गलबान झड़प के बाद चीन ने चुपके से किया था परमाणु परीक्षण

अमेरिका ने दावा किया है कि 2020 में गलवान झड़प के बाद चीन ने गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किया था। यह परीक्षण चीन के प्रमुख परमाणु परीक्षण स्थल लोप नूर में हुआ, जो भारत की सीमा (लद्दाख) से लगभग 1300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह वही दौर था जब गलवान घाटी में भारत-चीन तनाव चरम पर था। अब अमेरिकी सरकार ने इस कथित परीक्षण से जुड़ी नई खुफिया जानकारी सार्वजनिक की है। अमेरिकी विदेश विभाग में हथियार नियंत्रण और अप्रसार मामलों के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव के मुताबिक, 22 जून 2020 को कजाखस्तान के एक सिस्मिक स्टेशन ने 2।75 तीव्रता का हल्का भूकंप दर्ज किया। जांच में पता चला कि इसका स्रोत चीन के लोप नूर परमाणु परीक्षण स्थल के पास था।इस घटना के विस्फोट होने की संभावना बेहद अधिक है और यह परमाणु परीक्षण के अनुरूप लगती है। हालांकि स्वतंत्र विशेषज्ञ इस पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं। नॉर्वे की संस्था नोसार के मुताबिक सिग्नल कमजोर था और केवल एक स्टेशन पर रिकॉर्ड हुआ। चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है और वह खुद परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने का बहाना बना रहा है। चीन और अमेरिका दोनों ने 1990 के दशक में आखिरी आधिकारिक परमाणु परीक्षण किए थे। अमेरिका ने 1992 में और चीन ने 1996 में अंतिम परीक्षण किया था। दोनों देशों ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसे औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल के वर्षों में लोप नूर में गतिविधियां तेज हुई हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में नए सुरंग निर्माण, उपकरण क्षेत्रों के विस्तार और कर्मियों के लिए आवास सुविधाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। कार्नेगी एंडोमेंट के परमाणु विशेषज्ञ टोंग झाओ का कहना है कि चीन अपने परमाणु कार्यक्रम को विस्तार देने में लगा है। पेंटागन के अनुसार, चीन के पास अब करीब 600 परमाणु हथियार हैं और 2030 तक इसे 1000 तक पहुंचाने का लक्ष्य है।



