यूपी में आतंकियों की भी खैर नहीं

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपने नौ वर्ष के कार्यकाल मंे सबसे ज्यादा सख्ती कानून-व्यवस्था को लेकर अपनाई है। इतनी सख्ती के बावजूद आतंकी यहां भी वारदातें करने की कुचेष्टा करते रहते हैं। गत 3 अप्रैल को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चार संदिग्ध आतंकियों को एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) ने गिरफ्तार किया है। इनमंे साकिब उर्फ डेबिल पुत्र शकील अहमद गिरोह का मुख्य सदस्य बताया जाता है। पकड़े गये चारों कथित आतंकी ऐतिहासिक चारबाग स्टेशन पर धमाका करने आये थे। एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार पकड़े गये कथित आतंकी मेरठ के अगवानपुर गांव थाना परीक्षित गढ़ इलाके के साकिब उर्फ डेबिल (25), मेरठ के अरबाब (20), गौतमबुद्ध नगर के राम बिहार कालोनी निवासी विकास गहलावत उर्फ रौनक (27) और इसी कालोनी के लोकेश उर्फ पोपला पंडित उर्फ बाबू उर्फ संजू (19) है। इससे दो बातें साफ हैं कि आतंकवादियों का कोई मजहब नहीं होता है। दूसरा यह कि किशारों और युवाओं को गलत रास्ते पर चलने के लिए उनका ब्रेनवाश किया जा रहा है अथवा उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। ये कथित आतंकी पाकिस्तानी हैण्डलरों, विभिन्न कट्टरपंथी ग्रुपों से जुड़े हैं। इनसे जानकारी जुटाकर उन जड़ों तक पहुंचना होगा जो योगी आदित्यनाथ सरकार के मजबूत किले मंे सेंध लगा रहे हैं हालांकि इतना तो उनको भी पता चल गया होगा कि योगी सरकार के रहते यूपी मंे आतंकियों के बचने की कोई राह नहीं है। इसके बावजूद इस प्रकार की साजिशें सचेत करती हैं कि अभी सघन तलाशी अभियान की जरूरत है।
बड़ी आतंकी वारदात होने से पहले ही लखनऊ में यूपी एटीएस ने साकिब, विकास, लोकेश व अरबाब को गिरफ्तार किया। इनके पास से ज्वलनशील पदार्थ, सात मोबाइल फोन, 24 पंपलेट और आधार कार्ड मिले हैं। गैस सिलिंडर और ट्रकों में आगजनी कर दहशत फैलाने की साजिश रची जा रही थी। आरोपियों ने कुछ स्थानों पर छोटी आगजनी की घटनाएं भी कीं। एटीएस ने गिरोह के मुख्य सदस्य साकिब उर्फ डेविल पुत्र शकील अहमद को शिकंजे में लिया। गिरोह का मुख्य सरगना साकिब उर्फ फैजल, निवासी मेरठ, बताया गया है, जो पेशे से नाई है। साकिब उर्फ डेविल अपने धंधे की आड़ में आतंकी पाकिस्तान हैंडलर के संपर्क में रहकर सोशल मीडिया पर देश विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहा था।एटीएस को सूचना मिली थी कि गिरोह ने दो अप्रैल 2026 को लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई है। उससे पहले ही टीम ने साकिब, विकास, लोकेश और अरबाब को गिरफ्तार कर लिया।
यह गिरोह प्रतिष्ठित संस्थानों के वाहनों के साथ रेलवे सिग्नल बॉक्स में आगजनी से दहशत फैला रहा था। गिरोह पाकिस्तान के कट्टरपंथी हैंडलर्स और अफगानिस्तान देश के कई नंबरों से जुड़ा था। यह भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने का काम कर रहा था। आतंकियों के इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य भारत में डर का माहौल बनाना था। यह लोग भारत में आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर पाकिस्तान को वीडियो भेजते थे। इसके बाद क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे मंगाते थे। पाकिस्तानी हैंडलर टेलीग्राम इंस्टाग्राम के माध्यम से ओसामा बिन लादेन फतुल्लाह गोरी कश्मीर मुजाहिदीन गजवा ए हिंद से जुड़कर धर्म के आधार पर वाहन जलाकर दहशत फैलते थे। इस गिरोह में साकिब के गांव का अरबाब भी शामिल था।साकिब ने सोशल मीडिया के माध्यम से विकास गहलावत लोकेश उर्फ पपला को गैंग से जोड़ा था। पाकिस्तानी हैंडलरों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की गूगल लोकेशन भी भेजी गई थी।
