राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में किया चिंतन

बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव बीते दिनों बड़ी मुसीबत में फंसते नजर आए। एक पुराने चेक बाउंस केस में एक्टर को जेल जाना पड़ा। 12 दिन जेल में बिताने के बाद राजपाल यादव 17 फरवरी को बाहर आए और शाहजहांपुर स्थित अपने गांव कुंडरा पहुंचे। इस दौरान वे अपने घरवालों से मिले और विचार-विमर्श किया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि तिहाड़ जेल उनके लिए चिंतन शिविर रहा।
राजपाल यादव ने कहा कि जो लोग कोर्ट-कचहरी नहीं जाते हैं ऐसे जितने लोग जेल में बंद हैं उनके प्रति सरकार को संजीदगी से विचार करना चाहिए और उनका सामाजिक उपयोग करना चाहिए। राजपाल यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अलावा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से उनकी मदद करने वाले लोगों का शुक्रिया अदा किया। साथ ही उन फैंस का भी तहे दिल से शुक्रिया अदा किया जो उन्हें कभी दुखी नहीं देख सकते। राजपाल यादव ने कहा- ‘अभिनय कला को मैं जीता हूं मेरी रग-रग में संजीदगी से लेकर आप सभी को हंसाने गुदगुदाने की ललक हिलोर मारती रहती है। अभिनय कला एक विज्ञान है और मैं विज्ञान का विद्यार्थी हूं।’ उन्होंने वर्तमान में चल रहे प्रकरण पर कुछ भी बोलने से इनकार करते हुए कहा कि अब कोर्ट में ही जवाब दिया जाएगा और मुझे कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। इसके पहले तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद अभिनेता राजपाल यादव ने चेक बाउंस मामले में बड़ा बयान दिया था। उन्होंने साफ तौर पर ये कहा कि किसी भी कानूनी जानकारी के लिए उनके वकील भास्कर उपाध्याय से संपर्क किया जा सकता है। एक्टर ने कहा कि भारतीय सिनेमा में वेवैष्णवी ने डरावने अध्याय से उठाया पर्दा
बॉलीवुड और टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री वैष्णवी मैकडोनाल्ड आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं लेकिन, हाल ही में उन्होंने अपनी जिंदगी के उस डरावने अध्याय से पर्दा उठाया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। वैष्णवी ने बताया कि उनकी पहली फिल्म वीराना की शूटिंग के बाद वह असल जिंदगी में एक सुपरनेचुरल पावर यानी भूतिया साये का शिकार हो गई थीं। एक मासूम सी गलती और सड़क पर पड़े एक अंडे ने उनके घर में ऐसी दहशत फैलाई कि उन्हें ठीक करने के लिए तांत्रिक तक की मदद लेनी पड़ी।
एक्ट्रेस वैष्णवी मैकडोनाल्ड ने बताया, जब मैंने वीराना किया था। उसके बाद सच में मैंने सुपरनेचुरल पावर महसूस किया था। हॉरर हुआ मेरे साथ। मुझ पर भूत का साया पड़ गया था और ये फिल्म वीराना के बाद हुआ जब मैं अपने घर हैदराबाद चली गई थी। मैं 9 साल की थी, चैथे क्लास में पढ़ती थी। शनिवार का दिन था, मैं स्कूल से आई उसी वक्त ये सब हुआ। उन्होंने कहा, किसी सड़क पर कुछ करके रखा था। सड़क पर मुझे एक अंडा दिखा था, जिसे मैंने उठा लिया था और बाद में वो मुझसे टूट गया। उसमें हल्दी और कुमकुम लगा हुआ था। मैंने ये बात अपने घर में अपनी हेल्पर को बताया तो अन्नपूर्णा ने मुझसे कहा कि बेबी तुमने इसे क्यों उठाया। ये सब चीजें नहीं उठानी चाहिए। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि इसे तोड़ना मत, लेकिन उसी वक्त मेरे हाथ वो स्लीप हो गया और वो टूट गया। वैष्णवी ने बताया, जिस दिन मेरे हाथ से अंडा टूटा, उसी रात से मैं नींद में चलने लगी, लेकिन मुझे याद है कि मैं होश में रहती थी। मेरी नींद टूटती नहीं थी, लेकिन मुझे याद है कि जब मैं घर में चलती थी कि तो मुझे पता रहता था कि मैं चल रही हूं। मेरा घर एक बंगला जैसा था, और मैं कॉरिडोर में चलते हुए कहती थी मेरे कपड़े तैयार करो। और ऐसा मेरे साथ लगभग एक महीने तक हुआ। आखिरकार किसी को मेरे घर पर बुलाया गया, जिसने मेरे अंदर से किसी को निकाला और सारी चीजें मेरी पहली फिल्म वीराना के बाद हुई। वैष्णवी के करियर की बात करें तो उन्होंने महज 9 साल की उम्र में रामसे ब्रदर्स की फिल्म श्वीरानाश् (1988) से बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने लाडला, बम्बई का बाबू और बरसात जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें घर-घर में असली पहचान मिली भारत के पहले सुपरहीरो शो शक्तिमान से। शो शक्तिमान में उन्होंने पत्रकार गीता विश्वास का किरदार निभाया, जो आज भी लोगों के जहन में ताजा है। वैष्णवी की सादगी और उनकी गंभीर अदाकारी ने उन्हें टीवी इंडस्ट्री की सबसे भरोसेमंद अभिनेत्रियों में से एक बना दिया। फिल्मी पर्दे के बाद वैष्णवी ने छोटे पर्दे पर अपनी दूसरी पारी शुरू की। (हिफी) लगभग 30 साल पूरे कर चुके हैं और लगभग 200-250 फिल्मों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह चेक बाउंस का किस्सा 2012-13 में शुरू हुआ था। राजपाल यादव ने साल 1999 में दिल क्या करे फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। (हिफी)



