कनाडा के दो टुकड़े करना चाहते हैं ट्रम्प

मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रंप में तनाव के बीच अमेरिका ने कनाडा पर अपनी नजर टेढ़ी कर ली है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने अल्बर्टा के बागी नेताओं से मीटिंग की। कनाडा में लंबे समय से अल्बर्टा को अलग किए जाने की मांग की जा रही है। ऐसे में इस मीटिंग को काफी अहम माना जा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक अल्बर्टा के बागी नेताओं से डोनाल्ड ट्रंप के अधिकारियों ने यह मुलाकात आजादी को लेकर की है। कनाडा ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अल्बर्टा के जरिए कनाडा को अस्थिर करने में जुटा है। ट्रंप प्रशासन की कोशिश किसी भी तरह से कनाडा की कार्नी सरकार को बैकफुट पर धकेलने की है। ट्रंप खुलेआम कनाडा की सरकार को सबक सिखाने की बात कह चुके हैं। अल्बर्टा कनाडा के पश्चिमी प्रांत में स्थिर है। कनाडा का सबसे ज्यादा तेल इसी अल्बर्टा में है। ऑयल डेशबोर्ड के मुताबिक अल्बर्टा में लगभग 165168 बिलियन बैरल तेल भंडार है।
2018 में पहली बार अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने की मांग उठी थी। उस वक्त अल्बर्टा में जमकर प्रदर्शन हुए थे। अल्बर्टा यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बोइली ने अपने एक लेख में लिखा है- शुरुआत में यह मुख्य रूप से एक आर्थिक विचार था, जिसमें कनाडा के बाकी हिस्सों के लिए भुगतान न करने की बात थी, लेकिन अब यहां पर स्वाधीनता की बात हो रही है। लोग कनाडा से खुद को अलग किए जाने की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अहम फैसले लिये। पहला फैसला टैरिफ का था और दूसरा गोल्डन डोम का। कनाडा ने दोनों ही फैसले का विरोध किया। कनाडा का कहना था कि गोल्डन डोम के जरिए हमारे संप्रभुता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कनाडा ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर भी ट्रंप का जमकर विरोध किया। हाल के दिनों में अल्बर्टा को लेकर कनाडा में आंदोलन तेज हुए हैं। इसी महीने इप्सोस के एक सर्वेक्षण में 28 प्रतिशत लोगों ने खुलकर अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने की मांग की। दिलचस्प बात है कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी इसी अल्बर्टा इलाके के रहने वाले हैं। अमेरिका के पड़ोस में जितने भी देश हैं, उससे उसके रिश्ते ठीक नहीं चल रहे। खासकर मेक्सिको, कनाडा और क्यूबा। अल्बर्टा को अलग कर अमेरिका अपना सबसे भरोसेमंद पड़ोसी देश बनाना चाहता है।



