प्रोटोकॉल और पॉलिटिक्स

प्रोटोकाॅल अर्थात बड़ों का सम्मान हमारी भारतीय परम्परा है। राजनीति और नौकरशाही में इसे प्रोटोकाल कहा जाता है। इन दिनों पश्चिम बंगाल में महामहिम राष्ट्रपति के साथ उचित प्रोटोकाल न करने का आरोप मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लग रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सिलीगुड़ी गयी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू अन्तरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में मुख्य अतिथि थीं। इसमें विवाद कार्यक्रम स्थल को लेकर भी था। कार्यक्रम का स्थल तय करना राज्य सरकार का काम है और आरोप है कि ममता बनर्जी की सरकार ने कार्यक्रम स्थल बदल दिया। इसके अलावा प्रोटोकाल का मामला उठाया गया। आरोप है कि प्रोटोकाल के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वहां जाना चाहिए था लेकिन मुख्यमंत्री का कहना है कि उनको राष्ट्रपति के कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं थी। उन्हें जब पता चला तब सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देव ने प्रोटोकाल का पालन करते हुए बाग डोगरा में राष्ट्रपति का स्वागत किया। यहां पर पाॅलिटिक्स को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता। पश्चिम बंगाल में दो-तीन महीने बाद ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर कीमत पर सत्ता को अपने पास बनाए रखना चाहती हैं जबकि भाजपा अपने साम्राज्य में पूर्वी भारत पर कब्जा करते हुए पश्चिम बंगाल को भी हथियाना चाहती है। असली लड़ाई यही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमला तेज कर दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जमकर खरी-खोटी सुनायी। एक तस्वीर दिखाते हुए दीदी ने कहा कि राष्ट्रपति के अपमान की परंपरा भाजपा की है, तृणमूल कांग्रेस की नहीं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में अगर कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी निजी आयोजकों व भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की है, जिसने कार्यक्रम स्थल उपलब्ध कराया था। प्रकरण के एक दिन बाद ममता बनर्जी ने अपना हमला और तेज कर दिया। वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने कहा-हमने कार्यक्रम स्थल नहीं चुना, आपने चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बागडोगरा में राष्ट्रपति का स्वागत किया। मैं लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए धरने पर बैठी हूं।
द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल में उल्लंघन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल सरकार पर महिला आदिवासी नेता और देश की राष्ट्रपति का ‘अपमान’ करने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में ममता बनर्जी ने कोलकाता के मेट्रो चैनल पर धरना स्थल से प्रधानमंत्री की एक बड़ी तस्वीर दिखायी। इसमें मोदी भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी के साथ बैठे हैं और राष्ट्रपति उनके बगल में खड़े हैं। उन्होंने तस्वीर को ‘सबूत’ बताते हुए दावा किया कि तस्वीर में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री बैठे हैं, जबकि राष्ट्रपति खड़े हैं। हम ऐसा कभी नहीं करते। राष्ट्रपति का अपमान करने की संस्कृति भाजपा की है, हमारी नहीं। ममता बनर्जी ने कहा कि हम राष्ट्रपति की कुर्सी और भारत के संविधान का पूरा सम्मान करते हैं, जिसे हम अपनी जननी मानते हैं, हमें दोष न दें। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बागडोगरा एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री और किसी भी मंत्री के न मिलने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेने वहां पहुंचीं थीं। द्रौपदी मुर्मू ने सिलीगुड़ी के पास अपने कार्यक्रम के स्थान में बदलाव पर भी असंतोष जताया था। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रपति के कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं थी। निजी आयोजकों ने भी इस बारे में उनसे कोई जानकारी नहीं ली थी। ममता बनर्जी ने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर कथित गंदगी, महिलाओं के लिए शौचालयों की कमी की जिम्मेदारी कार्यक्रम प्रबंधकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की है। यह कार्यक्रम भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की जमीन पर हुआ था। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन मामले में एक आदिवासी सांसद ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद खगेन मुर्मू ने आरोप लगाया कि बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान किया है।
ममता बनर्जी के व्यवहार पर आदिवासी समुदाय से आने वाले मालदा उत्तर के भाजपा सांसद खगेन मुर्मू ने कहा कि आदिवासियों की गरिमा का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। खगेन मुर्मू ने कहा कि केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल के ‘बादशाह’ की तरह व्यवहार कर रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी के पास आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाली सम्मेलन में आदिवासियों को संबोधित करते हुए कहा था कि ममता बनर्जी उनकी ‘छोटी बहन’ जैसी हैं। साथ ही सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री उनके दौरे से नाराज थीं, क्योंकि कार्यक्रम में न तो वह खुद आयीं, न ही कोई मंत्री मौजूद रहा। राष्ट्रपति की नाराजगी के कुछ घंटे बाद ही ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ‘भाजपा के इशारे पर बोल रही हैं’। ममता बनर्जी ने मणिपुर और छत्तीसगढ़ जैसे भाजपा शासित राज्यों में आदिवासियों के खिलाफ कथित अत्याचारों पर राष्ट्रपति की ‘चुप्पी’ पर भी सवाल उठाया। राज्य विधानसभा में भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक घोष ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को राष्ट्रपति के अपमान की विस्तृत जांच करानी चाहिए। राज्य के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। इस बीच, पश्चिम बंगाल की मंत्री शशि पांजा ने खगेन मुर्मू की आलोचना करते हुए सवाल किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिलाओं के नाम हटाये जाने पर वह सवाल क्यों नहीं उठा रहे हैं।
तृणमूल नेता ने कहा- इन महिलाओं को भी वंचित किया गया है, लेकिन भाजपा उनके बारे में बात नहीं करती।बहरहाल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से प्रोटोकॉल में हुई लापरवाही को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरे मामले पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से इस मामले में पूरी जानकारी देने को कहा है। रिपोर्ट में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान किए गए प्रोटोकॉल, कार्यक्रम स्थल, यात्रा मार्ग और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े सभी पहलुओं पर जवाब मांगा गया है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



