लेखक की कलम

राहुल के नेतृत्व पर फिर सवाल

कांग्रेस को नेहरू-गांधी परिवार ने संकट से उबारा है। आपातकाल के बाद श्रीमती इंदिरा गांधी और संजय गांधी दोनों चुनाव हार गये थे। पार्टी भी बिखर गयी थी। दिग्गज नेता जगजीवनराम, चन्द्रशेखर आदि ने किनारा कर लिया था। जनता पार्टी सरकार के गृहमंत्री चैधरी चरण सिंह ने श्रीमती इंदिरा गांधी को जेल तक पहुंचा दिया लेकिन श्रीमती इंदिरा गांधी ने जनता पार्टी के बिखराव का फायदा उठाकर कांग्रेस को एक बार फिर सत्ता दिला दी थी। श्रीमती इंदिरा गांधी की 1984 मंे गोली मार कर हत्या कर दी गयी। उस समय भी नेहरू-गांधी परिवार से ही राजीव गांधी ने नेतृत्व संभाला और राजनीति से पूरी तरह अनभिज्ञ इस पायलट ने कांग्रेस को इतने सांसद दिलाए जिसका रिकार्ड इन पंक्तियों के लिखे जाने तक भाजपा नहीं तोड़़ पायी। इसके बाद नेतृत्व नेहरू-गांधी परिवार से इतर चला गया। दक्षिण भारत के पीवी नरसिंह राव ने राजीव गांधी की हत्या के बाद नेतृत्व संभाला। सहानुभूति के दौर मंे कांगे्रस की सरकार तो बन गयी थी लेकिन मौनी बाबा ने कांग्रेस को अंधकार की तरफ धकेल दिया। उसी दौरान नेहरू-गांधी परिवार की ही बहू श्रीमती सोनिया गांधी ने पार्टी का नेतृत्व संभाला और पहली बार कांग्रेस को गठबंधन की राजनीति से जोड़कर 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए की सरकार बनी। वामपंथी दल भी इस सरकार के साथ थे और पहली बार उनको भी सबसे ज्यादा सांसद मिले थे। यह सरकार लगातार 10 साल तक चली और इस बीच राहुल गांधी को राजनीति सीखने का सुनहरा अवसर भी मिला लेकिन आज तक उनको परिपक्व नेता नहीं माना जाता है। नेहरू-गांधी परिवार के किसी भी नेता के नेतृत्व पर अब तक सवाल नहीं उठे थे। अब राहुल गांधी को लेकर कोई इशारों-इशारों मंे तो कोई खुलकर सवाल उठा ही देता है। गत दिनों महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि राहुल को बोलने की कला सीखनी चाहिए। इसके लिए सबसे पहले उन्हांेने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लिया था, फिर कहा था कांग्रेस मंे ही प्रियंका गांधी से वह (राहुल) यह कला सीख सकते हैं। अब बिहार के चर्चित नेता और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप ने कहा कि राहुल गांधी प्रियंका गांधी वाड्रा को कमान सौंप दें। राहुल गांधी से पार्टी नहीं चल पाएगी। बहरहाल, श्रीमती सोनिया गांधी को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पार्टी को प्रियंका गांधी ही बेहतर ढंग से चला सकती हैं, न कि राहुल गांधी। उन्होंने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर खुलकर सवाल खड़े किए।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेज प्रताप यादव ने कहा, कांग्रेस को सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं, वो इंदिरा गांधी जैसी हैं। राहुल गांधी से पार्टी चलने वाली नहीं है। यात्रा करने से, बुलेट पर बैठने से कुछ नहीं होता। नीतीश कुमार जी अलग हो गए, बिहार में कोई और मुख्यमंत्री बन गया। राहुल गांधी का मकसद क्या है? तेज प्रताप यादव का यह बयान राहुल गांधी द्वारा नीतीश कुमार को ‘समझौता किया हुआ नेता’ बताए जाने की प्रतिक्रिया में आया है। हाल ही में जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद बीजेपी के सम्राट चैधरी बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं। यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठे हों। इससे पहले इस साल जनवरी में कांग्रेस के पूर्व नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने भी पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस में फैसले सिर्फ राहुल गांधी की मर्जी से होते हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हाशिये पर डाला जा रहा है।