व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की सूची में मुरादाबाद से बीडीएस की पढ़ाई कर रहे सहारनपुर निवासी 19 वर्षीय हारिश का नाम भी जुड़ा है। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने हारिश को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया था। हारिश अली की एटीएस से पूछताछ में पता चला है कि उसने आतंकी गतिविधियों का जाल कई शहरों में फैला रखा था। मुरादाबाद से बीडीएस की पढ़ाई कर रहे सहारनपुर निवासी 19 वर्षीय हारिश ने इंस्टाग्राम सहित सेशन और डिस्कार्ड जैसे एन्क्रिप्टेड इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म पर फर्जी नामों और वीपीएन का उपयोग कर आइसिस समर्थित ग्रुप बनाकर उससे विभिन्न शहरों के 50 से ज्यादा युवाओं को जोड़ा था। एटीएस की जांच में यह सामने आया कि आरोपित ने मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, सहारनपुर, वाराणसी, लखनऊ व प्रयागराज सहित अन्य जिलों के दर्जनों युवाओं को आईएसआईएस के साथ जोड़ा था। यह युवा आईएसआईएस के हैंडलरों के साथ संपर्क में थे। इनके जरिए आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। इसके साथ ही देश विरोधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही थी।
हारिश डा. आदिल के जरिए ही जम्मू-कश्मीर तक जैश ए मोहम्मद के आतंकियों के सपंर्क में आया था। चूंकि वह अधिकतर समय लैपटाप पर ही सक्रिय रहता था इसलिए उसके बारे में उसके साथ पढ़ने वाले अन्य छात्रों को भी कोई खास जानकारी नहीं है। हारिश देश में आईएसआईएस मॉड्यूल के हैंडलरों व अन्य मुजाहिद साथियों के साथ जुड़कर चुनी गई लोकतांत्रिक सरकार गिराकर खिलाफत व्यवस्था के अंतर्गत शरिया कानून लाना चाहता था।
इस प्रकार देश में आतंकी गतिविधियां चलव रही हैं। लखनऊ में सामने आई जानकारी के मुताबिक, एटीएस द्वारा पकड़े गए आरोपी छोटी आगजनी की घटनाएं अंजाम देकर पाकिस्तान को वीडियो भेज रहे थे। इसके बाद पैसे मंगाए जाते थे। आरोपियों का गिरोह पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर काम कर रहा था। इस गिरोह के मुख्य सदस्य साकिब उर्फ डेविल को गिरफ्तार किया गया है। साकिब के गांव का अरबाब भी इसी काम में शामिल था। आरोपियों के पास से ज्वलनशील पदार्थ, 7 मोबाइल फोन, 24 पंपलेट और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। ये गिरोह देश की सुरक्षा में सेंध लगाने का काम कर रहा था और इस ग्रुप का मुख्य उद्देश्य भारत में डर का माहौल बनाना था। पाकिस्तानी हैंडलरो को प्रतिष्ठित संस्थानों की गूगल लोकेशन भी भेजी गई थी। पाकिस्तानी हैंडलर टेलीग्राम, इंस्टाग्राम के माध्यम से ओसामा बिन लादेन, फतुल्लाह गोरी, कश्मीर मुजाहिद्दीन, गजवा ए हिंद से जुड़कर धर्म के आधार पर वाहन जलाकर दहशत फैलाते थे। जानकारी के मुताबिक, साकिब तथा अरबाब द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से विकाश गहलावत उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला पंडित उर्फ बाबू उर्फ संजू को जोड़ा गया था जो पैसों के लालच में प्रतिष्ठित संस्थानों वाहनों की रेकी करते थे। इस गिरोह द्वारा गाजियाबाद, अलीगढ, लखनऊ शहरों में प्रतिष्ठित संस्थानों वाहनों और रेलवे सिग्नल बॉक्स की रेकी की गयी थी तथा इनके वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर को भेजे गए थे।
भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आईएसआईएस क्रिप्टो करेंसी में आतंकियों को फंडिंग कर रहा है। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की पूछताछ में गिरफ्तार आतंकी हारिस ने इसका राजफाश किया था। आरोपित ने स्वीकार किया कि उसने कई युवाओं को आईएसआईएस के साथ जोड़ा था और उन्हें क्रिप्टो करेंसी में फंडिंग की जा रही थी।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हालिया गिरफ्तारी (अप्रैल 2026) यूपी एटीएस ने पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देश पर काम करने वाले एक बड़े आतंकी गिरोह का पर्दाफाश किया है। जो रेलवे संपत्तियों और लखनऊ रेलवे स्टेशन को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। इन आरोपियों का संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से होने की खबर है। इनके पास से ज्वलनशील पदार्थ, मोबाइल फोन और डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं।
2025-26 के दौरान भी प्रयागराज जैसे इलाकों में ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ हुआ था जो मासूम लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल करने और केरल भेजने की साजिश रच रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के तहत, यूपी पुलिस और एटीएस जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए ऐसे मॉड्यूल्स को सक्रियता से खत्म कर रही है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



