क्यों जान दे रहे एनआईटी के होनहार?

देश के प्रतिष्ठित कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में द्वितीय वर्ष की एक छात्रा अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाई गई, जिससे पिछले दो महीनों में परिसर में संदिग्ध छात्र मृत्यु का यह चैथा मामला सामने आया है।एनआईटी कुरुक्षेत्र में एक और छात्रा की आत्महत्या! यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता का संकेत है। एनआईटी में प्रवेश पाने के लिए छात्र-छात्राओं द्वारा कठोर परिश्रम कर प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है तब जाकर तकनीकी शिक्षा लेने का सपना पूरा करने का मौका बिरले छात्रों को मिल पाता है लेकिन जब ऐसे होनहार छात्र-छात्राओं द्वारा मौत को गले लगाने का सिलसिला चलता है तो संस्थान के माहौल पर भी सवालिया निशान लगता है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ बताती हैं कि छात्रों का मानसिक दबाव, संस्थागत संवेदनहीनता और सपोर्ट सिस्टम की कमी अब खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है।सरकार और प्रशासन इन मौतों के मूक दर्शक बने हैं, आखिर कब जागेंगे ?
गुरुवार 16 अप्रैल, 2026 को जब दीक्षा दुबे ने अपने दोस्तों के फोन का जवाब नहीं दिया, तो वे उसके कमरे में पहुँचे और कमरा अंदर से बंद पाया। सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीमें दोपहर करीब 3 बजे मौके पर पहुँचीं और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो वह मृत पाई गईं। घटना के पीछे का सटीक कारण तत्काल पता नहीं चल पाया है। फरवरी से अब तक एनआईटी कुरुक्षेत्र में आत्महत्या का यह चैथा मामला दर्ज किया गया है।
आपको बता दें 16 फरवरी को तेलंगाना निवासी अंगोद शिव (19) अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए। प्रथम सेमेस्टर के छात्र अंगोद शिव संस्थान में कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (सीएसई) की डिग्री हासिल कर रहे थे। नूह के एक अन्य छात्र ने 31 मार्च को एनआईटी कुरुक्षेत्र में आत्महत्या कर ली। तीसरी संदिग्ध मौत की सूचना 8 अप्रैल को मिली, जब हरियाणा के सिरसा निवासी प्रियांशु शर्मा अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए। वह सिविल इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के तीसरे वर्ष के छात्र थे। हाल ही में 16 अप्रैल बिहार की रहने वाली 19 वर्षीय बीटेक छात्रा दीक्षा दुबे ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली, जिसके बाद समिति गठित की गई है।
इतना ही नहीं 18 अप्रैल शनिवार देर रात करीब 12 बजे कल्पना छात्रावास में एक छात्रा ने आत्महत्या का प्रयास किया लेकिन मौके पर मौजूद अन्य छात्रों ने समय रहते उसे बचा लिया। बताया जा रहा है कि छात्रा ने एक मैसेज में लिखा था… मेरी जिंदगी का कोई मतलब नहीं। इस घटना के बाद कैंपस में तनाव और बढ़ गया। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र के कार्यवाहक निदेशक ब्रह्मजीत ने बताया कि प्रशासन ने छात्रों द्वारा उठाई गई कई मांगों को स्वीकार कर लिया है। इन संदिग्ध मौतों के चलते कैंपस में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्रावास के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों का व्यवहार संतोषजनक नहीं था और उन्होंने स्थिति से निपटने के तरीके पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने घटना के सामने आने के बाद प्रतिक्रिया में लगने वाले समय पर भी सवाल उठाया।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र ने परिसर में हाल में छात्रों के आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। साथ ही छात्रों की समस्याओं की जांच के लिए तीन अलग-अलग समितियां भी बनाई हैं। जांच समिति इस मुद्दे पर छात्रों, प्रोफेसर, वार्डन और अन्य कर्मचारियों के साथ बातचीत करेगी। एनआईटी के जनसंपर्क अधिकारी प्रोफेसर ज्ञान भूषण ने बताया कि परिसर में हाल में हुई आत्महत्या की घटनाओं की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति की अध्यक्षता छात्र कल्याण विभाग की डीन प्रोफेसर लिली दीवान कर रही हैं और इसमें प्रोफेसर जे.के. कपूर, प्रोफेसर प्रवीण अग्रवाल, डॉ. संदीप सिंघल और डॉ। मनोज सिन्हा शामिल हैं। पुलिस ने बताया था कि दीक्षा दुबे की कथित आत्महत्या के बाद 17 अप्रैल रात को बीटेक प्रथम वर्ष की एक अन्य छात्रा ने भी कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया है।
संस्थान में मौजूदा स्थिति को देखते हुए और सभी छात्रों की सुरक्षा को
ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी छात्रों के लिए अगले आदेश तक अवकाश रहेगा। एनआईटी प्रशासन की ओर से जारी एक नोटिस के अनुसार, उन्हें 19 अप्रैल तक अपने छात्रावास खाली करने होंगे। छात्रावासों में रह रहे लगभग 5,300 छात्रों में से 2,500 से अधिक छात्रों ने संस्थान के नोटिस के बाद अपने कमरे खाली कर दिए। दूरदराज के राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रही है।
प्रशासन ने कहा कि प्रायोगिक परीक्षाओं समेत संशोधित परीक्षा कार्यक्रम की सूचना उचित समय पर दी जाएगी। छात्रों को परीक्षा शुरू होने से काफी पहले सूचित कर दिया जाएगा। हालांकि छात्रों का आरोप है कि पहले बनी जांच कमेटी ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि उन्हें मानसिक दबाव और परेशान किया जा रहा है। उनका दावा है कि एक प्रोफेसर ने यहां तक कह दिया कि “अगर सुसाइड करना है तो कैंपस के बाहर करो।” इन आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। छात्रों को हॉस्टल खाली करने का नोटिस दिया गया है। इस पर भी छात्रों ने नाराजगी जताई है और कहा है कि उन्हें जबरदस्ती घर भेजकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
सवाल उठता है कि एक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थान में ऐसी क्या गड़बड़ी है कि भविष्य संवारने के लिए आए होनहार छात्र छात्राओं को सुसाइड करने की मजबूरी आन पड़ी है? इसके पीछे क्या संस्थान के शिक्षक प्रबंधन प्रशासन की कोई गड़बड़ी जिम्मेदार है या छात्रों के बीच में ही शेरों की खाल में कोई सियार छिपे हुए हैं और छात्र-छात्राओं के साथ कोई अनैतिकता या अमानवीयता कर उन्हें सुसाइड करने के लिए मजबूर किया जा रहा है? की बार नशे के सौदागर और साइबर ठगी या निवेश के जाल मे फंसा कर ब्लेक मेल करने वाले गिरोह भी ऐसे वारदातों के पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। क्या वजह है कि सरकार ने एक के बाद एक हो रही सुसाइड की वारदातों को गंभीरता से नहीं लिया।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)



