दूसरे विश्व युद्ध ने बदल दी थी हेलन की जिंदगी

भारतीय सिनेमा की पहली आइटम गर्ल और अभिनेत्री हेलन आज 87 वर्ष की हो गईं। हेलन बॉलीबुड की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से एक हैं, जिन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई और सफल भी रहीं। हेलन अपनी डांस प्रतिभा और शानदार अभिनय क्षमता से आज भी याद की जाती हैं। हेलेन एन रिचर्डसन का जन्म 21 नवंबर, 1938 को रंगून ब्रिटिश बर्मा में हुआ था। उनका परिवार एक साधारण जीवन जी रहा था, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।
युद्ध के दौरान हेलेन के पिता की मौत हो गई और हालात इतने खराब हो गए कि परिवार को बर्मा छोडकर पैदल ही भारत के लिए निकलना पड़ा। कोलकाता में कुछ दिन गुजारने के बाद हेलेन का परिवार बॉम्बे (अब मुंबई) पहुंच गया। मां नर्स बन गईं। नर्सिंग की मामूली कमाई से न पढ़ाई का खर्च निकल रहा था न खाने का। हेलेन जब 13 साल की हुयी तो उन्हांने पढ़ाई छोड़ दी। हेलन की मां अभिनेत्री और डांसर कुक्कु मोरे को जानती थीं। कुक्कु की वजह से ही हेलन को फिल्मों में काम मिलना शुरू हो गया। हेलेन ने वर्ष 1951 में प्रदर्शित फिल्म शबिस्तान में ग्रुप डांसर के रूप में स्क्रीन पर कदम रखा। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई। हेलन ने वर्ष 1957 में फिल्म निर्देशक प्रेम नारायण चोपड़ा से शादी कर ली थी, लेकिन यह शादी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई और 17 साल बाद शादी टूट गई। वर्ष 1958 में प्रदर्शित फिल्म हावड़ा ब्रिज के गाने मेरा नाम चिन चिन चू ने हेलेन को रातोंरात स्टार बना दिया। यहीं से शुरू हुआ वह दौर, जब हेलन का नाम अपने आप में हिट गानों की गारंटी बन गया। साठ और सत्तर के दशक में लगभग हर बड़ी फिल्म में हेलेन का एक स्पेशल डांस नंबर होता था, जिसे देखने के लिए दर्शक बेसब्र रहते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि लोग फिल्मों में सिर्फ उनका गाना देखने के लिए टिकट खरीद लेते थे। हेलेन के डांस के स्टेप्स और उनका अंदाज इतना अनोखा था कि कोरियोग्राफर भी हर गाना उनके हिसाब से खास तरीके से डिजाइन करते थे। हेलन ने सिर्फ ग्लैमर नहीं जोड़ा, बल्कि फिल्मों को एक नया स्टाइल और नई पहचान दी। उनके गाने आज भी लोगों के जुबां पर हैं, जिनमें पिया तू अब तो
आजा, उई मां उई मां यह क्या हो गया, महबूबा महबूबा, गुमनाम है
कोई, ये मेरा दिल यार का दीवाना और ओ हसीना जुल्फों वाली जैसे नाम शामिल हैं। (हिफी)