शकील अहमद ने कहा था, कांग्रेस में कई ऐसे नेता हैं जो राहुल गांधी के राजनीति में आने से पहले से सक्रिय हैं। राहुल गांधी उन नेताओं के साथ बैठने में सहज नहीं हैं, जो उन्हें अपना बॉस नहीं मानते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपने नेहरू गांधी परिवार से होने के कारण खुद को श्रेष्ठ मानते हैं और वरिष्ठ नेताओं को बाहर करने की कोशिश कर रहे हैं। तेज प्रताप यादव और शकील अहमद जैसे नेताओं के बयानों से कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही असहजता एक बार फिर सामने आ गई है। वहीं, प्रियंका गांधी को कांग्रेस की कमान देने की मांग अब बाहरी राजनीतिक दलों के नेताओं तक से सुनाई देने लगी है, जिससे पार्टी की आंतरिक चुनौतियां और गहरी होती दिख रही हैं।
कांग्रेस से नाता तोड़ चुके एक सीनियर नेता ने महिला आरक्षण बिल को लेकर पार्टी और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी समस्या अब राहुल गांधी बन चुके हैं। चाहे महिलाओं की बात हो, 370 की बात हो, तीन तलाक की बात हो, चुनाव आयोग की बात हो, संवैधानिक संस्थाओं की बात हो, झूठे आरोप लगाने की बात हो, सेना की बात हो, भारत के इतिहास की बात हो, सनातन की बात हो या राम मंदिर की बात हो। सबसे ज्यादा समस्या पैदा करने का काम राहुल गांधी कर रहे हैं। यूपी कांग्रेस के नेता रह चुके कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि जो नारी शक्ति का सम्मान नहीं करेगा, उसका पतन सुनिश्चित है।
सितंबर 2023 में महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान, राहुल गांधी के हाथ पर पट्टी बंधी हुई थी। जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस बारे में पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके अंगूठे में मामूली चोट लगी है। इसी प्रकार (जुलाई 2024) में लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने भाषण के दौरान, राहुल गांधी ने कहा कि जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वे चैबीसों घंटे हिंसा और नफरत फैलाने में लिप्त हैं। इस बयान पर भाजपा ने कड़ा विरोध किया और प्रधानमंत्री मोदी ने इसे पूरे हिंदू समाज का अपमान बताया, जिसके बाद संसद में भारी हंगामा हुआ।
24 अक्टूबर, 2013 को इंदौर में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, मुजफ्फरनगर में जो आग लगी है। ऐसे 10-15 लड़के हैं, मुसलमान लड़के हैं, जिनके भाई-बहनों को मारा गया है। पाकिस्तान के लोग उनसे बात कर रहे हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लोग उन लड़कों से बात करना शुरू कर रहे हैं और मैं, उनसे बात कर रहा हूं, कह रहा हूं कि इनके बहकावे में मत आओ। इसी तरह इलाहाबाद के गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के कार्यक्रम में छह अगस्त, 2013 को राहुल ने कहा, गरीबी सिर्फ एक मानसिक स्थिति यानी दिमागी हालत है और इसका खाना खाने, रुपये और भौतिक चीजों से कोई वास्ता नहीं है। चार अप्रैल, 2013 को दिल्ली में सीआईआई के कार्यक्रम में राहुल ने कहा, मेरे लोगों ने मुझे कहा कि भारत चीन की तुलना के चक्कर में मत पड़ो लेकिन मैं उनकी बात नहीं मानता। चीन में केंद्रीकृत व्यवस्था है, उसे ड्रैगन कहा जाता है। वह साफ दिखता भी है। वह बड़ा है, ताकतवर है। दिखता है, बड़े-बड़े ढांचे हैं और लोग हमें हाथी कहते हैं। ड्रैगन के सामने तुलना करने के लिए, लेकिन हम हाथी नहीं है। हम मधुमक्खी का छत्ता हैं। राहुल गांधी के इस प्रकार के बयान उनकी अपरिपक्वता ही दर्शाते हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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