ममता सरकार को सुप्रीम फटकार

ममता बनर्जी जब बहुत ही सधे कदमों से विधानसभा चुनाव के लिए चक्रव्यूह तैयार कर रही हैं, तभी उनके सेवकगण गंभीर लापरवाही दिखाते हैं। इसका संबंध सीधे-सीधे ममता बनर्जी की सरकार से जोड़ दिया जाता है। अभी पिछले दिनों माल्दा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया। भाजपा और विपक्षी दल पहले से ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर गुंडागर्दी का आरोप लगाती रही है। अब तो मामला न्याय व्यवस्था से जुड़ गया है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में मदद के लिए 7 न्यायिक अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे लेकिन उग्र भीड़ ने उनको घेर लिया। इसकी खबर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) तब पहुंच गयी। सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए देर रात तक स्वयं माॅनीटरिंग की। ऐसे गंभीर हालात में भी डीएम जैसे अफसर का घटना स्थल पर न पहुंचना सर्वोच्च न्यायालय को बहुत अखर गया। सीजेआई ने पश्चिम बंगाल सरकार को जमकर फटकार लगाई और मुख्य सचिव व गृह सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को अगली सुनवाई पर वर्चुअली पेश होने का आदेश भी दिया गया है। भाजपा इस मुद्दे को चुनाव प्रचार के दौरान जमकर उछाल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने को लेकर ममता बनर्जी सरकार को जमकर सुनाया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने पश्चिम बंगाल के मालदा में हुए विरोध प्रदर्शन का गंभीर संज्ञान लेते हुए कहा कि यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने का बेबाक प्रयास है बल्कि ये इस न्यायालय के अधिकार को भी चुनौती देती है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राज्य के मालदा जिले में 1 अप्रैल रात को बड़ा बवाल हुआ था। एसआईआर के काम में जुटे 7 न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने यहां कई घंटों तक घेरे रखा था। मालदा जिले की मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर वहां भीड़ काफी उग्र नजर आ रही थी। सैकड़ों लोगों ने कालीचक 2 बीडीओ ऑफिस के बाहर प्रदर्शन शुरू किया जो देर रात तक जारी रहा। बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में मदद के लिए इन न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी, जिनमें चार महिलाएं भी शामिल थीं, उन मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच कर रहे थे। चुनाव आयोग ने इस घटना की जानकारी कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को दी। जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत इस सत्यापन प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। इसी मामले पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने ममता सरकार को लताड़ा है।
सीजेआई सूर्य कांत राज्य सरकार से काफी नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, मुझे आधी रात में आदेश डिक्टेट करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने का बेबाक प्रयास ही नहीं है, बल्कि इस न्यायालय के अधिकार को चुनौती भी देती है। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि ऐसा लगता है कि यह एक योजनाबद्ध और प्रेरित कदम था। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस घटना का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ना और बचे हुए मामलों में आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया को रोकना था। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि हम किसी को भी यह अनुमति नहीं देंगे कि वे हस्तक्षेप करें और कानून अपने हाथ में लेकर न्यायिक अधिकारियों के मन पर मनोवैज्ञानिक हमला करें क्योंकि यह स्थापित आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कर्तव्य का परित्याग भी है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि उन्हें सूचित करने के बावजूद उन्होंने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित निकासी क्यों सुनिश्चित नहीं की? सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव को इस मामले पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सर्वोच्च अदालत ने पूछा क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई ना हो? कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष एजेंसी मामले की जांच करेगी। अदालत ने कहा कि हम मामले को मॉनिटर करेंगे। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग मालदा में हुई घटना की जांच को या तो सीबीआई या एनआईए को सौंपे और इसके बाद अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी शुरुआती जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करें।
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 7 न्यायिक अधिकारियों का घेराव कर बंधक बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बेहद गंभीर रुख सामने आया है। इसमें तीन महिला अधिकारी थीं। मालदा में दोपहर 3.30 बजे घटी इस घटना को लेकर बंगाल के डीजीपी और कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ ग्रुप कॉल की। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस खुद देर रात 2 बजे तक मामले की निगरानी करते रहे। सुबह जब सुनवाई हुई तो कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। रात 11 बजे तक घटनास्थल पर डीएम के न पहुंचने पर सवाल उठाए। घेराव खत्म होने के बाद लौट रहे इन अधिकारियों पर पथराव के साथ हमले की कोशिश भी हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की सरकार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मिश्रा ने कहा, ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। बंगाल सबसे राजनीतिक ध्रुवीकरण वाला राज्य है। मुझे आधी रात को आदेश देना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने मालदा के कालियाचक इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी मीडिया खबरों का हवाला दिया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं ने मालदा जिले के कालियाचक ब्लॉक में इन न्यायिक अधिकारियों का घेराव कर लिया था। एसआईआर के दौरान चुनाव आयोग ने तमाम मतदाताओं को विचाराधीन स्थिति में रखा है। चुनाव आयोग और बंगाल की ममता सरकार में आरोप- प्रत्यारोप के बीच वोटरों के दस्तावेजों के सत्यापन का काम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इन न्यायिक अधिकारियों को सौंपा गया था, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं। खबरों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल को इस बारे में सूचित कर दिया था, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद ऐसे वोटरों के दस्तावेजों की सत्यापन की निगरानी कर रहे हैं। मालदा के कालियाचक में घेराव शुरू हुआ, बीडीओ कार्यालय में 7 न्यायिक अधिकारियों (जिनमें 3 महिलाएं शामिल हैं) का घेराव राजदूत महालेखाकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित किया। तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया गया। इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट आधी रात तक मामले की निगरानी करता रहा।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



