेकिन उनका अनुभव और व्यवहार उनको सफलता की मंजिल तक पहुंचाएगा। वह अपने पूर्ववर्तियों की गरिमा बनाए
रखेंगे।
भारतीय जनता पार्टी के 1980 में गठन के बाद से 2017 तक लगातार प्रदेश अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण वर्ग का कब्जा रहा था। पिछले 10 वर्षों में स्थिति बदली है। ओबीसी वर्ग ने पार्टी की राजनीति में लंबी छलांग लगाई है। यूपी चुनाव 2027 को देखते हुए एक बार फिर यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर ओबीसी चेहरे को ही आगे किए जाने की बात सामने आ रही है। बिहार चुनाव में भाजपा की सफलता के बाद अब पार्टी एक बार फिर यूपी में सत्ता में वापसी के लिए समीकरणों को मजबूत करने में जुटी है। इसके लिए दमदार चेहरे के साथ चुनावी साल में तैयारियों को पूरा कराने की तैयारी है। भाजपा की स्थापना वर्ष 1980 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में कुल 15 चेहरे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें सिर्फ कलराज मिश्र ऐसे नेता रहे हैं, जिन्हें दो बार यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनने का अवसर मिला। अन्य सभी अध्यक्ष एक-एक बार ही इस पद पर आसीन हुए। इस प्रकार यूपी भाजपा के 17 अध्यक्ष इस पद पर पिछले 45 वर्षों में सेवा दे चुके हैं। बीते 45 वर्षों के संगठनात्मक इतिहास में बीजेपी ने यूपी में सबसे अधिक छह ब्राह्मण अध्यक्ष बनाए हैं।यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पद पर इसके अलावा तीन कुर्मी, एक लोधी, एक मौर्य, एक राजपूत, एक भूमिहार और एक जाट समाज से प्रदेश अध्यक्ष चुने गए हैं। कुर्मी प्रदेश अध्यक्ष में ओम प्रकाश सिंह, विनय कटियार और स्वतंत्र देव सिंह शामिल हैं। तीनों ने पार्टी को बड़ी सफलता दिलाई। अब इसी समाज से पंकज चैधरी ने यूपी की कमान संभाली
है।
बीजेपी की यूपी इकाई के पहले अध्यक्ष माधो प्रसाद त्रिपाठी बने थे। वर्ष 1980 में अध्यक्ष बने माधो प्रसाद त्रिपाठी 1984 तक इस पद पर रहे। लोकसभा सांसद रह चुके त्रिपाठी की अगुवाई में ही बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की शुरुआत की। माधो प्रसाद त्रिपाठी के बाद 1984 से 1990 तक कल्याण सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। लोधी समाज से आने वाले कल्याण सिंह बाद में 19 महीनों तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। उनके कार्यकाल के दौरान बीजेपी ने ओबीसी राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। पार्टी से मतभेदों के चलते वह कुछ समय के लिए अलग भी रहे, लेकिन 2014 में बीजेपी की सत्ता में वापसी के बाद उन्होंने दो राज्यों के राज्यपाल के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। 1991 से 1997 तक कलराज मिश्र यूपी बीजेपी अध्यक्ष रहे। यह दौर प्रदेश की राजनीति में मंडल और कमंडल की टकराहट के लिए जाना जाता है। इसी समय अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिराया गया, जिसने राज्य और देश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
कलराज मिश्र के बाद बीजेपी ने राजनाथ सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। मार्च 1997 से जनवरी 2000 तक अध्यक्ष रहे राजनाथ सिंह बाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने। क्षत्रिय वर्ग से आने वाले राजनाथ सिंह ने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर मजबूत पकड़ बनाई। मौजूदा समय में वह देश के रक्षा मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं।
राजनाथ सिंह के बाद जनवरी 2000 से अगस्त 2000 तक मीरजापुर निवासी ओम प्रकाश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। कुर्मी समाज से आने वाले ओम प्रकाश सिंह का कार्यकाल महज सात महीने का रहा, लेकिन वह पार्टी और सरकार दोनों में अहम भूमिकाएं निभा चुके थे। इसके बाद वर्ष 2000 के बाद एक बार फिर कलराज मिश्र को पार्टी ने कमान सौंपी। इसके बाद विनय कटियार को यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया। कुर्मी समाज से आने वाले विनय कटियार राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। उनके कार्यकाल में 2004 के लोकसभा चुनाव का माहौल बन रहा था। इसलिए भाजपा ने ब्राह्मणों को बागडोर सौंपी।
केशरीनाथ त्रिपाठी से लेकर रमापति राम त्रिपाठी तक यह युग रहा।
सन् 2004 से 2007 तक केशरीनाथ त्रिपाठी प्रदेश अध्यक्ष रहे। वह यूपी विधानसभा के स्पीकर और बाद में पश्चिम बंगाल, मिजोरम और बिहार के राज्यपाल भी बने। इसके बाद 2007 से 2010 तक डॉ. रमापति राम त्रिपाठी को पार्टी की प्रदेश इकाई की जिम्मेदारी दी गई। वह सांसद और विधायक दोनों रह चुके हैं। मई 2010 से अप्रैल 2012 तक सूर्य प्रताप शाही यूपी बीजेपी अध्यक्ष रहे। भूमिहार समाज से आने वाले सूर्य प्रताप शाही वर्तमान में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके बाद लक्ष्मीकांत वाजपेई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। वाजपेई के कार्यकाल में 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपी में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके बाद भाजपा ने जातीय समीकरण सुधारा, सन् 2016 से 2017 तक केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। बाद में वह डिप्टी सीएम बने। इसके बाद अगस्त 2017 से जुलाई 2019 तक महेंद्र नाथ पांडेय प्रदेश अध्यक्ष रहे, जिनके कार्यकाल में 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 62 सीटें मिलीं। जुलाई 2019 से अगस्त 2022 तक स्वतंत्र देव सिंह यूपी बीजेपी अध्यक्ष रहे। कुर्मी समाज से आने वाले स्वतंत्र देव सिंह की अगुवाई में पार्टी ने 2022 में दोबारा सरकार बनाई, हालांकि सीटों में गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2022 में चैधरी भूपेंद्र सिंह यूपी बीजेपी अध्यक्ष बने। जाट समाज से आने वाले भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में बीजेपी को 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन से बड़ा झटका लगा। प्रदेश में भाजपा 33 सीटों पर सिमट गई। हालांकि, इसके बाद
हुए विधानसभा उपचुनावों में पार्टी ने 9 में से 6 सीटें जीतकर आंशिक वापसी की। भाजपा ने उप चुनावों में सपा
को करारा जवाब दिया। अब पंकज
चैधरी को पहले स्थानीय निकाय चुनाव और बाद में 2027 के विधानसभा
चुनाव में भाजपा का परचम फहराना होगा।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



