लेखक की कलम

थरूर ने लगाया आलोचनाओं पर विराम

कांग्रेस नेता और केरल से सांसद शशि थरूर ने 27 दिसम्बर को अपनी पार्टी के आलोचकों का मुंह बंद कर दिया। उस दिन नई दिल्ली मंे कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक हो रही थी। बैठक मंे समय से पहुंचने के लिए शशि थरूर लगभग दौड़ते हुए सभा स्थल पर पहुंचे। तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर पिछली दो बैठकों मंे शामिल नहीं हो सके थे। हालाकि उनके दफ्तर से वाजिब कारण भी बताया गया लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार की तारीफ और पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों मंे शामिल न हो पाने को लेकर यह कहा जा रहा था कि शशि थरूर इसी बहाने अपनी नाराजगी जता रहे हैं। अब थरूर ने बैठक मंे हिस्सा लिया। इससे पूर्व क्रिसमस के दौरान ईसाइयों पर हमले की जमकर निंदा की थी। केरल के पलक्कड़ मंे कैरल गायन समूह पर हमला किया गया था। शशि थरूर ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण देने की भी वकालत की है। उन्हांेंने कहा कि प्रत्यर्पण से जुड़े मामलों मंे जटिल कानूनी प्रावधान, संधियां और अपवाद शामिल हाते हैं। इसलिए यह फैसला हम सरकार पर छोड़ते हैं कि वह उचित विचार कर निर्णय ले। हालंाकि शशि थरूर ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ की है। उन्हांेने मोदी का समर्थन करते हुए कहा कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रंेस की नहीं बल्कि भारत देश की होती है। अगर प्रधानमंत्री हारते हैं तो यह पूरे देश की पराजय होगी।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर 27 दिसम्बर को पार्टी की बैठक में शामिल होने पहुंचे। पिछली कई बैठकों से तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर दूर ही रहे थे। हर बार किसी न किसी कारण से वे बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे। यही नहीं, हाल के दिनों में वो मोदी सरकार के कामकाज की तारीफ भी कर चुके थे। कहा जा रहा था कि थरूर पार्टी से नाराज हैं लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में शामिल होकर उन्हांेने आलोचना पर विराम लगा दिया।
खास बात ये है कि थरूर ने कांग्रेस की पिछली दो बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था। संसद की शीतकालीन सत्र की रणनीति की बैठक में भी थरूर शामिल नहीं हुए थे। इसके अलावा 18 नवंबर को पार्टी की हुई एक और अहम बैठक में थरूर हिस्सा लेने नहीं पहुंचे थे। इसके अलावा संसद सत्र के दौरान ही राहुल गांधी ने भी कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी जिसमें से थरूर गायब रहे थे। हर बार अपनी गैरहाजिरी के पीछे कांग्रेस सांसद पूर्व सूचना को हथियार बनाते रहे हैं। शीतकालीन सत्र की रणनीति वाली बैठक में खुद सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी थे लेकिन थरूर ने बताया कि वो अपनी वृद्ध मां के साथ केरल में हैं। थरूर पार्टी लाइन से अलग बयान भी दे रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्रपति भवन में हुए स्वागत समारोह में भी शामिल हुए थे जबकि इस समारोह में खरगे और राहुल गांधी को न्योता भी नहीं भेजा गया था।
अब केरल मंे क्रिश्चियन पर हुए कथित हमलों को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चेतावनी दी है। तिरुवनंतपुरम के सांसद ने केरल के पलक्कड़ में कैरल गायन समूह पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अपने ईसाई भाइयों के साथ एकजुटता दिखानी चाहिए। थरूर ने कहा कि मेरे विचार से यह एकजुटता बेहद जरूरी है और हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जिसमें दुख की बात है कि देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाइयों पर हमले हो रहे हैं। पलक्कड़ में कैरल गायन समूह पर हुआ हमला