सख्त हुई ‘सम्राट’ की कानून-व्यवस्था

बिहार मंे नीतीश कुमार का सुशासन भले ही चर्चा मंे रहा लेकिन अपराधियों के हौसले पस्त नहीं हो पाये। विधानसभा चुनाव के दौरन ही दुलारचंद यादव की हत्या से यही साबित हो रहा था। इसलिए बिहार के गृहमंत्री का दायित्व संभालते ही भाजपा के विधायक और राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चैधरी ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। माफियाओं की सूची बनायी जा रही है और वहां भी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बुलडोजर चलेगा। गंभीर अपराधों मंे गिरावट भी दर्ज की गयी है। पुलिस ने इस बीच 70 अपराधियों की सम्पत्ति भी जब्त की है। नये साल से पहले ही बिहार सरकार ने पुलिस विभाग को बड़ी सौगात भी दी है। उनका वेतनमान बढ़ाया गया है और पदोन्नति भी मिली है। बड़ी संख्या मंे बिहार पुलिस मंे भर्ती के लिए विज्ञापन भी निकाला गया है।
बिहार में माफिया के खिलाफ सरकार अब सख्त हो गई है। गृह मंत्री बनने के बाद सम्राट चैधरी ने कहा था कि तीन तरह के माफिया होते हैं। इनमें जमीन, शराब और बालू माफिया अहम होते हैं और इनको किसी हालत में नहीं छोड़ा जाएगा। वहीं अब इन माफियाओं पर कार्रवाई भी शुरू हो गई है। बिहार में जमीन माफिया और बालू माफियाओं की बाकायदा नई लिस्ट भी तैयार कर ली गई है, जिसमें कुल 19 नाम हैं।
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने 19 जमीन और बालू माफियाओं की पहचान करके उनकी करीब 50 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त करने का प्रस्ताव एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट को भेजा है। इनमें दानापुर से राजद के पूर्व विधायक रीतलाल यादव के भाई पिंकू यादव की संपत्ति भी शामिल है। रीतलाल यादव और पिंकू यादव दोनों फिलहाल जेल में बंद हैं। दोनों पर बिल्डर से 50 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।
बिहार मंे जिन 8 भूमाफियाओं की लिस्ट बनी है, उन सभी की संपत्ति जब्त होगी। इसके अलावा, 11 बालू माफियाओं की संपत्ति भी जब्त होगी। बिहार की आर्थिक अपराध इकाई के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि जांच में ये साफ हुआ है कि इन माफिया ने अवैध तरीकों से संपत्ति अर्जित की है, जिसे जब्त किया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसा लगता है कि बिहार में भी माफिया के खिलाफ यूपी के अंदाज में एक्शन लेने की कोशिश की जा रही है। इरादा नेक है लेकिन ये काम आसान नहीं है। माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए योगी आदित्यनाथ जैसी हिम्मत चाहिए, नैतिक बल चाहिए और पुलिस और प्रशासन पर पूरी पकड़ चाहिए। बिहार से सटे यूपी में भी कभी माफियाओं का बोलबाला था, नेताओं के संरक्षण में माफिया राज चलता था लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही यूपी की तस्वीर बदल गई। लोगों को माफिया राज से आजादी मिली, अपराधी यूपी में पस्त हुए, पुलिस का इकबाल कायम होने लगा, कानून का राज चलने लगा। बिहार में अगर योगी का ये मॉडल अपनाया जाता है तो बिहार की तस्वीर भी बदल जाएगी।
बिहार में कानून-व्यवस्था को अपराधी हर दिन चुनौती दे रहे हैं। खुलेआम हथियार लहराये जा रहे हैं, लेकिन बिहार पुलिस का दावा है कि गंभीर अपराधों की संख्या में कमी आई है। दरअसल बिहार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और डीजीपी ने बीते एक वर्ष में हुई पुलिस की कार्रवाई और उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया। इस दौरान अपर मुख्य सचिव गृह अरविंद चैधरी और डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि सख्त पुलिसिंग, तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और निरंतर अभियानों का असर अब साफ दिख रहा है। गृह विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। हत्या के मामलों में 7.72 प्रतिशत, डकैती में 24.87 प्रतिशत और दंगों की घटनाओं में
17.97 प्रतिशत की कमी आई है। अधिकारियों के अनुसार यह गिरावट अपराध नियंत्रण के लिए अपनाई गई रणनीतियों और सक्रिय पुलिसिंग का परिणाम है। संगीन अपराधों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों के तहत डकैती, लूट, दुष्कर्म और अपहरण जैसे मामलों में कुल 3.35 लाख अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही अपराध से अर्जित संपत्तियों पर भी शिकंजा कसा गया है। पुलिस ने अब तक 70 अपराधियों की संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू की है, जबकि 1,419 अपराधियों को इस कार्रवाई के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें से 405 मामलों को कोर्ट में भेजा जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि इससे संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ने में मदद मिलेगी।
बिहार में नए कानून बीएनएसएस के तहत भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। इस वर्ष 12.50 लाख लोगों पर धारा 126 के अंतर्गत निरोधात्मक कार्रवाई हुई, जिससे अपराध की संभावनाओं को समय रहते रोका जा सका। शराबबंदी को सख्ती से लागू करते हुए पुलिस ने 16.79 लाख लीटर देसी और 16.51 लाख लीटर विदेशी शराब जब्त की। वहीं नक्सल प्रभावित इलाकों में कार्रवाई के दौरान 220 नक्सलियों की बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए पुलिस ने
103 साइबर मामलों की गहन
जांच की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की।
गृह विभाग का कहना है कि आने वाले समय में भी अपराध नियंत्रण, माफिया नेटवर्क के खात्मे और जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
नए साल से पहले बिहार सरकार ने पुलिस महकमे को भी बड़ी सौगात दी है। राज्य सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रोन्नति और वेतनमान वृद्धि का आदेश जारी किया है। 43 आईपीएस अधिकारियों को प्रमोशन दिया गया है।बिहार के चर्चित पुलिस अधिकारी और वर्तमान में एडीजी मुख्यालय और एडीजी एसटीएफ कुंदन कृष्णन को डीजी रैंक में प्रोन्नति दी गई है। कुंदन कृष्णन 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी है। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार 2012 बैच के 22 आईपीएस अधिकारियों को वेतनमान में प्रोन्नति दी गई है। इन्हे डीआईजी रैंक में प्रोन्नति दी गई है जबकि आठ डीआईजी रैंक के अधिकारियांे को आईजी में प्रोन्नति दी गई है। डीआईजी से आईजी बनाये गए अधिकारियो में विवेकानंद, विकास वर्मन, किम, मनोज कुमार, संजय कुमार, उपेंद्र शर्मा, सत्यवीर सिंह और निताशा गुड़िया शामिल है। इनमे विकास बर्मन, किम, उपेंद्र शर्मा, सत्यवीर सिंह और निताशा गुड़िया केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर है। इसके साथ ही 2012 बैच के एसपी रैंक के 22 अधिकारियों को डीआईजी रैंक में प्रोन्नति दी गई है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



