लेखक की कलम

शशि थरूर ने दिखाया आईना

शशि थरूर कांग्रेस के वरिष्ठ और विद्वान सांसद हैं। उन्हांेने कई पुस्तकें भी लिखीं। यह अलग बात है कि उनकी क्षमता को उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस ही नहीं समझ पायी है। पिछले दिनों बजट पर संसद मंे उन्हांेने सरकार और अपनी पार्टी दोनों को आईना दिखाया। शशि थरूर ने कहा हमको मालूम है जन्नत की हकीकत क्या है, दिल को बहलाने का गालिब ख्याल अच्छा है…। इस प्रकार उन्हांेने सरकार को बताया कि बजट मंे किस तरह से बेरोजगारी को नजरंदाज किया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए वित्त वर्ष के 9 महीनों मंे सिर्फ 41 फीसद ही खर्च किया गया। इस प्रकार शशि थरूर ने सरकार को आईना दिखाया। दूसरी तरफ, अपनी पार्टी कांग्रेस, विशेष रूप से राहुल गांधी को भी आईना दिखाया है। थरूर कहना चाहते हैं कि जब किसी विशेष विषय पर चर्चा हो रही हो तो बहस को उसी पर केन्द्रित रखना चाहिए। दूसरे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं लेकिन उनको किसी अन्य समय पर ही उठाया जाना उचित होगा। शशि थरूर ने किसानों की आय दोगुनी करने के मोदी सरकार के वादे पर भी सवाल उठाया और कहा कम से कम सम्मान निधि तो बढ़ा दीजिए। वह मीडिया से बात करते समय फिसल गये थै और इसके चलते शशि थरूर ह्वील चेयर पर संसद पहुंचे थे।
लोकसभा में 10 फरवरी को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आरोप लगाया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में बेरोजगारी को नजरअंदाज किया गया, रहन-सहन पर खर्च और असमानता की अनदेखी की गई और आम आदमी की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने सदन में केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा की शुरूआत करते हुए मिर्जा गालिब के एक मशहूर शेर का उल्लेख करते हुए सरकार पर कटाक्ष किया कि ‘‘हम को मालूम है जन्नत की हकीकत, लेकिन दिल को खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस साल के बजट को देखकर प्रतीत होता है कि कार में एयर बैग को ‘रीअरेंज’ कर दिया गया है ताकि उसमें बैठे यात्री सुरक्षित महसूस करें। थरूर ने दावा किया, ‘‘बजट में बेरोजगारी को नजरअंदाज किया गया, रहन-सहन पर खर्च और असमानता की अनदेखी की गई है। आम आदमी के संघर्ष पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले बजट में 53 बड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया लेकिन वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में केवल 41 प्रतिशत ही खर्च किया गया। उन्होंने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं किये जाने पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘यह शासन नहीं, हेडलाइन मैनेजमेंट है। थरूर ने कृषि क्षेत्र पर बजट में ध्यान नहीं दिये जाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘हमारे किसानों की आय दोगुनी करने का वादा आपसे पूरा तो हो नहीं पाया, कम से कम उनकी ‘सम्मान निधि’ तो बढ़ा दीजिए। पिछले छह साल से यह (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि) केवल छह हजार रूपये पर अटकी हुई है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत बनाने के नरेन्द्र मोदी सरकार के लक्ष्य को सराहनीय बताया, हालांकि इस दिशा में बजट में किसी विश्वसनीय पथ पर आगे नहीं बढ़ने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘बेरोजगारी का बढ़ना जारी है। नौकरियां कम हो गई हैं। राहत पाने के लिए पहले से जद्दोजहद कर रहे छोटे कारोबार नियमों के अनुपालन के विभिन्न चरण में फंस गए हैं। अनौपचारिक श्रमिकों और गिग वर्कर को अनिश्चितता एवं असुरक्षा की स्थिति में धकेल दिया गया है। कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘गिग वर्कर हमारी नयी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं लेकिन बजट में उनका कोई जिक्र नहीं है।
सांसद शशि थरूर संसद परिसर की सीढ़ियों पर फोन पर बात करते हुए फिसल गए, जिसके कारण थरूर व्हीलचेयर पर पार्लियामेंट पहुंचे। थरूर ने चोट के बारे में कहा कि उन्हें हेयरलाइन फ्रैक्चर हुआ है। दर्द है और ठीक होने में चार से छह हफ्ते लगेंगे। कुछ समय व्हीलचेयर पर ही संसद आना पड़ेगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या नजर लग गई है तो इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कहीं ना कहीं तो नजर तो लगी है। मैं अपना काम करता रहूंगा। केरल मंे चुनाव तो अप्रैल में होगा। शशि थरूर ने एक्स पर लिखा कि जिस दीए को तूफां में जलना होगा, उसे संभल संभल के चलना होगा। मैं ठीक हूं। थरूर के इस बयान के अब राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। बता दें कि उसी दिन संसद भवन में हुई एक और घटना की दिनभर चर्चा रही। संसद परिसर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच नोकझोंक हो गई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि चिंता मत करो, तुम वापस आओगे। इस दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार कहा हालांकि राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री से हाथ मिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन बिना हाथ मिलाए रवनीत सिंह बिट्टू चले गए। इस पूरे मामले को लेकर भाजपा राहुल गांधी पर हमलावर हुई। बिट्टू को गद्दार कहे जाने पर दिल्ली के सात भाजपा सांसदों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान को निंदनीय करार दिया। संभल-संभल के चलने की सलाह राहुल के लिए थी।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ मुलाकात हुई। महीनों से चल रही अनबन और साइडलाइन किए जाने की खबरों के बीच यह ‘ऑल इज गुड’ वाला पल कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अप्रैल-मई में होने वाले केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह समझौता कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के लिए बहुत जरूरी था। थरूर पिछले कुछ समय से केरल कांग्रेस के भीतर खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे। कोच्चि के एक इवेंट में राहुल गांधी के व्यवहार और केरल के स्थानीय नेताओं द्वारा उन्हें दरकिनार करने की कोशिशों ने विवाद को जन्म दिया था लेकिन अब हाईकमान ने समझ लिया है कि थरूर को नाराज करना केरल की सत्ता को हाथ से जाने देने जैसा होगा। थरूर आगामी चुनाव में कांग्रेस के सबसे बड़े चुनावी चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। केरल कांग्रेस हमेशा से गुटबाजी का शिकार रही है। विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन और थरूर समर्थकों के बीच की खींचतान पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही थी। इस पैचअप ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एकता का कड़ा मैसेज दिया है। कांग्रेस के लिए यह समझौता इसलिए भी जरूरी था क्योंकि सहयोगी दल भी इस कलह से डरे हुए थे।
थरूर की ताकत उनका वो वोटर बेस है जो पारंपरिक रूप से किसी पार्टी से नहीं जुड़ा है। शिक्षित वर्ग, सैलरीड क्लास और पहली बार वोट देने वाले युवा थरूर के मुरीद हैं। तिरुवनंतपुरम जैसे शहरी इलाकों में जहां बीजेपी और लेफ्ट की पकड़ मजबूत हो रही है, वहां थरूर कांग्रेस का किला बचाने वाले अकेले योद्धा साबित हुए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के राजीव चंद्रशेखर को हराकर उन्होंने साबित किया कि उनका करिश्मा बरकरार है। अब संसद मंे अपनी वाकपटुता भी साबित कर दी है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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