वाकई चैंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि जब हमारी परंपराओं पर हमला होता है तो केवल ईसाई ही नहीं, बल्कि हम सभी भारतीय प्रभावित होते हैं। हर भारतीय पर हमला होता है। पूजा की स्वतंत्रता और आस्था की स्वतंत्रता की हमारी संवैधानिक गारंटी पर हमला हो रहा है और हम सभी को अपने ईसाई भाइयों के साथ एकजुटता से खड़ा होना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि वो हर क्रिसमस की पूर्व संध्या पर एक चर्च से दूसरे चर्च में जाते थे, हालांकि इस बार दिल्ली से उनकी उड़ान में देरी होने के कारण वह केवल चार चर्चों का दौरा ही कर सके। उन्होंने कहा कि इस साल दिल्ली से मेरी फ्लाइट लेट हो गई, इसलिए मैं सिर्फ 4 चर्च ही जा सका, लेकिन वहां जाना हमेशा बहुत खास होता है। कभी-कभी उपदेश का सिर्फ एक हिस्सा सुनना और फिर सेंट जोसेफ कैथेड्रल में आधी रात की प्रार्थना में शामिल होना।
शशि थरूर ने कहा कि चर्च-चर्च घूमने का मेरा अनुभव बेहद ही सुखद रहा। विशेष रूप से सेंट मैरी चर्च में, जहां सिरो-मलंकरा चर्च के प्रमुख आर्कबिशप कार्डिनल क्लीमिस ने मुझे मंच पर बुलाया और चॉकलेट केक का एक टुकड़ा खिलाया। कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि सभी समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करना केरल की राजनीति का मूलमंत्र है। उन्होंने कहा कि मैं पिछले 17 सालों से सांसद हूं और अपने निर्वाचन क्षेत्र के सदस्यों के साथ एकजुटता दिखाना बुनियादी बात है, लेकिन सभी समुदायों की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान दिखाना केरल की राजनीति का केंद्र बिंदु है।
हालांकि कांग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हुए कहा कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, बल्कि भारत की होती है। अगर प्रधानमंत्री हारते हैं, तो यह पूरे देश की हार है और पीएम मोदी की हार का जश्न मनाना भी भारत की हार का जश्न मनाने जैसा ही है। शशि थरूर ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के शब्दों में कहा, अगर भारत मर गया, तो फिर कौन जिंदा रहेगा? साथ ही उन्होंने पाकिस्तान से आने वाले खतरे से भी देश को आगाह किया है।
अब 27 दिसम्बर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नई दिल्ली के इंदिरा भवन स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक की अध्यक्षता की। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य वरिष्ठ दलीय नेता बैठक में उपस्थित थे। इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि लंबे समय के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी शामिल हुए। उन्हें कांग्रेस हेडक्वार्टर के पास भागते हुए आते देखा गया। शशि थरूर लंबे समय बाद भागते-भागते कांग्रेस की बैठक में पहुंचे। उन्होंने इस दौरान मीडिया का अभिवादन भी किया। वह भागने के दौरान मुस्कुराते हुए नजर आए। बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, सांसद राजीव शुक्ला और सांसद अभिषेक मनु सिंहवी सहित अन्य नेता भी मौजूद थे।
डीके शिवकुमार को सीडब्ल्यूसी की बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने पहले ही कहा था मुझे पता है कि दो-तीन मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया है लेकिन उपमुख्यमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया है। कर्नाटक मंे भी डीके शिवकुमार को लेकर विवाद है। शशि थरूर को लेकर भी विवाद है। कांग्रेस के नेतृत्व को अपने इन नेताओ की नाराजगी दूर करनी चाहिए। शशि थरूर ने अगर पहल की है तो कांग्रेस हाईकमान भी लचीला रुख अपनाए। शशि थरूर कांग्रेस के एक स्तम्भ हैं यह बात कांग्रेस नेतृत्व को याद रखनी
चाहिए। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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