केशव मौर्य के बयान के सियासी निहितार्थ

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उठे विवाद में योगी और केशव मौर्या के अलग अलग सुर वाले बयानों ने सनसनी फैला दी है। विरोधी इसके अलग अर्थ निकाल रहे हैं। दोनों नेता किसी मुद्दे पर फिर खुलकर एक-दूसरे के सामने आ गए हैं। योगी और मौर्य के बयानों के बाद यूपी भाजपा फिर से दो गुटों में बंटती नजर आ रही है। इस विवाद की वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आजमगढ़ पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना है कि वह स्नान कर इस विषय का समापन करें। केशव मौर्या के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में देखा जा रहा है। इससे लगता है कि वे शंकराचार्य की स्थिति को मान्यता दे रहे हैं और विवाद को शांत करने की अपील कर रहे हैं।
आपको बता दें यूपी के प्रयागराज में मौनी अमावस्या को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शाही सवारी के साथ स्नान करने निकले थे। प्रशासन ने उनके काफिले को रोक लिया था और अन्य अखाड़ों की तरह स्नान करने की सलाह दी थी। इसके बाद से विवाद भड़क गया। बात इतनी बढ़ी कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धरने पर बैठ गए और प्रशासन ने भी नोटिस थमा दिया। सरकारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के हवाले से उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया गया। इस विवाद ने तूल पकड़ा तो यूपी में समाजवादी पार्टी भी एक्टिव हो गई और इसे सनातन का अपमान बताया।
इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कड़े शब्द कहते सुनाई दे रहे हैं।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि यही योगी, जिसे आप लोग साधु-संत कहते हो, लेकिन हम उसे हुमायूं का बेटा अकबर कहते हैं और औरंगजेब कहते हैं। वे आगे कहते हैं कि योगी हिंदू कहलाने के लायक नहीं हैं। उनका आरोप है कि योगी सरकार में कई मंदिर तोड़े गए हैं, लेकिन योगी ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी का डर है।
अविमुक्तेश्वरानंद के इन आरोपों पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने बहुत सधे शब्दों में पलटवार किया उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि एक योगी, संत और संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता है। यही उसके जीवन का ध्येय होना चाहिए। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं हो सकती है। धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान है। अगर कोई राष्ट्र के स्वाभिमान को चुनौती देता है तो हमें खुलकर उसके सामने खड़ा होना चाहिए। कोई धर्म के खिलाफ आचरण करता है, क्योंकि ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे, हमें उनसे सावधान रहना होगा, हमें सतर्क होना होगा।
हालांकि योगी ने किसी का नाम लिये बिना कालनेमियों का जिक्र किया लेकिन इससे अविमुक्तेश्वरानंद विवाद और भड़क उठा। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और यूपी सरकार के बीच विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। योगी सरकार ने उन्हें ‘शंकराचार्य’ मानने से इनकार किया और सुविधाएं रद्द करने की धमकी दी। अविमुक्तेश्वरानंद समर्थक कुछ संतों ने योगी पर ‘संत अपमान’ का आरोप लगाया। केशव का प्रणाम इसी विवाद में आया, जो सत्ता के गलियारों में भीतरी द्वन्द्व का हवाला देता है। हरियाणा के सोनीपत में योगी आदित्यनाथ के बयान को अविमुक्तेश्वरानंद पर जवाबी हमला माना जा रहा है। सीएम योगी ने कहा कि धर्म केवल वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सनातन को कमजोर करने वालों कालनेमि बता दिया। बता दें कि रामायण में कालनेमि नाम का एक मायावी राक्षस का जिक्र है, जिसने संजीवनी बूटी लाने गए हनुमान जी को संत बनकर भरमाने की कोशिश की थी। बाद में हनुमान जी ने उसके छल को पहचान लिया और फिर उसे मार डाला।
उधर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और आदित्यनाथ योगी के बीच वाक युद्ध चल रहा था, इसी बीच यूपी सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या के बयानों ने असमंजस की स्थिति पैदा करने मे कोई कसर नहीं छोड़ी है। आजमगढ़ पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अपरोक्ष समर्थन कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना है कि वह स्नान कर इस विषय का समापन करें। केशव मौर्या के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में देखा जा रहा है। इससे लगता है कि वे शंकराचार्य की स्थिति को मान्यता दे रहे हैं और विवाद को शांत करने की अपील कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और केशव मौर्य के बयानों से पार्टी में भी भ्रम की स्थिति बन गई है कि इस मुद्दे से कैसे निपटा जाए। यह बात सभी जानते हैं कि दोनों अलग-अलग खेमों से आते हैं, लेकिन यह पहली बार है जब किसी मुद्दे पर उनका खुला टकराव सामने आया है। राज्य में भाजपा सरकार की भीतरी गुटबाजी सतह पर आ गयी है। पहले सरकार व संगठन का विवाद चर्चा में था।
उधर, विवाद को तूल देने में लगे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। धुर विरोधी योगी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि संतों का अपमान हो रहा है। वहीं, भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। कुछ लोग शंकराचार्य को फर्जी कह रहे हैं, तो कुछ उनका समर्थन कर रहे हैं।मौर्य से समर्थन मिलने के बावजूद कई संतों और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने योगी आदित्यनाथ का समर्थन किया है। उनका कहना है कि माघ मेले में शाही स्नान नहीं होता, इसलिए अविमुक्तेश्वरानंद को इस पर जोर नहीं देना चाहिए था। संत समाज में भी बंटवारा दिख रहा है। योगी के समर्थक जैसे बाबा रामदेव ने उनकी भाषा की आलोचना की है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कई मौकों पर बीजेपी के फैसलों की आलोचना की थी, जिसमें अयोध्या में “अधूरे” राम मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह, कुंभ मेले का कुप्रबंधन और कोविड-19 महामारी के दौरान गंगा में तैरती लाशों का मुद्दा शामिल है। देखना है कि इस विवाद का पटाक्षेप किस तरह होता है।(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)


